नोएडा में प्रशासन की बड़ी पहल, 4 जोनल और 19 सेक्टर मजिस्ट्रेट नियुक्त, कारोबारियों और श्रमिकों के साथ समन्वय बनाकर शांति व्यवस्था रखेंगे कायम

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नोएडा में श्रमिक आंदोलन के बाद प्रशासन ने औद्योगिक सेक्टरों को 4 जोन में बांटकर जोनल और सेक्टर मजिस्ट्रेट तैनात किए, शांति व्यवस्था पर फोकस।

नोएडा में हाल ही में हुए हिंसक श्रमिक आंदोलन के बाद जिला प्रशासन अब पूरी तरह सतर्क हो गया है। उद्योगों और श्रमिकों के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखने और भविष्य में किसी भी तरह की अशांति को रोकने के लिए प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत सेक्टर-1 से लेकर सेक्टर-69 तक के सभी औद्योगिक क्षेत्रों को चार अलग-अलग जोन में बांट दिया गया है। हर जोन में जोनल मजिस्ट्रेट और सेक्टर मजिस्ट्रेट की तैनाती की गई है, जिनकी जिम्मेदारी शांति व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ कारोबारियों और मजदूरों के बीच संवाद कायम रखना होगा। प्रशासन का मानना है कि इस व्यवस्था से विवादों को शुरुआती स्तर पर ही सुलझाया जा सकेगा और हालात बिगड़ने से पहले ही नियंत्रण किया जा सकेगा।


चार जोन में बंटा नोएडा, अधिकारियों को मिली जिम्मेदारी
प्रशासन के आदेश के मुताबिक चार जोनल मजिस्ट्रेट नियुक्त किए गए हैं, जिनमें मुख्य विकास अधिकारी शिवाकांत द्विवेदी, ओएसडी डीपी सिंह, अपर जिलाधिकारी बच्चू सिंह और ओएसडी अभिषेक पाठक शामिल हैं। इनके अधीन कुल 19 सेक्टर मजिस्ट्रेट तैनात किए गए हैं, जो अलग-अलग सेक्टरों की जिम्मेदारी संभालेंगे। पहले जोन में सेक्टर-1 से 6 तक का जिम्मा दिया गया है, जहां डिप्टी कलेक्टर और प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारी तैनात रहेंगे। दूसरे जोन में सेक्टर-7 से 16 तक के क्षेत्र शामिल हैं, जहां अधिकारियों की अलग टीम बनाई गई है। तीसरे और चौथे जोन में भी अलग-अलग अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है, ताकि हर क्षेत्र पर निगरानी मजबूत हो सके और किसी भी विवाद की स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।


समन्वय और शांति व्यवस्था पर रहेगा पूरा फोकस
इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य औद्योगिक क्षेत्रों में शांति और संतुलन बनाए रखना है। प्रशासन ने साफ किया है कि अब किसी भी विवाद को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा और मौके पर मौजूद अधिकारी तुरंत हस्तक्षेप करेंगे। नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया गया है, ताकि उद्योगों से जुड़े मुद्दों का समाधान तेजी से हो सके। लगातार संवाद के जरिए श्रमिकों की समस्याओं को सुना जाएगा और कारोबारियों के हितों का भी ध्यान रखा जाएगा। प्रशासन का मानना है कि इस कदम से औद्योगिक माहौल बेहतर होगा और भविष्य में किसी बड़े विवाद या आंदोलन की संभावना काफी हद तक कम हो जाएगी।

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