नोएडा की सड़कों को किया जाएगा डस्ट फ्री, पहले चरण के लिए 30 किलोमीटर मार्ग चिन्हित, पानी का होगा छिड़काव
- Shiv Kumar
- 11 Apr, 2026
नोएडा में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर अब प्रशासन सख्त होता नजर आ रहा है। शहर की हवा को साफ बनाने के लिए प्राधिकरण ने एक अहम फैसला लिया है, जिसके तहत अब प्रमुख सड़कों को डस्ट फ्री जोन में बदला जाएगा। दिल्ली में हुई वायु गुणवत्ता प्रबंधन से जुड़ी बैठक के बाद यह निर्देश जारी किए गए हैं कि सड़कों से उड़ने वाली धूल को हर हाल में कम किया जाए। दरअसल, नोएडा की व्यस्त सड़कों पर लगातार ट्रैफिक और निर्माण गतिविधियों के कारण धूल का स्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे लोगों को सांस लेने में दिक्कत और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो रही हैं। ऐसे में यह कदम शहरवासियों के लिए राहत भरा साबित हो सकता है।
किन सड़कों को बनाया जाएगा डस्ट फ्री
प्राधिकरण ने इस योजना के तहत शहर की 15 प्रमुख सड़कों को चिन्हित किया है, जहां धूल प्रदूषण सबसे ज्यादा देखा जाता है। इनमें अशोक नगर से सेक्टर-37 बोटेनिकल गार्डन तक का मार्ग और रोड नंबर-6 जैसी व्यस्त सड़कें शामिल हैं। इन इलाकों में दिनभर भारी ट्रैफिक रहता है, जिससे सड़कों पर धूल उड़ना आम बात है। अधिकारियों का मानना है कि इन सड़कों पर विशेष ध्यान देकर प्रदूषण के स्तर को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इस योजना के लागू होने के बाद इन रास्तों से गुजरने वाले लोगों को साफ हवा मिल सकेगी और आसपास के क्षेत्रों में भी सकारात्मक असर देखने को मिलेगा।
पहले चरण में 30 किलोमीटर सड़कें होंगी कवर
इस अभियान को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। पहले चरण में करीब 30 किलोमीटर लंबी सड़कों को डस्ट फ्री बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए सड़कों के दोनों किनारों पर घास की पट्टी तैयार की जाएगी, जिससे मिट्टी उड़ने की संभावना कम हो जाएगी। साथ ही इन घास की पट्टियों पर नियमित रूप से पानी का छिड़काव किया जाएगा ताकि धूल जमकर रहे और हवा में न फैले। बता दें कि इससे पहले भी प्राधिकरण ने कुछ सड़कों पर इसी तरह का प्रयोग किया था, लेकिन बीच में यह योजना रुक गई थी। अब इसे दोबारा शुरू किया जा रहा है और इस बार इसे पूरी मजबूती के साथ लागू करने की तैयारी है।
सफाई, पानी और निगरानी से मिलेगी राहत
सिर्फ घास लगाने तक ही यह योजना सीमित नहीं है, बल्कि इसके तहत सड़कों की नियमित सफाई, मशीनों से सफाई और समय-समय पर पानी का छिड़काव भी किया जाएगा। इसके साथ ही सड़कों के किनारों पर हरियाली बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा, ताकि प्राकृतिक रूप से धूल को रोका जा सके। निर्माण कार्यों की निगरानी भी सख्ती से की जाएगी, जिससे अनियंत्रित धूल उड़ने पर रोक लगे। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इन उपायों को सही तरीके से लागू किया गया, तो शहर की हवा में सुधार साफ नजर आएगा और लोगों को सांस से जुड़ी समस्याओं से भी काफी हद तक राहत मिलेगी।
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