नोएडा के ग्रैंड वेनेजिया प्रोजेक्ट पर ED का बड़ा एक्शन, 700 करोड़ की 389 प्रॉपर्टी अटैच, 384 दुकानें कुर्क
- Shiv Kumar
- 21 Jul, 2026
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के लखनऊ जोनल कार्यालय ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए ग्रेटर नोएडा की चर्चित ग्रैंड वेनेजिया परियोजना से जुड़ी 389 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क (प्रोविजनल अटैच) कर लिया है। ईडी के मुताबिक इन संपत्तियों की खरीद कीमत करीब 240.03 करोड़ रुपये है, जबकि वर्तमान बाजार मूल्य 700 करोड़ रुपये से अधिक आंका गया है। यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत की गई है। जांच एजेंसी का आरोप है कि निवेशकों से जुटाई गई रकम का दुरुपयोग कर संपत्तियां खरीदी गईं और उन्हें अलग-अलग कंपनियों के जरिए छिपाने की कोशिश की गई।
ग्रैंड वेनेजिया मॉल की 384 दुकानें और गोवा की संपत्तियां कुर्क
ईडी के अनुसार यह मामला भसीन इन्फोटेक एंड इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड (BIIPL), ग्रैंड वेनेजिया कमर्शियल टावर्स प्राइवेट लिमिटेड (GVCTPL), सतिंदर सिंह भसीन और अन्य से जुड़ा है। कुर्क की गई संपत्तियों में गोवा की पांच अचल संपत्तियां शामिल हैं, जिनकी कीमत करीब 37 करोड़ रुपये बताई गई है। इसके अलावा ग्रेटर नोएडा स्थित ग्रैंड वेनेजिया मॉल की 384 व्यावसायिक यूनिट और दुकानें भी कुर्क की गई हैं, जिनकी खरीद कीमत करीब 203 करोड़ रुपये बताई गई है।
निवेशकों को रिटर्न और कब्जे का झांसा देने का आरोप
ईडी ने बताया कि जांच की शुरुआत उत्तर प्रदेश और दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज कई एफआईआर के आधार पर हुई थी। आरोप है कि ग्रैंड वेनेजिया कमर्शियल कॉम्प्लेक्स परियोजना में निवेशकों को तय समय पर दुकान का कब्जा और आकर्षक रिटर्न देने का वादा कर करोड़ों रुपये जुटाए गए। बाद में न तो निवेशकों को वादा किया गया रिटर्न मिला और न ही व्यावसायिक यूनिट का कब्जा दिया गया। शिकायतों के आधार पर मामले की
जांच शुरू की गई, जिसमें बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं के संकेत मिले।
जांच में धन के दुरुपयोग और संपत्ति छिपाने का आरोप
ईडी के अनुसार जांच में सामने आया कि निवेशकों से जुटाई गई रकम को भसीन ग्रुप की विभिन्न कंपनियों के माध्यम से डायवर्ट कर गोवा में महंगी संपत्तियां खरीदी गईं। इसके अलावा ग्रैंड वेनेजिया मॉल की 384 कमर्शियल यूनिट कथित तौर पर फर्जी और बैकडेटेड दस्तावेजों के जरिए दूसरी कंपनी के नाम स्थानांतरित कर दी गईं, ताकि उन्हें कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) की कार्रवाई से बाहर रखा जा सके। एजेंसी ने बताया कि अप्रैल 2025 में हुई छापेमारी में कई अहम दस्तावेज, डिजिटल साक्ष्य और 36 लाख रुपये नकद बरामद किए गए थे। मई 2026 में आरोपी सतिंदर सिंह भसीन को गिरफ्तार किया गया था और फिलहाल वह न्यायिक हिरासत में हैं। मामले की जांच जारी है।
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