नोएडा प्राधिकरण का बड़ा फैसला, स्पोर्टस सिटी प्रोजेक्ट पर लगी रोक हटी, 40 हजार बायर्स को होगा फायदा

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नोएडा स्पोर्टस सिटी परियोजना पर लगी रोक हटने से करीब 40 हजार बायर्स को राहत मिली है। कंडीशनल ओसी के साथ बिल्डरों को तीन साल में स्पोर्टस सुविधाएं विकसित करनी होंगी और बकाया जमा करना होगा, तभी पजेशन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

नोएडा में लंबे समय से अटकी स्पोर्टस सिटी परियोजना को आखिरकार राहत मिल गई है। प्राधिकरण ने सेक्टर-78, 79, 150 और 152 में इस परियोजना पर लगी रोक हटा दी है, जिससे हजारों बायर्स के लिए उम्मीद जगी है। करीब 40 हजार लोग लंबे समय से अपने घर का इंतजार कर रहे थे, जिन्हें अब पजेशन मिलने का रास्ता साफ होता दिख रहा है। हालांकि यह राहत पूरी तरह बिना शर्त नहीं है। प्राधिकरण ने साफ किया है कि बिल्डरों को कंडीशनल ओसी ही जारी की जाएगी और उन्हें तय समय सीमा में स्पोर्टस एक्टिविटी विकसित करनी होगी। इसके साथ ही बकाया राशि का हिस्सा जमा करना भी जरूरी होगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश और बोर्ड बैठक के बाद यह फैसला लिया गया है, जिससे रुकी हुई परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता खुल गया है, लेकिन नियमों का सख्ती से पालन करना होगा।


स्पोर्टस सिटी परियोजना पर रोक हटने का क्या मतलब है
इस फैसले का सीधा असर उन हजारों बायर्स पर पड़ेगा, जो कई सालों से अपने फ्लैट के पजेशन का इंतजार कर रहे थे। अब बिल्डरों को कंडीशनल ओसी मिलने के बाद निर्माण कार्य पूरा करने और पजेशन देने की प्रक्रिया तेज हो सकती है। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि ओसी तभी जारी होगी, जब बिल्डर तीन साल के भीतर स्पोर्टस एक्टिविटी को पूरा करेंगे। इसके अलावा मानचित्रों की मंजूरी के लिए बिल्डरों को कुल बकाया का 20 प्रतिशत जमा करना होगा। साथ ही निर्माण पूरा होने तक 20 प्रतिशत इन्वेंट्री प्राधिकरण के पास गिरवी रखी जाएगी, जिससे नियमों का पालन सुनिश्चित हो सके।


परियोजना की पृष्ठभूमि और क्यों लगी थी रोक
स्पोर्टस सिटी परियोजना की शुरुआत 2008 में हुई थी, जिसका मकसद शहर में खेल सुविधाओं को बढ़ावा देना था। इसके तहत बड़े पैमाने पर जमीन आवंटित की गई और अलग-अलग बिल्डरों को विकास की जिम्मेदारी दी गई। लेकिन समय के साथ कई बिल्डरों ने न तो तय स्पोर्टस सुविधाएं विकसित कीं और न ही करीब 9 हजार करोड़ रुपये का बकाया जमा किया। इसी वजह से 2021 में प्राधिकरण ने नक्शा अप्रूवल और अन्य मंजूरियों पर रोक लगा दी थी। यह मामला बाद में कोर्ट तक पहुंचा और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब जाकर इस पर लगी रोक हटाई गई है।


प्राधिकरण की शर्तें और बिल्डरों की जिम्मेदारी
रोक हटाने के साथ ही प्राधिकरण ने कई सख्त शर्तें भी लागू की हैं। बिल्डरों को तीन साल के भीतर 70 प्रतिशत जमीन पर स्पोर्टस एक्टिविटी विकसित करनी होगी, जबकि बाकी 30 प्रतिशत हिस्से में आवासीय और व्यावसायिक निर्माण की अनुमति होगी। इसके अलावा सभी निर्माण कार्य नोएडा भवन नियमावली, अपार्टमेंट एक्ट और अन्य नियमों के अनुसार करने होंगे। जल, बिजली, सीवरेज, पार्किंग और सुरक्षा जैसी सभी सुविधाओं को हमेशा सुचारु रखना भी अनिवार्य होगा। यदि किसी तरह का नियम उल्लंघन होता है, तो उसे अनधिकृत मानकर कार्रवाई की जाएगी।


बायर्स के लिए क्या बदलेगा और आगे क्या उम्मीदें हैं
इस फैसले के बाद सबसे ज्यादा राहत बायर्स को मिलने वाली है, जिन्हें अब अपने घर का इंतजार खत्म होने की उम्मीद है। कंडीशनल ओसी के तहत पजेशन की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी, जिससे हजारों परिवारों को फायदा होगा। हालांकि बायर्स को यह भी ध्यान रखना होगा कि प्राधिकरण की शर्तों का पालन जरूरी है और सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही अंतिम कब्जा मिलेगा। आने वाले समय में यदि बिल्डर तय समय में स्पोर्टस सुविधाएं विकसित कर देते हैं, तो यह परियोजना शहर के लिए एक बड़ा उदाहरण बन सकती है।

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