गौतमबुद्धनगर के 45 स्कूलों को प्रशासन की नोटिस, शुल्क नियामक समिति के निर्देशों के उल्लंघन पर एक्शन, अगली बैठक में पेशी

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गौतमबुद्ध नगर में 45 स्कूलों को फीस बढ़ोतरी के नियमों का उल्लंघन करने पर नोटिस जारी किया गया है। प्रशासन ने साफ किया है कि तय सीमा से ज्यादा फीस बढ़ाने वाले स्कूलों पर कड़ी कार्रवाई होगी, जिससे अभिभावकों को राहत मिल सकती है।

गौतमबुद्ध नगर में निजी स्कूलों की मनमानी फीस बढ़ोतरी पर प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। जिला शुल्क नियामक समिति के निर्देशों का पालन न करने के आरोप में 45 स्कूलों को नोटिस जारी किए गए हैं। आरोप है कि इन स्कूलों ने तय नियमों के विपरीत फीस में बढ़ोतरी की है। जिला विद्यालय निरीक्षक के मुताबिक सत्र 2026-27 के लिए 7 अप्रैल को जिलाधिकारी की अध्यक्षता में हुई बैठक में साफ निर्देश दिए गए थे कि फीस वृद्धि तय फार्मूले के अनुसार ही की जाएगी। इसके बावजूद कई स्कूलों ने नियमों को नजरअंदाज किया, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई।


फीस बढ़ोतरी के लिए तय था साफ फार्मूला

प्रशासन की ओर से स्कूलों को पहले ही स्पष्ट कर दिया गया था कि फीस बढ़ाने का आधार उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के साथ अतिरिक्त 5 प्रतिशत तक ही सीमित रहेगा। यानी तय सीमा से अधिक बढ़ोतरी करने की अनुमति नहीं थी। लेकिन जांच में सामने आया कि कई स्कूलों ने इस नियम का पालन नहीं किया और मनमाने तरीके से फीस बढ़ा दी। इसके बाद जिला शुल्क नियामक समिति ने सख्ती दिखाते हुए 45 स्कूलों को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है। अधिकारियों का कहना है कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो आगे कड़ी कार्रवाई की जाएगी।


अभिभावकों की शिकायत के बाद बढ़ी सख्ती

इस पूरे मामले में अभिभावकों की शिकायतें अहम वजह बनीं। कई अभिभावकों ने फीस में अचानक बढ़ोतरी को लेकर प्रशासन से शिकायत की थी। उनका कहना था कि स्कूल बिना किसी स्पष्ट कारण के लगातार फीस बढ़ा रहे हैं, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। शिकायतों के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया और जांच कराई, जिसमें नियमों के उल्लंघन की पुष्टि हुई। अब नोटिस जारी होने के बाद अभिभावकों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।


आगे हो सकती है कड़ी कार्रवाई

जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि नियमों का उल्लंघन किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नोटिस पाने वाले स्कूलों को तय समय के भीतर जवाब देना होगा। यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो जुर्माना लगाने से लेकर अन्य सख्त कदम भी उठाए जा सकते हैं। प्रशासन का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और संतुलन बनाए रखना जरूरी है, ताकि अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े।

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