नक्शा पास कराने से पहले जमा करनी होगी 20 फीसदी रकम, बिल्डर को स्पोर्ट्स एक्टिविटी करना होगा डेवलप, नोएडा प्राधिकरण बोर्ड की बैठक में फैसला
- Shiv Kumar
- 30 Apr, 2026
नोएडा के सेक्टर-150 स्थित स्पोर्ट्स सिटी प्रोजेक्ट को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है, जिससे बिल्डर और आवंटियों को बड़ी राहत मिलने वाली है। नोएडा प्राधिकरण बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करते हुए 1 मार्च 2020 से 6 अप्रैल 2026 तक की अवधि को जीरो पीरियड घोषित कर दिया है। इसका मतलब यह है कि इस दौरान हुई देरी को अब परियोजना की समयसीमा में नहीं जोड़ा जाएगा। इस फैसले से लंबे समय से अटके प्रोजेक्ट्स को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है और खरीदारों में भी राहत का माहौल देखा जा रहा है।
जीरो पीरियड से बिल्डर और खरीदार दोनों को फायदा
प्राधिकरण के एसीईओ सतीश पाल के मुताबिक, 1 मार्च 2020 से 6 अप्रैल 2026 तक की अवधि को देरी की गणना में शामिल नहीं किया जाएगा। यानी इस समय के लिए समयवृद्धि शुल्क, लीज रेंट और अन्य देयताओं में राहत दी जाएगी। इससे बिल्डरों को करीब 6 साल से ज्यादा का समय मिल जाएगा, जिसे आने वाले 5 साल की परियोजना समयसीमा में समायोजित किया जाएगा। हालांकि जिन लोगों ने पहले ही समयवृद्धि शुल्क या लीज रेंट जमा कर दिया है, उन्हें कोई रिफंड नहीं मिलेगा और न ही किसी अन्य मद में समायोजन किया जाएगा।
20 प्रतिशत जमा किए बिना नहीं मिलेगा नक्शा पास
प्राधिकरण ने साफ कर दिया है कि बिल्डर को नक्शा पास कराने से पहले कुल बकाया का 20 प्रतिशत हिस्सा जमा करना होगा। यह राशि आवेदन की तारीख से 2 महीने के भीतर जमा करनी होगी। बाकी 80 प्रतिशत रकम ब्याज के साथ तीन साल में किस्तों के रूप में देनी होगी। इसके अलावा 20 प्रतिशत इन्वेंट्री भी प्राधिकरण के पास बंधक रखी जाएगी, जिसे निर्माण पूरा होने और ओसी मिलने के बाद ही मुक्त किया जाएगा। इन शर्तों का पालन किए बिना किसी भी प्रोजेक्ट को मंजूरी नहीं दी जाएगी।
पहले खेल सुविधाएं, फिर रिहायशी प्रोजेक्ट को मंजूरी
इस फैसले में एक और अहम शर्त रखी गई है कि बिल्डर को पहले तीन साल के भीतर खेल सुविधाओं का विकास करना होगा। इसके बाद ही रिहायशी और कॉमर्शियल प्रोजेक्ट्स के नक्शे मंजूरी के लिए स्वीकार किए जाएंगे। प्राधिकरण का कहना है कि स्पोर्ट्स सिटी प्रोजेक्ट का मूल उद्देश्य खेल सुविधाओं को बढ़ावा देना है, इसलिए इस नियम को सख्ती से लागू किया जाएगा। इस फैसले से अब उम्मीद है कि लंबे समय से अटकी परियोजनाएं जल्द पूरी हो सकेंगी।
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