नोएडा में सिंचाई के लिए शुरु किया जाएगा स्प्रिंकलर सिस्टम, एक्सप्रेस वे के दोनों ओर ग्रीन बेल्ट पर बनेंगे 12 भूमिगत टैंक

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नोएडा एक्सप्रेसवे पर पेड़-पौधों की सिंचाई के लिए स्प्रिंकलर सिस्टम लगाया जाएगा। इसके लिए भूमिगत टैंक और पाइप लाइन बनाई जाएंगी। परियोजना पर 3.40 करोड़ रुपये खर्च होंगे और शोधित पानी से छिड़काव कराया जाएगा।

नोएडा एक्सप्रेसवे पर अब पेड़-पौधों की सिंचाई आधुनिक तरीके से की जाएगी। सड़क किनारे और डिवाइडर में लगे पौधों पर पानी का छिड़काव करने के लिए स्प्रिंकलर सिंचाई योजना शुरू की जा रही है। इसके तहत एक्सप्रेसवे की ग्रीन बेल्ट में दोनों तरफ भूमिगत टैंक बनाए जाएंगे और वहीं से पाइप लाइन के जरिए स्प्रिंकलर तक पानी पहुंचाया जाएगा। इस योजना का उद्देश्य सिर्फ पौधों को पानी देना नहीं, बल्कि वायु प्रदूषण को कम करना और सड़क सुरक्षा बढ़ाना भी है। अभी तक टैंकर और ट्रैक्टर के जरिए पानी का छिड़काव कराया जाता था, जिससे कई बार हादसे का खतरा बना रहता था। नई व्यवस्था लागू होने के बाद सिंचाई का काम ज्यादा सुरक्षित और बेहतर तरीके से हो सकेगा।


महामाया फ्लाईओवर से शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट

प्राधिकरण ने इस योजना की शुरुआत पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर करने का फैसला लिया है। इसके लिए महामाया फ्लाईओवर से सेक्टर-128 अंडरपास तक करीब पांच किलोमीटर का हिस्सा चुना गया है। इस परियोजना को लेकर टेंडर प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है और तीन एजेंसियां सामने आई हैं। अब इनके दस्तावेजों की जांच की जाएगी, जिसके बाद वित्तीय बोली खोली जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक, काम शुरू होने के बाद इसे पूरा करने में लगभग तीन से चार महीने लग सकते हैं। प्राधिकरण के उद्यान विभाग के निदेशक आनंद मोहन ने बताया कि एक्सप्रेसवे की ग्रीन बेल्ट में भूमिगत टैंक बनाए जाएंगे और वहीं से पाइप लाइन डिवाइडर तक पहुंचाई जाएगी। इसके जरिए स्प्रिंकलर लगातार पौधों पर पानी का छिड़काव करेंगे। इससे हरियाली को बनाए रखने में काफी मदद मिलेगी।


एसटीपी के शोधित पानी से होगा छिड़काव

इस पूरी परियोजना पर करीब 3 करोड़ 40 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। योजना के तहत महामाया फ्लाईओवर से ग्रेटर नोएडा की तरफ जाते समय छह टैंक और वापस आने वाले हिस्से में भी छह टैंक बनाए जाएंगे। खास बात यह है कि छिड़काव के लिए इस्तेमाल होने वाला पानी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से शोधित होकर आएगा। हाजीपुर स्थित एसटीपी से पानी लाकर इन टैंकों में भरा जाएगा। अगर किसी वजह से एसटीपी का पानी उपलब्ध नहीं हो पाया तो इमरजेंसी के लिए ग्रीन बेल्ट में बोरिंग की व्यवस्था भी की जाएगी। अभी कर्मचारी ट्रैक्टर में लगे टैंकर से पानी का छिड़काव करते हैं, लेकिन तेज रफ्तार वाहनों के बीच यह काम काफी जोखिम भरा होता है। कई बार सही तरीके से पानी नहीं पहुंच पाता, जिससे गर्मियों में पौधे सूख जाते हैं। नई योजना लागू होने के बाद इस समस्या से काफी राहत मिलने की उम्मीद है।

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