नोएडा में हिंसा पाकिस्तान से हो रही थी ऑपरेट, कमिश्नर का दावा- ट्विटर हैंडल्स और वॉट्सएप ग्रुपों के जरिए श्रमिकों को भड़काया

top-news
नोएडा हिंसा मामले में पुलिस ने तीन साजिशकर्ताओं की पहचान की है। दो गिरफ्तार हैं, एक फरार है। जांच में पाकिस्तान से संचालित फेक सोशल मीडिया हैंडल और व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए हिंसा भड़काने का खुलासा हुआ है।

नोएडा में हुए हिंसक प्रदर्शन को लेकर पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। जांच में सामने आया है कि इस पूरे बवाल के पीछे सुनियोजित साजिश रची गई थी। पुलिस ने तीन मुख्य साजिशकर्ताओं की पहचान की है, जिनमें रूपेश राय और मनीषा चौहान को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि आदित्य आनंद अभी फरार है। पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि ये तीनों आरोपी हिंसा के दौरान नोएडा में मौजूद थे और श्रमिकों को भड़काने में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। इस मामले में ‘मजदूर बिगुल दस्ता’ नाम का संगठन भी सामने आया है, जिसका प्रमुख रूपेश राय बताया जा रहा है।


वॉट्सएप ग्रुप और सोशल मीडिया से भड़काई गई हिंसा

पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि 9 और 10 अप्रैल को आरोपियों ने वॉट्सएप ग्रुप बनाकर बड़ी संख्या में श्रमिकों को जोड़ा। इन ग्रुप्स के जरिए लोगों को सड़कों पर उतरने, आगजनी और तोड़फोड़ करने के लिए उकसाया गया। डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर माहौल को तेजी से भड़काया गया, जिसके बाद 13 अप्रैल से हजारों कर्मचारी सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शन के दौरान कई फैक्ट्रियों में पथराव हुआ, गाड़ियों के शीशे तोड़े गए और 50 से ज्यादा वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया। दो दिनों तक अलग-अलग इलाकों में हिंसा का दौर चला।


पाकिस्तान से संचालित संदिग्ध हैंडल, वीपीएन का इस्तेमाल

जांच के दौरान पुलिस को दो संदिग्ध सोशल मीडिया हैंडल ‘Meer Ilayasi’ और ‘Ayushi Tiwari’ के बारे में जानकारी मिली। पुलिस के अनुसार, ये हैंडल पाकिस्तान से संचालित किए जा रहे थे और पिछले तीन महीनों से सक्रिय थे। इन हैंडल्स के जरिए भ्रामक और भड़काऊ पोस्ट साझा की गईं, जिससे लोगों में डर और गुस्से का माहौल बना। सूत्रों के मुताबिक, इनको चलाने में वीपीएन का भी इस्तेमाल किया गया, ताकि असली लोकेशन छिपाई जा सके। पुलिस ने इनका बैक डेटा भी मंगवाया है और जांच आगे बढ़ाई जा रही है।


62 गिरफ्तार, 13 मुकदमे दर्ज, वेतन बढ़ाने का फैसला

पुलिस कमिश्नर के मुताबिक, इस मामले में अब तक 62 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और 13 मुकदमे दर्ज किए गए हैं। सभी आरोपियों को जेल भेज दिया गया है। वहीं, हिंसा के बाद सरकार ने फैक्ट्री कर्मचारियों की न्यूनतम मजदूरी में करीब 3000 रुपए तक बढ़ोतरी करने का फैसला लिया है, जो 1 अप्रैल से लागू होगी। अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी और पूरे मामले की गहराई से जांच की जा रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *