नोएडा प्राधिकरण के सीईओ की बड़ी कार्रवाई, सर्किल-10 के सीनियर मैनेजर केवी सिंह हटाए गए, भेजे गए मूल विभाग
- Shiv Kumar
- 03 Apr, 2026
नोएडा प्राधिकरण ने अवैध निर्माण, फार्म हाउस कब्जे और आरडब्ल्यूए की लगातार शिकायतों पर सख्त रुख अपनाते हुए सर्किल-10 के वरिष्ठ प्रबंधक केवी सिंह को उनके मूल विभाग ब्रिज कॉरपोरेशन भेज दिया है। इस फैसले के बाद प्राधिकरण के भीतर हलचल तेज हो गई है और इसे जिम्मेदारी तय करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। लंबे समय से स्थानीय लोगों और आरडब्ल्यूए की ओर से मिल रही शिकायतों को देखते हुए यह कार्रवाई की गई है। अधिकारियों का मानना है कि अब ऐसे मामलों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषी पाए जाने वालों पर सख्ती तय है।
लगातार शिकायतों के बाद लिया गया फैसला
जानकारी के मुताबिक, आश्वासन समिति की बैठक में भी केवी सिंह के खिलाफ कई गंभीर आरोप सामने आए थे। आरोपों में अवैध निर्माण को बढ़ावा देने, फार्म हाउस पर कब्जे के मामलों में ढिलाई बरतने और आरडब्ल्यूए की शिकायतों को नजरअंदाज करने जैसी बातें शामिल थीं। खास बात यह रही कि जब केवी सिंह सर्किल-6 में तैनात थे, तब भी इसी तरह की शिकायतें लगातार उठती रही थीं। इससे साफ संकेत मिल रहे थे कि मामला सिर्फ एक सर्किल तक सीमित नहीं है, बल्कि लंबे समय से चल रही लापरवाही का हिस्सा है। प्राधिकरण ने इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए आखिरकार कार्रवाई का फैसला किया।
जांच के बीच बढ़े सवाल, कार्रवाई तेज
हाल ही में सर्किल-10 में अवैध निर्माण से जुड़े एक मामले की जांच चल रही थी, जिसमें केवी सिंह की भूमिका को लेकर कई सवाल खड़े हुए थे। सूत्रों की मानें तो जांच में कुछ ऐसे बिंदु सामने आए, जिनसे अधिकारियों की भूमिका पर शक और गहरा हो गया। इसी बीच वंदना त्रिपाठी ने पुष्टि करते हुए बताया कि केवी सिंह को उनके मूल विभाग ब्रिज कॉरपोरेशन वापस भेज दिया गया है। हालांकि, उन्होंने इस मामले पर ज्यादा टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। लेकिन इस कार्रवाई के बाद यह साफ हो गया है कि प्राधिकरण अब किसी भी तरह की अनियमितता को नजरअंदाज करने के मूड में नहीं है।
सख्त संदेश: अब नहीं चलेगी लापरवाही
नोएडा प्राधिकरण की इस कार्रवाई को एक मजबूत संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। साफ संकेत दिया गया है कि अवैध निर्माण, कब्जे और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में अब जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई तय है। इससे न सिर्फ अधिकारियों के बीच जवाबदेही बढ़ेगी, बल्कि आम लोगों का भरोसा भी मजबूत होगा। आरडब्ल्यूए और स्थानीय लोगों की शिकायतों को अब गंभीरता से लिया जा रहा है, जिससे भविष्य में ऐसे मामलों पर जल्दी और सख्त कदम उठाए जाने की उम्मीद है।
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