दिल्ली में महिला-बाल सुरक्षा के लिए LG का बड़ा एक्शन, बसों में कमांडो तैनाती की तैयारी
- Babli Ansari
- 17 Jun, 2026
नई दिल्ली। राजधानी में महिला और बाल सुरक्षा को लेकर उपराज्यपाल ने बड़ा सख्त रुख अपनाया है। दिल्ली पुलिस, परिवहन विभाग और संबंधित एजेंसियों की समीक्षा बैठक के बाद बसों, सार्वजनिक जगहों और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा ढांचा और मजबूत करने के संकेत दिए गए हैं। चर्चा का सबसे अहम बिंदु DTC और क्लस्टर बसों में तैनाती वाली व्यवस्था रही, जहां अब सामान्य व्यवस्था के बजाय सशस्त्र पुलिसकर्मियों और कमांडो की भूमिका बढ़ाई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, महिला यात्रियों को सीधे फायदा पहुंचाने वाली इस योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
बसों में सुरक्षा का नया मॉडल
जानकारी के मुताबिक, बैठक में साफ कहा गया कि महिला यात्रियों के खिलाफ होने वाली छेड़छाड़, बदसलूकी और अचानक होने वाली आपराधिक घटनाओं पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के लिए बसों में तैनात सुरक्षा तंत्र को बदला जाएगा। दिल्ली पुलिस के प्रशिक्षित जवान और कमांडो बसों में मौजूद रहेंगे, ताकि सफर के दौरान सुरक्षा का भरोसा बढ़े और शिकायत पर तुरंत कार्रवाई हो सके। इसी के साथ बस मार्शलों की भूमिका को भी नए सिरे से परिभाषित करने की बात सामने आई है, ताकि वे केवल निगरानी तक सीमित न रहें बल्कि जरूरत पड़ने पर पुलिस और नियंत्रण कक्ष से सीधे जुड़ सकें। प्रशासन का मानना है कि भीड़भाड़ वाले रूटों पर यह व्यवस्था ज्यादा असरदार साबित हो सकती है।
नए पुलिस स्टेशनों और फास्ट रिस्पॉन्स पर फोकस
सुरक्षा बढ़ाने की यह कवायद सिर्फ बसों तक सीमित नहीं है। समीक्षा में उन इलाकों का भी जिक्र हुआ जहां आबादी तेजी से बढ़ी है, लेकिन पुलिस ढांचा उसी रफ्तार से नहीं बढ़ पाया। इसी वजह से नए पुलिस स्टेशनों की जरूरत पर जोर दिया गया है। अधिकारियों ने माना कि अगर स्थानीय थानों की पहुंच आसान होगी, तो शिकायत दर्ज कराने से लेकर त्वरित कार्रवाई तक का समय घटेगा। इस मॉडल में महिला और बाल अपराधों पर अलग से निगरानी, संवेदनशील जगहों की मैपिंग और गश्त की आवृत्ति बढ़ाने पर भी बात हुई। दिल्ली सरकार और पुलिस के बीच तालमेल को इस पूरी रणनीति की रीढ़ माना जा रहा है।
मैदान में दिखेगा असर, जनता से भी सहयोग की अपील
अधिकारियों का कहना है कि नई व्यवस्था का असली परीक्षण सड़क पर होगा, न कि बैठकों में। बसों में सुरक्षा बलों की मौजूदगी, संवेदनशील इलाकों में नए थाने और तेज रफ्तार रिस्पॉन्स सिस्टम तभी असर दिखाएंगे जब निगरानी लगातार बनी रहे। सूत्र बताते हैं कि योजना को लेकर जल्द ही विस्तृत कार्ययोजना जारी की जा सकती है, जिसमें तैनाती, रूट चयन और शिकायत निवारण की प्रक्रिया तय होगी। आम यात्रियों, खासकर महिलाओं और स्कूली बच्चों के लिए यह कदम राहत की तरह देखा जा रहा है, लेकिन प्रशासन पर अब इसे जमीन पर उतारने का दबाव भी बढ़ गया है। राजधानी में सुरक्षा को लेकर यह संदेश साफ है कि अब ढिलाई नहीं चलेगी।
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