हिंडन किनारे बसे चोटपुर में बाढ़ का खतरा गहराया, घरों तक पहुंचा पानी, 60 हजार मकानों पर खतरा, लोगों ने लगाई गुहार
- Shiv Kumar
- 20 Jul, 2026
हिंडन नदी के किनारे बसी चोटपुर कॉलोनी में एक बार फिर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। नदी का पानी कई गलियों और घरों के बाहर तक पहुंच गया है, जिससे लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जगह-जगह जलभराव होने के कारण लोग गंदे पानी के बीच रहने और आने-जाने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल मानसून में यही स्थिति बनती है, लेकिन अब तक इस समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन पर लगाए अनदेखी के आरोप
चोटपुर कॉलोनी निवासी राम चरित राय ने बताया कि गलियों से लेकर मकानों तक पानी भर चुका है। उनका कहना है कि अगर रात में पानी का स्तर और बढ़ गया तो परिवार को सुरक्षित स्थान पर ले जाना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक कोई प्रशासनिक अधिकारी मौके पर हालात देखने नहीं पहुंचा। वहीं निवासी कमलेश का कहना है कि जलभराव के कारण लोग काम पर नहीं जा पा रहे हैं। ऐसे में रोजी-रोटी और परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में न तो कोई राहत शिविर बनाया गया है और न ही किसी प्रकार की सरकारी मदद मिल रही है।
60 हजार से अधिक मकानों पर असर, बिजली और स्वास्थ्य की चिंता
चोटपुर कॉलोनी में करीब 60 हजार से अधिक मकान बताए जाते हैं। हिंडन नदी के किनारे स्थित होने के कारण यहां हर वर्ष मानसून के दौरान जलभराव की समस्या खड़ी हो जाती है। इस बार भी कई गलियां पानी में डूबी हुई हैं। कुछ इलाकों में बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई है, जिससे लोगों की परेशानी और बढ़ गई है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय तक जलभराव रहने से संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। नदी किनारे बने कई घरों के बाहर तक पानी पहुंच चुका है और तेज बहाव के साथ जलीय पौधे भी कॉलोनी की ओर आ रहे हैं। लोगों को आशंका है कि लगातार बारिश होने पर पानी घरों के अंदर भी घुस सकता है।
खतरे के निशान से नीचे हैं नदियां, फिर भी प्रशासन अलर्ट
सिंचाई विभाग के अनुसार फिलहाल यमुना का जलस्तर 194.60 मीटर है, जबकि खतरे का निशान 200.600 मीटर निर्धारित है। वहीं हिंडन नदी का जलस्तर 199.5 मीटर दर्ज किया गया है, जबकि इसका खतरे का निशान 205.08 मीटर है। दोनों नदियां अभी खतरे के स्तर से नीचे हैं, लेकिन प्रशासन ने एहतियाती तैयारियां शुरू कर दी हैं। जिला प्रशासन का कहना है कि यदि जलस्तर बढ़ता है तो 20 हजार से अधिक लोगों पर असर पड़ सकता है। राहत शिविर, नाव, गोताखोर और एनडीआरएफ के साथ समन्वय की तैयारी का दावा किया गया है। हालांकि चोटपुर के लोगों का कहना है कि उनके क्षेत्र में अब तक न कोई राहत शिविर दिखाई दिया है और न ही कोई प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची है। मौसम विभाग द्वारा बारिश की संभावना जताए जाने के बाद स्थानीय लोगों की चिंता और बढ़ गई है।
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