नोएडा पीजी अग्निकांड: धुएं ने छीन ली स्नेहा और ऋषभ की जिंदगी, 16 साल पुरानी लापरवाही पर उठे सवाल
- Shiv Kumar
- 17 Jul, 2026
सेक्टर-66 स्थित मामूरा के एक पीजी में हुए दर्दनाक अग्निकांड ने दो परिवारों की खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि बिहार की रहने वाली स्नेहा श्रीवास्तव और मध्य प्रदेश निवासी ऋषभ कुमार की मौत आग की लपटों से नहीं, बल्कि दम घुटने से हुई। दोनों नौकरी के सिलसिले में नोएडा आए थे और उसी पीजी में रह रहे थे, जहां बुधवार को भीषण आग लग गई थी। इस हादसे ने एक बार फिर शहर के पीजी में सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस ने मामले में पीजी संचालक समेत तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मां के बाद परिवार का सहारा बनी स्नेहा, आखिरी कॉल भी नहीं बचा सकी जान
स्नेहा श्रीवास्तव बिहार के एक साधारण परिवार से थीं। मां के निधन के बाद वह अपने पिता का सहारा बनीं और नौकरी करने के लिए नोएडा आई थीं। उनके दोस्त और सहकर्मी आयुष जैन ने बताया कि आग लगने के दौरान उनकी स्नेहा से फोन पर बात हुई थी। उन्होंने स्नेहा को छत की ओर जाने की सलाह दी, लेकिन कुछ देर बाद उसका मोबाइल बंद हो गया। माना जा रहा है कि धुएं की वजह से वह बेहोश हो गईं और बाहर नहीं निकल सकीं। स्नेहा चार बहनों में दूसरे नंबर पर थीं। उनकी बड़ी बहन की शादी हो चुकी है, जबकि दो छोटी बहनें अपने पिता के साथ गांव में रहती हैं।
बिना फायर सुरक्षा के चल रहा था पीजी, 250 से ज्यादा लोग रहते थे
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि करीब 16 वर्ष पुरानी इस पांच मंजिला इमारत का निर्माण सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर किया गया था। भवन में लगभग 66 छोटे-छोटे कमरे बनाए गए थे, जहां 250 से अधिक लोग रहते थे। कई कमरों में खिड़की तक नहीं थी और एक कमरे में तीन से चार लोगों को रखा जाता था। सबसे गंभीर बात यह रही कि भवन में फायर एक्सटिंग्विशर, फायर अलार्म, स्मोक डिटेक्टर, हाइड्रेंट सिस्टम और इमरजेंसी निकास जैसी बुनियादी सुरक्षा सुविधाएं भी मौजूद नहीं थीं। संकरी गली होने के कारण दमकल की गाड़ियों को मौके तक पहुंचने में भी कठिनाई हुई। मुख्य अग्निशमन अधिकारी प्रदीप कुमार चौबे ने बताया कि जिले में चल रहे पीजी निरीक्षण अभियान को अब और तेज किया जाएगा ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
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