नोएडा के कारोबारियों ने सरकार से मांगी सालाना 15 फीसदी प्रोत्साहन राशि, संगठनों ने लखनऊ में की IDC से मुलाकात

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नोएडा के उद्योगों पर बढ़ती लागत और वेतन वृद्धि का दबाव बढ़ गया है। उद्यमियों ने सरकार से 12 महीने तक 15 प्रतिशत प्रोत्साहन राशि देने की मांग की है, ताकि उत्पादन और रोजगार पर असर न पड़े।

नोएडा के उद्योगों पर बढ़ते खर्च का दबाव अब खुलकर सामने आने लगा है। नोएडा एंटरप्रेन्योर्स एसोसिएशन (NEA) ने उत्तर प्रदेश सरकार से राहत की मांग करते हुए कहा है कि मौजूदा हालात में उद्योगों को संभालना मुश्किल होता जा रहा है। इसी सिलसिले में एसोसिएशन के अध्यक्ष विपिन कुमार मल्हन के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार से मुलाकात की। उन्होंने सरकार से 12 महीने तक प्रोत्साहन राशि देने का अनुरोध किया है, ताकि उद्योगों को राहत मिल सके और उत्पादन व रोजगार पर असर न पड़े। उद्यमियों का कहना है कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो इसका सीधा असर कारोबार और नौकरियों पर दिख सकता है।


बढ़ती लागत से उद्योगों की हालत खराब

एसोसिएशन के अनुसार, हाल ही में श्रमिकों के वेतन में 21 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है, लेकिन जब इसमें पीएफ, ईएसआई और बोनस जोड़े जाते हैं तो कुल खर्च 28 से 30 प्रतिशत तक पहुंच जाता है। इससे उद्योगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ गया है। उद्यमियों का कहना है कि पहले से ही कच्चे माल की कीमतें काफी बढ़ चुकी हैं, ऐसे में इस तरह का खर्च बढ़ना स्थिति को और मुश्किल बना रहा है। कंपनियां तैयार माल के दाम नहीं बढ़ा पा रही हैं, जिससे लागत और कमाई के बीच बड़ा अंतर आ गया है। ऐसे हालात में छोटे और मध्यम उद्योग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं और उनके सामने टिके रहना चुनौती बनता जा रहा है।


सरकार से 15 प्रतिशत प्रोत्साहन की मांग

प्रतिनिधिमंडल ने सरकार से मांग की है कि उद्योगों को कम से कम 12 महीने तक करीब 15 प्रतिशत की प्रोत्साहन राशि दी जाए। उनका कहना है कि इससे बढ़ती लागत के बीच उद्योगों को राहत मिलेगी और उत्पादन प्रभावित नहीं होगा। साथ ही रोजगार भी सुरक्षित रहेगा। उद्यमियों ने यह भी बताया कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के चलते कच्चे माल की कीमतों में 60 से 70 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो चुकी है, जिससे हालात और गंभीर हो गए हैं। ऐसे में अगर सरकार मदद नहीं करती है तो कई उद्योगों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।


श्रमिकों के लिए भी दिया गया सुझाव

एसोसिएशन ने श्रमिकों के हित में भी एक अहम सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि श्रमिकों के वेतन से पीएफ और ईएसआई का अंशदान न काटा जाए, ताकि उन्हें ज्यादा इनहैंड सैलरी मिल सके। हालांकि, उद्यमियों द्वारा दिया जाने वाला योगदान पहले की तरह जारी रखा जाए। इससे श्रमिकों को सीधा फायदा होगा और उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर हो सकेगी। एसोसिएशन का मानना है कि इससे उद्योग और श्रमिक दोनों के बीच संतुलन बनाया जा सकता है और मौजूदा चुनौतीपूर्ण समय में दोनों को सहारा मिलेगा।

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