नोएडा में ई-साइकिल परियोजना में बड़ा घोटाला, कंपनी ब्लैकलिस्ट, 2 लाख जुर्माना, अनुबंध भी रद्द

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नोएडा ई-साइकिल परियोजना में गड़बड़ी के बाद टर्बन मोबिलिटी का अनुबंध रद्द कर दिया गया। कंपनी पर 2 लाख का जुर्माना लगाकर दो साल के लिए ब्लैकलिस्ट किया गया है।

नोएडा प्राधिकरण की ई-साइकिल परियोजना में बड़ी गड़बड़ी सामने आने के बाद सख्त कार्रवाई की गई है। शासन की ओर से जांच रिपोर्ट मांगे जाने के बाद प्राधिकरण ने आनन-फानन में संचालन कंपनी टर्बन मोबिलिटी का अनुबंध रद्द कर दिया। साथ ही कंपनी पर 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया और उसे दो साल के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। मामला अवैध विज्ञापन और परियोजना के सही तरीके से संचालन न करने से जुड़ा है, जिससे प्राधिकरण की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं।


परियोजना शुरू होते ही फ्लॉप, साइकिल चली नहीं लेकिन विज्ञापन शुरू

यह ई-साइकिल परियोजना वर्ष 2023 में पर्यावरण संरक्षण और शहर में आसान आवागमन के उद्देश्य से शुरू की गई थी। तत्कालीन सीईओ रितु माहेश्वरी ने इसे लॉन्च किया था, ताकि लोग दफ्तरों तक आसानी से पहुंच सकें। लेकिन महज चार महीने के भीतर ही यह योजना फ्लॉप हो गई, क्योंकि कंपनी ने जमीनी स्तर पर कोई खास काम नहीं किया। आरोप है कि कंपनी ने साइकिल संचालन के बजाय डाक स्टेशनों पर यूनीपोल लगाकर अवैध विज्ञापन का काम शुरू कर दिया, जो एग्रीमेंट के खिलाफ था।


बिना अनुमति बदला एग्रीमेंट, अधिकारियों की भूमिका पर सवाल

जांच में सामने आया कि कंपनी ने नोएडा ट्रैफिक सेल के कुछ अधिकारियों के साथ मिलकर बिना सीईओ की अनुमति के एग्रीमेंट में बदलाव करवा लिया। इसके बाद परियोजना के नाम पर विज्ञापन का खेल शुरू कर दिया गया। शिकायत मिलने पर प्राधिकरण ने तीन सदस्यीय समिति बनाकर पूरे मामले की जांच कराई।


कई बिंदुओं पर उठे सवाल, जीएम से मांगा जवाब

जांच समिति ने कई अहम बिंदुओं पर सवाल उठाए हैं। इसमें यह पूछा गया कि क्या कंपनी एग्रीमेंट के अनुसार ई-साइकिल चला रही थी या नहीं, और डाक स्टेशनों पर विज्ञापन के अधिकार कितने दिए गए थे। साथ ही फाइल प्रोसेसिंग में किन अधिकारियों की भूमिका रही, इसकी भी जांच की गई है।


शासन के दबाव के बाद कार्रवाई, दो साल के लिए ब्लैकलिस्ट

दो दिन पहले शासन ने इस पूरे मामले में प्राधिकरण से जवाब तलब किया था, जिसके बाद तुरंत कार्रवाई की गई। प्राधिकरण ने कंपनी का अनुबंध रद्द करते हुए उस पर 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया और दो साल के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया। इस कार्रवाई के बाद साफ है कि अब परियोजनाओं में लापरवाही और अनियमितताओं पर सख्ती बढ़ेगी।

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