नोएडा में महर्षि आश्रम ट्रस्ट की 3.36 एकड़ जमीन की बिक्री मामले में जांच तेज, एसआईटी ने अधिकारियों से की पूछताछ
- Shiv Kumar
- 24 Jul, 2026
सेक्टर-110 स्थित महर्षि आश्रम ट्रस्ट की 3.36 एकड़ जमीन की बिक्री से जुड़े कथित भूमि घोटाले की जांच अब निर्णायक चरण में पहुंचती दिख रही है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने गुरुवार को नोएडा प्राधिकरण और जिला प्रशासन के अधिकारियों से विस्तृत पूछताछ की। मामले के सभी पहलुओं की तथ्यात्मक जांच के लिए एसआईटी ने जिलाधिकारी (डीएम) और नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) की संयुक्त टीम बनाकर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। जांच एजेंसियां अब जमीन के स्वामित्व, अधिग्रहण प्रक्रिया और बिक्री से जुड़े दस्तावेजों की गहन पड़ताल कर रही हैं। माना जा रहा है कि संयुक्त रिपोर्ट इस पूरे प्रकरण में आगे की कार्रवाई का आधार बन सकती है।
प्राधिकरण के नाम दर्ज न होने पर एसआईटी ने उठाए सवाल
जांच के दौरान एसआईटी ने जिला प्रशासन से पूछा कि नोएडा प्राधिकरण की अधिसूचित सीमा में आने वाली महर्षि आश्रम ट्रस्ट की जमीन अब तक राजस्व अभिलेखों में प्राधिकरण के नाम क्यों दर्ज नहीं की गई। इस पर अधिकारियों ने बताया कि नामांतरण की प्रक्रिया अभी जारी है। एसआईटी ने इस जवाब पर विस्तृत दस्तावेज भी मांगे हैं। इसके साथ ही नोएडा प्राधिकरण से गेझा, भंगेल और सलारपुर गांवों की अधिग्रहीत भूमि का पूरा रिकॉर्ड, अधिग्रहण प्रक्रिया और संबंधित नियमों की जानकारी भी तलब की गई है। इससे पहले भी इसी मामले में प्राधिकरण के कई अधिकारियों को लखनऊ बुलाकर पूछताछ की जा चुकी है।
ईडी की जांच में सामने आए फर्जीवाड़े के आरोप
इस मामले की समानांतर जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी कर रहा है। ईडी ने 15 मई को कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी का दावा है कि स्पिरिचुअल रीजेनेरेशन मूवमेंट फाउंडेशन ऑफ इंडिया (एसआरएमएफ) ट्रस्ट की जमीन की बिक्री एक सुनियोजित भूमि घोटाले का हिस्सा थी। जांच में आरोप है कि जी. राम चंद्र मोहन ने वर्ष 2010 में खुद को ट्रस्ट का कोषाध्यक्ष बताकर मिलते-जुलते नाम का इस्तेमाल किया और फर्जी पैन कार्ड के जरिए बैंक खाते खुलवाए। वहीं, आकाश मालवीय पर खुद को ट्रस्ट का कार्यकारी सदस्य बताकर फर्जी बिक्री विलेख पर हस्ताक्षर करने का आरोप है। जांच एजेंसियां इन दस्तावेजों की भी जांच कर रही हैं।
संयुक्त रिपोर्ट पर टिकी जांच एजेंसियों की नजर
जांच के अनुसार गेझा तिलपताबाद क्षेत्र की यह जमीन वर्ष 2024-25 में सिंह वाहिनी इंफ्रा प्रोजेक्ट्स को बेची गई थी। अब एसआईटी और ईडी दोनों एजेंसियां अपने-अपने स्तर पर पूरे मामले की जांच कर रही हैं। जिला प्रशासन और नोएडा प्राधिकरण की संयुक्त रिपोर्ट को इस बहुचर्चित भूमि प्रकरण में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि रिपोर्ट मिलने के बाद जांच की दिशा और आगे की कानूनी कार्रवाई को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं।
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