सुप्रीम कोर्ट ने कहा- हड़ताल करने वाले बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों पर कार्रवाई करे, रजिस्ट्रार जनरल को रिपोर्ट भेजें
- Shiv Kumar
- 01 May, 2026
सुप्रीम कोर्ट ने गौतमबुद्धनगर जिला अदालत में वकीलों की लगातार हो रही हड़तालों पर सख्त नाराजगी जताई है। अदालत ने साफ कहा कि न्यायिक कार्य में बाधा किसी भी हालत में स्वीकार नहीं की जा सकती। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीशों की समिति को निर्देश दिया है कि जिला जज से रिपोर्ट लेकर उन बार एसोसिएशन पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, जिन्होंने हड़ताल का समर्थन किया और अदालत का कामकाज प्रभावित किया। कोर्ट ने इस बात पर भी चिंता जताई कि दिसंबर 2024 में स्पष्ट निर्देश दिए जाने के बावजूद जिला बार एसोसिएशन बार-बार हड़ताल के प्रस्ताव पारित कर रही है। सुप्रीम कोर्ट के इस रुख के बाद न्यायिक व्यवस्था में हड़ताल को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है।
बार-बार हड़ताल पर जताई नाराजगी
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने की। यह आदेश वीरेंद्र सिंह की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। सुनवाई में कोर्ट ने कहा कि बार एसोसिएशनों को न्यायिक कार्य बाधित करने का अधिकार नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने याद दिलाया कि दिसंबर 2024 में भी अदालत ने स्पष्ट निर्देश जारी किए थे कि जिला बार एसोसिएशन हड़ताल नहीं करेंगी और अदालतों का काम प्रभावित नहीं होगा। इसके बावजूद गौतमबुद्धनगर जिला अदालत में लगातार हड़तालें होने पर कोर्ट ने गंभीर चिंता व्यक्त की। पीठ ने कहा कि इससे आम लोगों को न्याय मिलने में देरी होती है और अदालतों का कामकाज प्रभावित होता है।
जिला जज से मांगी गई विस्तृत रिपोर्ट
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने निर्देश दिया कि गौतमबुद्धनगर के जिला एवं सत्र न्यायाधीश हड़ताल से जुड़ी पूरी रिपोर्ट इलाहाबाद हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भेजें। रिपोर्ट में यह भी बताया जाएगा कि किन पदाधिकारियों और सदस्यों ने अदालत के कामकाज को प्रभावित किया। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की समिति से कहा है कि रिपोर्ट के आधार पर उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। माना जा रहा है कि इस फैसले के बाद बार एसोसिएशनों की कार्यप्रणाली और हड़ताल को लेकर सख्त नियम लागू किए जा सकते हैं। न्यायपालिका का मानना है कि अदालतों में हड़ताल से सबसे ज्यादा नुकसान उन लोगों को होता है, जो न्याय के लिए अदालतों का दरवाजा खटखटाते हैं।
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