नोएडा में डिजिटल अरेस्ट का एक और शिकार, रिटायर्ड NTPC अफसर से ठग लिए 85 लाख, मनी लॉन्ड्रिंग का दिखाया डर
- Shiv Kumar
- 28 Apr, 2026
नोएडा में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एनटीपीसी से रिटायर्ड 84 वर्षीय बुजुर्ग को ठगों ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 16 दिनों तक मानसिक दबाव में रखकर करीब 85 लाख रुपये ठग लिए। सेक्टर-51 के केंद्रीय विहार निवासी धीरेंद्र कुमार को अनजान कॉल के जरिए निशाना बनाया गया। कॉल करने वाले ने खुद को बेंगलुरु साइबर सेल का अधिकारी बताया और कहा कि उनके आधार कार्ड का गलत इस्तेमाल कर आपराधिक गतिविधियां की गई हैं। इसके बाद कॉल को दूसरे व्यक्ति से जोड़ दिया गया, जिसने खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर डर का माहौल बना दिया। लगातार वीडियो कॉल के जरिए बुजुर्ग पर दबाव बनाया गया, जिससे वह ठगों की बातों में आ गए।
सीबीआई अधिकारी बनकर दी गिरफ्तारी की धमकी
ठगों ने बेहद सुनियोजित तरीके से बुजुर्ग को अपने जाल में फंसाया। दूसरे कॉलर ने खुद को सीबीआई का एसपी बताया और कहा कि उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग और मानव तस्करी जैसे गंभीर मामलों में केस दर्ज है। उन्होंने यह भी कहा कि यह जांच सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर चल रही है। ठगों ने गिरफ्तारी, संपत्ति जब्त होने और पेंशन बंद होने की धमकी देकर पीड़ित को पूरी तरह डरा दिया। साथ ही यह भी हिदायत दी कि इस मामले की जानकारी किसी को न दें, क्योंकि यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला है। इसी डर और भ्रम में आकर बुजुर्ग ठगों के झांसे में फंसते चले गए।
16 दिन तक वीडियो कॉल पर पूछताछ, खाते खाली कराए
7 अप्रैल से 22 अप्रैल के बीच ठगों ने लगातार व्हाट्सऐप वीडियो कॉल के जरिए पीड़ित से पूछताछ की और उनके बैंक खातों, निवेश और जमा पूंजी की पूरी जानकारी हासिल कर ली। पहले चरण में 30 लाख रुपये केरल के एक खाते में ट्रांसफर कराए गए। इसके बाद ठगों ने उन्हें अपने सभी निवेश भुनाने के लिए कहा। पीड़ित ने अपने शेयर और अन्य निवेश बेचकर करीब 60 लाख रुपये एक खाते में जमा किए। फिर “मनी ट्रेल वेरिफिकेशन” के नाम पर 55 लाख रुपये तमिलनाडु के खाते में ट्रांसफर करा लिए गए। इस तरह कुल मिलाकर करीब 85 लाख रुपये की ठगी को अंजाम दिया गया।
पुलिस ने दर्ज किया केस, जांच जारी
मामले का खुलासा होने के बाद पीड़ित ने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने अज्ञात ठगों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों में लोग डर के कारण जल्दी भरोसा कर लेते हैं, जिसका फायदा साइबर अपराधी उठाते हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल या वीडियो कॉल पर अपनी निजी जानकारी साझा न करें और इस तरह की धमकियों से घबराएं नहीं, बल्कि तुरंत पुलिस से संपर्क करें।
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