बीटेक पास कर नौकरी करने आया था नोएडा हिंसा का मुख्य आरोपी, 5 साल पहले मजदूरों के संगठनों से जुड़ा

top-news
नोएडा हिंसा के मुख्य आरोपी आदित्य आनंद को एसटीएफ ने गिरफ्तार कर लिया है। सॉफ्टवेयर इंजीनियर आदित्य ने सोशल मीडिया और व्हाट्सएप के जरिए भीड़ जुटाई थी। जांच में कई संगठनों की भूमिका सामने आई है और पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।

नोएडा में हुए श्रमिकों के हिंसक आंदोलन के पीछे सामने आए मुख्य आरोपी आदित्य आनंद की कहानी अब कई बड़े खुलासे कर रही है। करीब पांच साल पहले Bihar से नौकरी की तलाश में नोएडा आए आदित्य ने एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम शुरू किया था, लेकिन धीरे-धीरे वह मजदूर संगठनों के संपर्क में आकर आंदोलन की गतिविधियों में सक्रिय हो गया। पुलिस और एसटीएफ की जांच में सामने आया है कि आदित्य ने सोशल मीडिया और तकनीक का इस्तेमाल कर मजदूरों को संगठित किया और बाद में यही नेटवर्क हिंसक घटनाओं में बदल गया। अधिकारियों का कहना है कि यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक पूरा संगठित नेटवर्क काम कर रहा था, जिसकी परतें अब धीरे-धीरे खुल रही हैं।


आदित्य आनंद का बैकग्राउंड और संगठन से जुड़ाव
एसटीएफ के मुताबिक आदित्य आनंद ने पढ़ाई पूरी करने के बाद नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में नौकरी शुरू की थी। इसी दौरान उसने सोशल मीडिया पर ‘मजदूर बिगुल’ नाम के संगठन के बारे में पढ़ा और साल 2022 में उससे जुड़ गया। शुरुआत में वह फैक्ट्रियों से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग करता था, लेकिन धीरे-धीरे संगठन के अंदर उसकी भूमिका बढ़ती गई। इसी दौरान उसकी मुलाकात संगठन के प्रमुख रूपेश राय से हुई, जिसके बाद दोनों ने मिलकर नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों और मजदूरों से जुड़ा विस्तृत डेटा तैयार किया।


कैसे तैयार हुई हिंसा की पूरी योजना
जांच एजेंसियों का दावा है कि 30 मार्च से 1 अप्रैल के बीच सेक्टर-37 स्थित अरुण विहार के एक कमरे में कई संगठनों के लोग इकट्ठा हुए थे। यहां तीन दिनों तक बैठकों का दौर चला, जिसमें यह तय किया गया कि श्रमिक आंदोलन को किस तरह बड़े स्तर पर ले जाया जाए। एसटीएफ के अनुसार इस दौरान हिंसा, आगजनी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की योजना भी बनाई गई।


तकनीक और व्हाट्सएप के जरिए भीड़ जुटाई गई
पुलिस अधिकारियों के अनुसार आदित्य आनंद ने अपनी तकनीकी समझ का इस्तेमाल करते हुए व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए बड़ी संख्या में लोगों को जोड़ा। 9 से 10 अप्रैल के बीच कई ग्रुप बनाए गए, जिनमें लोगों को जोड़कर उन्हें प्रदर्शन में शामिल होने के लिए प्रेरित किया गया। जांच में सामने आया है कि इन ग्रुप्स में भड़काऊ संदेश भी साझा किए गए, जिससे माहौल तेजी से बिगड़ गया और आंदोलन हिंसक रूप ले बैठा।


कैसे हुई गिरफ्तारी, STF की बड़ी कार्रवाई
आदित्य आनंद के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी होने के बाद वह नोएडा से भागकर दक्षिण भारत पहुंच गया था। पुलिस लगातार उसकी तलाश में कई राज्यों में छापेमारी कर रही थी। आखिरकार एसटीएफ को उसकी लोकेशन की जानकारी मिली और उसे Tiruchirappalli रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया गया। अधिकारियों का कहना है कि यह गिरफ्तारी पूरे मामले में एक बड़ी सफलता है और इससे कई और खुलासे होने की उम्मीद है।


नोएडा हिंसा की पूरी टाइमलाइन क्या रही?
नोएडा में 9 अप्रैल से श्रमिकों ने वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू किया था। 13 अप्रैल को यह प्रदर्शन अचानक हिंसक हो गया और कई जगहों पर तोड़फोड़, आगजनी और सड़क जाम की घटनाएं सामने आईं। सेक्टर-57, 40, 60 और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में फैक्ट्रियों को नुकसान पहुंचाया गया। हालात बिगड़ने पर पुलिस के साथ झड़प भी हुई और कई जगहों पर अतिरिक्त बल तैनात करना पड़ा।


सरकार और प्रशासन की कार्रवाई
हिंसा के बाद सरकार ने तुरंत कदम उठाते हुए न्यूनतम मजदूरी दरों में करीब 3000 रुपये तक की बढ़ोतरी कर दी। यह बढ़ोतरी 1 अप्रैल से लागू करने का आदेश दिया गया। इसके साथ ही पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए कई आरोपियों को गिरफ्तार किया और पूरे नेटवर्क की जांच शुरू कर दी।


आगे क्या हो सकती है कार्रवाई?
पुलिस और एसटीएफ अब इस मामले से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है। डिजिटल साक्ष्यों और सर्विलांस के जरिए पूरे नेटवर्क को खंगाला जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं और इस मामले में सख्त कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *