नोएडा हिंसा के पीछे बड़ी साजिश का खुलासा, तीन दिन में बने 80 वाट्सएप ग्रुप, 17 में सबसे ज्यादा शेयर किए गए भड़काऊ पोस्ट

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नोएडा में हुए श्रमिकों के हिंसक प्रदर्शन के पीछे तीन संगठनों की साजिश सामने आई है। 80 से ज्यादा व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर मजदूरों को भड़काया गया। पुलिस ने 18 आरोपियों को गिरफ्तार किया है और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जांच जारी है।

नोएडा के अलग-अलग औद्योगिक क्षेत्रों में हाल ही में हुए श्रमिकों के हिंसक प्रदर्शन को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस जांच में सामने आया है कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे तीन संगठनों की भूमिका रही है, जिनमें मजदूर बिगुल दस्ता प्रमुख बताया जा रहा है। इस संगठन के प्रमुख रूपेश राय को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है, जबकि 18 अन्य आरोपियों को भी अलग-अलग जगहों से पकड़ा गया है। जांच में यह भी सामने आया है कि मजदूरों को भड़काने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया गया और बड़ी संख्या में व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए। इन ग्रुप्स के जरिए लोगों को एकजुट कर फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ और हिंसा के लिए उकसाया गया। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।


3 संगठनों की भूमिका, मजदूर बिगुल दस्ता मुख्य आरोपी
पुलिस जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि नोएडा में हुई हिंसा कोई अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि इसके पीछे संगठित साजिश थी। तीन संगठनों के नाम सामने आए हैं, जिनमें मजदूर बिगुल दस्ता को मुख्य भूमिका में बताया गया है। इस संगठन के लोग लंबे समय से औद्योगिक क्षेत्रों में सक्रिय थे और मजदूरों के बीच जाकर उन्हें भड़काने का काम कर रहे थे। पुलिस ने संगठन के प्रमुख रूपेश राय को गिरफ्तार कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। अधिकारियों का कहना है कि इस संगठन का नेटवर्क काफी बड़ा है और यह सिर्फ एक जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य राज्यों में भी सक्रिय हो सकता है।


3 दिन में 80 से ज्यादा व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि महज तीन दिनों के भीतर 80 से अधिक व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए थे। इन ग्रुप्स का मकसद मजदूरों को एकजुट करना और उन्हें हिंसक प्रदर्शन के लिए उकसाना था। अब तक करीब 50 ग्रुप की जानकारी पुलिस को मिल चुकी है, जिनमें से 17 ग्रुप का सत्यापन भी किया जा चुका है। इन ग्रुप्स में खुले तौर पर हिंसा भड़काने वाले संदेश साझा किए गए थे। पुलिस का कहना है कि यह पूरी योजना सुनियोजित तरीके से बनाई गई थी, ताकि कम समय में ज्यादा से ज्यादा लोगों को जोड़ा जा सके और माहौल को उग्र बनाया जा सके।


वास्तविक मांगों की बजाय हिंसा पर था जोर
सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि इन व्हाट्सएप ग्रुप्स में मजदूरों की असली समस्याओं पर कोई चर्चा नहीं की गई थी। आमतौर पर मजदूर वेतन बढ़ाने या काम की स्थिति सुधारने जैसी मांगों को लेकर प्रदर्शन करते हैं, लेकिन इन ग्रुप्स में सिर्फ भीड़ जुटाने और फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ करने की बातें लिखी जा रही थीं। इससे साफ होता है कि प्रदर्शन का उद्देश्य समस्याओं का समाधान नहीं, बल्कि माहौल को बिगाड़ना था। पुलिस इसे एक सुनियोजित साजिश के रूप में देख रही है और इसके पीछे जुड़े लोगों की पहचान करने में जुटी है।


मानेसर हिंसा से भी जुड़ चुका है संगठन का नाम
मजदूर बिगुल दस्ता संगठन का नाम इससे पहले हरियाणा के मानेसर में हुई औद्योगिक हिंसा में भी सामने आ चुका है। इससे यह संकेत मिलता है कि यह संगठन पहले भी इस तरह की गतिविधियों में शामिल रहा है। पुलिस का मानना है कि संगठन के सदस्य अलग-अलग औद्योगिक क्षेत्रों में जाकर मजदूरों को प्रभावित करते हैं और उन्हें उग्र प्रदर्शन के लिए तैयार करते हैं। इस बार भी इसी तरह की रणनीति अपनाई गई थी। जांच एजेंसियां अब इस संगठन के पूरे नेटवर्क को खंगालने में लगी हुई हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।


सोशल मीडिया और एक्स हैंडल से फैलाया गया माहौल
जांच के दौरान पुलिस को 50 से अधिक संदिग्ध एक्स हैंडल की जानकारी मिली है, जो हिंसा से एक-दो दिन पहले ही बनाए गए थे। इन हैंडल्स के जरिए लगातार भड़काऊ पोस्ट डाली जा रही थीं, जिससे लोगों के बीच गुस्सा बढ़ाया जा सके। पुलिस ने इन अकाउंट्स की जानकारी जुटाने के लिए संबंधित कंपनी से संपर्क किया है और आधिकारिक पत्र व ईमेल भेजे हैं। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस तरह गलत इस्तेमाल करना गंभीर मामला है और इसमें शामिल लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।


17 व्हाट्सएप ग्रुप्स का सत्यापन, 18 आरोपी गिरफ्तार

अब तक पुलिस 17 व्हाट्सएप ग्रुप्स का सत्यापन कर चुकी है और इनसे जुड़े 18 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इन लोगों की भूमिका हिंसा भड़काने और लोगों को उकसाने में पाई गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह जांच अभी जारी है और आने वाले समय में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क को तोड़ने की कोशिश की जा रही है। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि किन-किन लोगों ने इन ग्रुप्स के जरिए संदेश फैलाए और किस स्तर पर योजना बनाई गई थी।


आगे भी हो सकती हैं और गिरफ्तारियां
पुलिस का कहना है कि अभी जांच शुरुआती चरण में है और जैसे-जैसे नए सबूत सामने आएंगे, वैसे-वैसे कार्रवाई तेज की जाएगी। कई संदिग्ध लोगों की पहचान की जा चुकी है और उनकी तलाश जारी है। अधिकारियों का मानना है कि यह मामला सिर्फ कुछ लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है। इसलिए पूरे मामले की गहराई से जांच की जा रही है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके और कानून व्यवस्था बनाए रखी जा सके।

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