नोएडा प्राधिकरण के सीईओ कृष्णा करुणेश का बड़ा फैसला, शहर में बंद पड़े शौचालय 10 दिन में होंगे शुरू

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नोएडा में 100 से ज्यादा बंद सार्वजनिक शौचालय 10 दिन में फिर शुरू होंगे। 150 शौचालय निजी एजेंसी को 10 साल के लिए दिए गए हैं। इस मॉडल से प्राधिकरण को करीब 90 करोड़ रुपये का राजस्व मिलेगा और शहर की स्वच्छता व्यवस्था में सुधार होगा।

शहर की साफ-सफाई और बुनियादी सुविधाओं को लेकर उठते सवालों के बीच अब नोएडा प्राधिकरण ने बड़ा फैसला लिया है। लंबे समय से बंद पड़े 100 से अधिक सार्वजनिक शौचालयों को अगले 10 दिनों में फिर से चालू करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। यह कदम सीधे तौर पर आम लोगों की रोजमर्रा की परेशानी को कम करेगा और शहर की स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाएगा। खासकर बाजार, बस स्टॉप और भीड़भाड़ वाले इलाकों में रहने वाले लोगों को इससे बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।


150 शौचालय निजी एजेंसी को, 10 साल का समझौता
प्राधिकरण ने करीब 150 शौचालयों को निजी एजेंसी को 10 साल के लिए सौंपने का निर्णय लिया है। इस मॉडल के तहत एजेंसी साफ-सफाई, रखरखाव और संचालन की जिम्मेदारी संभालेगी। बदले में उसे शौचालय परिसरों पर विज्ञापन से कमाई करने की अनुमति दी जाएगी। इस व्यवस्था से प्राधिकरण को अगले 10 वर्षों में लगभग 90 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने का अनुमान है। इसे पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप का एक प्रभावी उदाहरण माना जा रहा है।


तेजी से हुआ एक्शन, 7 दिन में शुरू हुई प्रक्रिया
स्थानीय स्तर पर लगातार मिल रही शिकायतों के बाद प्राधिकरण ने तेजी से संज्ञान लिया। सीईओ कृष्णा करुणेश के निर्देश पर महज 7 दिनों के भीतर योजना को लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। इससे यह साफ है कि प्रशासन अब बुनियादी सुविधाओं को लेकर अधिक सक्रिय और जवाबदेह बनने की दिशा में काम कर रहा है।


महिलाओं और यात्रियों को सबसे ज्यादा राहत
शहरवासियों का मानना है कि इस फैसले का सबसे ज्यादा फायदा महिलाओं, बुजुर्गों और यात्रियों को मिलेगा। अक्सर सार्वजनिक शौचालयों की कमी या खराब स्थिति के कारण उन्हें परेशानी उठानी पड़ती थी। अब साफ-सुथरे और चालू शौचालय मिलने से सुविधा के साथ शहर की छवि भी बेहतर होगी।


स्वच्छता मिशन को मिलेगा बल
यह पहल स्वच्छ भारत अभियान को भी मजबूती देने वाली है। विशेषज्ञों का कहना है कि शहरी स्वच्छता केवल सफाई तक सीमित नहीं होती, बल्कि इसके लिए बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरी होता है। ऐसे में सार्वजनिक शौचालयों का सुचारु संचालन बेहद अहम है।

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