नोएडा में साइबर क्राइम की बाढ़: डिजिटल अरेस्ट और निवेश ठगी से बचने के तरीके

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नोएडा में साइबर क्राइम तेजी से बढ़ रहा है। डिजिटल अरेस्ट और निवेश ठगी से लोग लगातार शिकार बन रहे हैं। करोड़ों रुपये फ्रीज किए गए हैं। विशेषज्ञों ने सावधानी बरतने, OTP शेयर न करने और फर्जी कॉल से बचने की सलाह दी है। शिकायत 1930 पर करें।

नोएडा में साइबर ठगी: डिजिटल अरेस्ट और फर्जी निवेश से रहें सावधान
नोएडा और एनसीआर में साइबर ठगी के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। खासकर “डिजिटल अरेस्ट” और फर्जी निवेश स्कीम के नाम पर लोगों से लाखों-करोड़ों रुपये ठगे जा रहे हैं। ठग खुद को कभी पुलिस, कभी सीबीआई या ईडी का अधिकारी बताकर डराते हैं और लोगों को मानसिक दबाव में लेकर पैसे ट्रांसफर करवाते हैं। वहीं दूसरी तरफ फर्जी इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म और क्रिप्टो-शेयर मार्केट के नाम पर भी बड़े स्तर पर धोखाधड़ी हो रही है। आम लोग, खासकर नौकरीपेशा और बुजुर्ग, इनका आसान शिकार बन रहे हैं। लगातार बढ़ते मामलों ने साइबर सेल और पुलिस को भी अलर्ट कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि थोड़ी सी सावधानी और जागरूकता से इन फ्रॉड से बचा जा सकता है।


नोएडा में साइबर अपराध की स्थिति 2025-2026
2025 से 2026 के बीच नोएडा में साइबर अपराधों की संख्या में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। डिजिटल पेमेंट, ऑनलाइन बैंकिंग और सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल ने अपराधियों के लिए नए रास्ते खोल दिए हैं। हर महीने सैकड़ों शिकायतें साइबर सेल तक पहुंच रही हैं। इनमें UPI फ्रॉड, फर्जी कॉल्स, OTP चोरी और निवेश ठगी सबसे ज्यादा शामिल हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, बड़े पैमाने पर लोग छोटी-छोटी लापरवाही के कारण ठगी का शिकार हो रहे हैं। साइबर अपराधी अब बेहद प्रोफेशनल तरीके से काम कर रहे हैं, जिससे उन्हें पकड़ना भी चुनौती बन गया है। प्रशासन लगातार जागरूकता अभियान चला रहा है, लेकिन फिर भी लोग आसानी से झांसे में आ रहे हैं।


118 करोड़ रुपये फ्रीज – बड़े मामलों की सूची
नोएडा साइबर सेल ने पिछले कुछ समय में बड़े स्तर पर कार्रवाई करते हुए करीब 118 करोड़ रुपये की संदिग्ध राशि को फ्रीज किया है। ये रकम अलग-अलग साइबर फ्रॉड मामलों से जुड़ी हुई थी। इनमें सबसे ज्यादा मामले निवेश स्कैम, डिजिटल अरेस्ट और फर्जी बैंक कॉल्स के थे। कई मामलों में पैसे देश के बाहर भी ट्रांसफर किए जा रहे थे, जिन्हें समय रहते रोक लिया गया। बैंक और पुलिस की संयुक्त टीम ने कई खातों को ट्रैक कर यह कार्रवाई की। हालांकि कुछ मामलों में पैसा वापस नहीं मिल पाया, लेकिन बड़ी राशि को ब्लॉक कर लिया गया है। यह कार्रवाई साइबर अपराधियों के नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में अहम मानी जा रही है।


1574 साइबर अपराधी कैसे पकड़े गए?
नोएडा पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त कार्रवाई में अब तक 1574 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। ये अपराधी अलग-अलग राज्यों और नेटवर्क से जुड़े हुए थे। इनमें कुछ लोग कॉल सेंटर स्टाइल फ्रॉड करते थे, जबकि कुछ ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट स्कीम चलाते थे। पुलिस ने तकनीकी निगरानी, मोबाइल ट्रैकिंग और बैंक डिटेल्स के जरिए इन तक पहुंच बनाई। कई अपराधी ऐसे भी थे जो सोशल मीडिया के जरिए लोगों को फंसाते थे। गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में कई बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। पुलिस का कहना है कि यह एक संगठित गिरोह की तरह काम करते हैं, जो अलग-अलग टीमों में बंटकर लोगों को निशाना बनाते हैं।


डिजिटल अरेस्ट क्या होता है?
डिजिटल अरेस्ट एक नया साइबर फ्रॉड तरीका है जिसमें अपराधी फोन या वीडियो कॉल के जरिए खुद को पुलिस या जांच एजेंसी का अधिकारी बताते हैं। वे पीड़ित को बताते हैं कि उसके नाम पर कोई अपराध हुआ है और उसे तुरंत “अरेस्ट” किया जा रहा है। इसके बाद डर और दबाव बनाकर पैसे ट्रांसफर करवाए जाते हैं। कई बार वीडियो कॉल में नकली पुलिस स्टेशन जैसा सेटअप भी दिखाया जाता है। लोग डर के कारण बिना जांच किए पैसे भेज देते हैं। असल में कोई गिरफ्तारी नहीं होती, यह सिर्फ मानसिक दबाव बनाकर की जाने वाली ठगी होती है।


ठगी का तरीका – CBI/ED का फर्जी डर
साइबर ठग अक्सर CBI, ED, पुलिस या कस्टम अधिकारी बनकर कॉल करते हैं। वे कहते हैं कि आपके नाम पर मनी लॉन्ड्रिंग या अवैध पार्सल का केस दर्ज है। इसके बाद गिरफ्तारी का डर दिखाकर पैसे मांगे जाते हैं। कई मामलों में फर्जी दस्तावेज और नोटिस भी भेजे जाते हैं ताकि भरोसा बढ़े। ठग इतने प्रोफेशनल होते हैं कि उनकी आवाज और बातचीत असली अधिकारियों जैसी लगती है। लोग डरकर तुरंत सहयोग कर देते हैं और अपनी गाढ़ी कमाई गंवा बैठते हैं। असली एजेंसियां कभी भी फोन पर पैसे नहीं मांगतीं, यही सबसे बड़ा बचाव है।


नोएडा के असली मामले
नोएडा में कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहां लोगों से लाखों रुपये ठगे गए हैं। कुछ मामलों में रिटायर्ड लोग निशाना बने, तो कुछ में युवा नौकरीपेशा लोग। एक मामले में एक व्यक्ति से डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 8 लाख रुपये ठग लिए गए। वहीं एक महिला से फर्जी निवेश ऐप के जरिए 5 लाख रुपये हड़प लिए गए। शिकायत के बाद पुलिस ने कुछ खातों को ट्रैक किया, लेकिन कई बार पैसा पहले ही दूसरे खातों में ट्रांसफर हो चुका था। ये मामले लगातार बढ़ रहे हैं।


निवेश ठगी के नए-नए तरीके
आजकल साइबर अपराधी नए-नए तरीके अपनाकर निवेश के नाम पर ठगी कर रहे हैं। वे सोशल मीडिया पर फर्जी ऐप और वेबसाइट के जरिए बड़े मुनाफे का लालच देते हैं। शुरुआत में छोटे रिटर्न देकर भरोसा बनाया जाता है, फिर बड़ी रकम निवेश करवाकर अकाउंट ब्लॉक कर दिया जाता है। कई लोग जल्दी अमीर बनने के चक्कर में फंस जाते हैं। यह स्कैम खासकर शेयर मार्केट और क्रिप्टो के नाम पर ज्यादा चल रहा है।


शेयर मार्केट और क्रिप्टो के नाम पर धोखा
क्रिप्टो और शेयर मार्केट के नाम पर ठगी के मामले तेजी से बढ़े हैं। ठग फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म बनाकर लोगों को निवेश के लिए प्रेरित करते हैं। शुरुआत में प्रॉफिट दिखाया जाता है, जिससे भरोसा बनता है। बाद में बड़ी रकम निवेश करवाकर पैसा निकालना बंद कर दिया जाता है। कई लोग अपनी पूरी सेविंग्स खो देते हैं।

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