नोएडा में फैक्ट्री कर्मचारियों ने क्यों काटा हंगामा? यूपी के मजदूरों की क्या है डिमांड? कहां से शुरू हुआ पूरा बवाल? जानें सबकुछ यहां

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नोएडा और ग्रेटर नोएडा में वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर श्रमिकों का प्रदर्शन हिंसक हो गया। 13 इलाकों में तोड़फोड़ और आगजनी हुई। हरियाणा में 35 प्रतिशत वेतन बढ़ोतरी के फैसले के बाद यहां भी कर्मचारियों ने समान मांग उठाई, जिससे विवाद बढ़ गया।

नोएडा। उत्तर प्रदेश के नोएडा और ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक इलाकों में सोमवार को श्रमिकों का प्रदर्शन अचानक हिंसक हो गया। 9 अप्रैल से वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन देखते ही देखते बवाल में बदल गया। हजारों की संख्या में कर्मचारी सड़कों पर उतर आए और 13 अलग-अलग इलाकों में तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं सामने आईं। पुलिस के कई वाहनों को भी आग के हवाले कर दिया गया और जमकर पथराव हुआ। हालात ऐसे बिगड़े कि नेशनल हाईवे-9 पर लंबा जाम लग गया और लोगों को घंटों परेशानी झेलनी पड़ी। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी शांति की अपील करनी पड़ी।


हरियाणा के फैसले से भड़का गुस्सा

नोएडा के फैक्ट्री कर्मचारियों में गुस्से की सबसे बड़ी वजह पड़ोसी राज्य हरियाणा का हालिया फैसला बताया जा रहा है। 9 अप्रैल को हरियाणा सरकार ने कैबिनेट बैठक में न्यूनतम वेतन में करीब 35 प्रतिशत बढ़ोतरी का ऐलान किया, जिसके बाद 10 अप्रैल को इसकी अधिसूचना जारी हुई। जैसे ही यह खबर नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में पहुंची, यहां के कर्मचारियों ने भी समान वेतन बढ़ोतरी की मांग शुरू कर दी। हरियाणा में अकुशल मजदूरों का वेतन बढ़ाकर 15220 रुपए तक कर दिया गया है, जबकि नोएडा में यह करीब 11313 रुपए ही है। दैनिक मजदूरी में भी बड़ा अंतर है, जिससे असंतोष और बढ़ गया।


वर्करों की 5 प्रमुख मांगें बनीं आंदोलन की वजह

बढ़ती महंगाई और खर्चों के दबाव के बीच कर्मचारियों ने पांच मुख्य मांगें उठाईं। इनमें हरियाणा की तर्ज पर कम से कम 35 प्रतिशत वेतन वृद्धि, ओवरटाइम का दोगुना भुगतान, हर महीने की 10 तारीख तक वेतन और सैलरी पर्ची, साप्ताहिक अवकाश और बोनस का सीधा भुगतान शामिल है। कर्मचारियों का कहना है कि मौजूदा वेतन में गुजारा करना मुश्किल हो गया है। प्रदर्शन के दौरान गुस्साए कर्मचारियों ने आम लोगों की गाड़ियों को भी निशाना बनाया, जिससे हालात और बिगड़ गए।


क्या कहते हैं श्रम कानून और कहां अटका मामला

श्रम कानूनों के अनुसार कर्मचारियों को सुरक्षित कार्यस्थल, तय समय से अधिक काम पर अतिरिक्त भुगतान, भविष्य निधि और बीमा जैसी सुविधाएं मिलनी चाहिए। साथ ही बिना वजह वेतन कटौती गैरकानूनी है। हालांकि प्रशासन ने कर्मचारियों की मांगों पर सहमति जताई, लेकिन उद्योग मालिक पूरी तरह तैयार नहीं हुए। यही वजह रही कि विवाद सुलझ नहीं पाया और आंदोलन उग्र हो गया।


10 से 13 अप्रैल तक ऐसे बढ़ा विवाद

10 और 11 अप्रैल को होजरी कॉम्प्लेक्स और सूरजपुर-दादरी रोड पर करीब हजार कर्मचारियों ने प्रदर्शन शुरू किया। पुलिस कार्रवाई के बाद तनाव और बढ़ गया और मामला लखनऊ तक पहुंच गया। 12 अप्रैल को जिलाधिकारी मेधा रूपम और श्रम विभाग ने उद्योगपतियों के साथ बैठक कर समाधान की कोशिश की, लेकिन वेतन बढ़ाने पर सहमति नहीं बन सकी। 13 अप्रैल को आश्वासनों से नाराज कर्मचारी बड़ी संख्या में सड़कों पर उतर आए और प्रदर्शन हिंसक हो गया।

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