नोएडा में निवेश और फर्जी डिस्ट्रीब्यूटरशिप के नाम पर 36 लाख की ठगी, दो आरोपियों पर FIR दर्ज

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नोएडा में साइबर ठगों ने निवेश और फर्जी डिस्ट्रीब्यूटरशिप का झांसा देकर दो लोगों से करीब 36 लाख रुपये ठग लिए। साइबर थाना पुलिस ने दोनों मामलों में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

नोएडा में साइबर ठगों ने निवेश और फर्जी डिस्ट्रीब्यूटरशिप का झांसा देकर दो लोगों से करीब 36 लाख रुपये की ठगी कर ली। ठगों ने वॉट्सऐप ग्रुप, सोशल मीडिया और ईमेल के माध्यम से संपर्क कर पहले पीड़ितों का विश्वास जीता और फिर अलग-अलग बहानों से लाखों रुपये अपने खातों में ट्रांसफर करा लिए। रकम मिलने के बाद आरोपियों ने संपर्क पूरी तरह बंद कर दिया। दोनों पीड़ितों की शिकायत पर साइबर थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस डिजिटल ट्रांजेक्शन, बैंक खातों और मोबाइल नंबरों के जरिए आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।


वॉट्सऐप ग्रुप के जरिए निवेश का झांसा देकर 19.90 लाख की ठगी

पहले मामले में सेक्टर-12 निवासी मानस रंजन नायक ने बताया कि जुलाई 2025 में उन्हें एमओएफएसएल प्राइवेट इनसाइट हब नाम के एक वॉट्सऐप ग्रुप में जोड़ा गया। ग्रुप में ब्लॉक ट्रेडिंग के जरिए शेयर बाजार में अधिक मुनाफा कमाने का दावा किया गया। इसके बाद ठगों ने एक वेबसाइट पर उनका निवेश खाता खुलवाया और 8 अगस्त से 28 अगस्त 2025 के बीच अलग-अलग किस्तों में 19.90 लाख रुपये जमा करा लिए। निवेश के बदले उनके खाते में शेयर दिखाई दिए, लेकिन जब उन्होंने उन्हें बेचने की कोशिश की तो इसकी अनुमति नहीं मिली। इसके बाद उन्हें ठगी का अहसास हुआ और उन्होंने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर शिकायत दर्ज कराई।


कैंपा कोला की डिस्ट्रीब्यूटरशिप दिलाने के नाम पर 16 लाख की ठगी

दूसरे मामले में ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क निवासी अमित कुमार ने बताया कि पिछले वर्ष नवंबर में उन्हें ईमेल के जरिए कैंपा कोला की डिस्ट्रीब्यूटरशिप दिलाने का प्रस्ताव मिला। आरोपियों ने कारोबार शुरू कराने और अधिकृत डीलरशिप दिलाने का भरोसा देकर अलग-अलग चरणों में करीब 16 लाख रुपये जमा करा लिए। रकम मिलने के बाद आरोपियों ने संपर्क समाप्त कर दिया। न तो डिस्ट्रीब्यूटरशिप दी गई और न ही जमा की गई राशि वापस की गई।


डिजिटल ट्रांजेक्शन की जांच में जुटी पुलिस

दोनों मामलों में साइबर थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, ईमेल आईडी और डिजिटल लेनदेन का विश्लेषण कर आरोपियों की पहचान करने में जुटी है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी निवेश योजना या डिस्ट्रीब्यूटरशिप के नाम पर ऑनलाइन भुगतान करने से पहले संबंधित कंपनी और प्रस्ताव की पूरी तरह जांच-पड़ताल अवश्य करें।

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