सीएम योगी ने जेवर में SAEL की इंटीग्रेटेड सोलर मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी की रखी आधारशिला, क्लीन एनर्जी सेक्टर को मिलेगी नई रफ्तार

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जेवर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एसएईएल लिमिटेड की 8,200 करोड़ रुपये की इंटीग्रेटेड सोलर मैन्युफैक्चरिंग यूनिट की आधारशिला रखी। परियोजना से 20 हजार से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर मिलेंगे तथा उत्तर प्रदेश सोलर निर्माण क्षेत्र में नई पहचान बनाएगा।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को जेवर स्थित यमुना औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) क्षेत्र के सेक्टर-8 में एसएईएल लिमिटेड की इंटीग्रेटेड सोलर मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी का शिलान्यास और भूमि पूजन किया। करीब 8,200 करोड़ रुपये के शुरुआती निवेश से बनने वाली यह अत्याधुनिक परियोजना प्रदेश को स्वच्छ ऊर्जा और सोलर उपकरण निर्माण के क्षेत्र में नई पहचान दिलाएगी। इस परियोजना के तहत 5 गीगावॉट सोलर सेल और 5 गीगावॉट सोलर मॉड्यूल निर्माण क्षमता विकसित की जाएगी। कार्यक्रम में वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’, विधायक धीरेन्द्र सिंह, यीडा और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड के वरिष्ठ अधिकारी तथा उद्योग जगत के कई प्रतिनिधि मौजूद रहे।


सोलर हब बनेगा जेवर

एसएईएल इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड के सह-संस्थापक एवं निदेशक सुखबीर सिंह ने कहा कि यह परियोजना कंपनी की विकास यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। उन्होंने बताया कि 8,200 करोड़ रुपये के शुरुआती निवेश के साथ स्थापित होने वाली यह यूनिट भारत को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगी। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश आज देश के सबसे तेजी से विकसित हो रहे राज्यों में शामिल है और प्रदेश सरकार की उद्योग समर्थक नीतियों के कारण बड़े निवेश लगातार आकर्षित हो रहे हैं। कंपनी ने राज्य सरकार, यीडा और सभी संबंधित विभागों के सहयोग के लिए आभार भी व्यक्त किया। इस परियोजना से सोलर निर्माण क्षेत्र में आधुनिक तकनीक को बढ़ावा मिलेगा और प्रदेश की औद्योगिक क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।


रोजगार को मिलेगी रफ्तार

एसएईएल इंडस्ट्रीज़ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं कार्यकारी निदेशक लक्षित अवला ने कहा कि जेवर परियोजना उत्तर प्रदेश को देश का प्रमुख सोलर मैन्युफैक्चरिंग केंद्र बनाने की दिशा में अहम भूमिका निभाएगी। उन्होंने बताया कि 200 एकड़ में विकसित होने वाली इस परियोजना में एकीकृत सोलर सेल और सोलर मॉड्यूल निर्माण किया जाएगा। परियोजना पूरी होने के बाद 10 गीगावॉट का सोलर मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम तैयार होगा, जिससे देश में स्वदेशी सोलर उत्पादों की उपलब्धता बढ़ेगी। साथ ही हाई-एफिशिएंसी सोलर सेल और टॉपकॉन मॉड्यूल जैसी आधुनिक तकनीक का उत्पादन भी संभव होगा। इससे भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र को नई मजबूती मिलेगी।


हजारों युवाओं को रोजगार

कंपनी के अनुसार इस परियोजना से लगभग 5,000 प्रत्यक्ष और 15,000 अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे। इसके साथ ही क्षेत्र में सहायक उद्योगों, परिवहन, लॉजिस्टिक्स और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। परियोजना से स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने के साथ उत्तर प्रदेश में बड़े औद्योगिक निवेशों को प्रोत्साहन मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह यूनिट प्रदेश को स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन और सोलर उपकरण निर्माण के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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