नोएडा में बढ़ा डेंगू का खतरा, मानसून में रहें सतर्क, जानिए बचाव के जरूरी उपाय और लक्षण
- Shiv Kumar
- 27 Jul, 2026
मानसून के दौरान नोएडा और ग्रेटर नोएडा में जलभराव की समस्या के साथ डेंगू का खतरा भी बढ़ जाता है। बारिश के बाद घरों, पार्कों, निर्माण स्थलों और खाली प्लॉटों में जमा पानी एडीज मच्छर के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करता है। स्वास्थ्य विभाग हर साल लोगों से सावधानी बरतने और साफ-सफाई बनाए रखने की अपील करता है, क्योंकि डेंगू का कोई निश्चित इलाज नहीं है और समय पर पहचान ही सबसे बड़ा बचाव माना जाता है। पिछले कुछ वर्षों में मानसून के दौरान डेंगू के मामलों में वृद्धि देखने को मिली है, जिसके चलते स्वास्थ्य विभाग नियमित फॉगिंग, लार्वा सर्वे और जागरूकता अभियान भी चलाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि लोग अपने घर और आसपास पानी जमा नहीं होने दें, पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें और मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाएं तो संक्रमण का खतरा काफी कम किया जा सकता है। शुरुआती लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना भी बेहद जरूरी है, ताकि समय पर उपचार शुरू हो सके।
नोएडा में डेंगू के मामले क्यों बढ़ रहे हैं
मानसून के मौसम में लगातार बारिश और कई जगह जलभराव होने से डेंगू फैलाने वाले एडीज मच्छरों की संख्या तेजी से बढ़ जाती है। निर्माणाधीन इमारतों, कूलर, गमलों, टायरों और खुले बर्तनों में जमा साफ पानी इन मच्छरों के लिए सबसे उपयुक्त जगह होती है। तेजी से बढ़ती आबादी और शहरी विस्तार के कारण भी कई क्षेत्रों में मच्छरों पर नियंत्रण चुनौती बन जाता है। स्वास्थ्य विभाग समय-समय पर सर्वे और फॉगिंग कराता है, लेकिन लोगों की भागीदारी के बिना डेंगू पर पूरी तरह नियंत्रण संभव नहीं है। इसलिए हर परिवार को अपने स्तर पर भी सावधानी बरतनी चाहिए।
जलभराव और मच्छरों का प्रकोप
बारिश के बाद यदि किसी जगह पानी कई दिनों तक जमा रहता है तो वहां मच्छरों के लार्वा तेजी से विकसित होने लगते हैं। एडीज मच्छर आमतौर पर दिन के समय काटता है और साफ पानी में पनपता है। यही कारण है कि घरों की छत, बालकनी, कूलर, गमले और पानी की टंकियों की नियमित सफाई जरूरी मानी जाती है। स्थानीय प्रशासन जलनिकासी व्यवस्था सुधारने और फॉगिंग कराने का काम करता है, लेकिन नागरिकों को भी अपने आसपास पानी जमा नहीं होने देना चाहिए। सामूहिक प्रयास से ही डेंगू के खतरे को कम किया जा सकता है।
डेंगू के मुख्य लक्षण क्या हैं
डेंगू होने पर तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, शरीर और जोड़ों में तेज दर्द, कमजोरी, उल्टी और त्वचा पर लाल चकत्ते जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कुछ मरीजों में प्लेटलेट्स की संख्या भी कम होने लगती है। यदि बुखार लगातार बना रहे या मरीज को सांस लेने में दिक्कत, अत्यधिक कमजोरी या खून आने जैसे गंभीर लक्षण दिखाई दें तो तुरंत अस्पताल जाना चाहिए। डॉक्टर की सलाह के बिना कोई भी दवा लेने से बचना चाहिए, क्योंकि कुछ दवाएं स्थिति को और गंभीर बना सकती हैं।
बच्चों और बुजुर्गों में लक्षण
बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों में डेंगू का असर अधिक गंभीर हो सकता है। इन वर्गों में तेज बुखार के साथ कमजोरी, सुस्ती, भूख कम लगना और डिहाइड्रेशन की समस्या जल्दी हो सकती है। यदि बच्चा बार-बार उल्टी कर रहा हो, बहुत ज्यादा सुस्त दिखाई दे या बुजुर्ग को सांस लेने में परेशानी महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर इलाज मिलने से गंभीर जटिलताओं का खतरा काफी कम हो जाता है। इसलिए इन मरीजों की विशेष निगरानी जरूरी है।
डेंगू से बचाव के जरूरी उपाय
डेंगू से बचाव के लिए पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें, मच्छर भगाने वाली क्रीम या रिपेलेंट का इस्तेमाल करें और घर की खिड़कियों पर जाली लगाएं। सप्ताह में कम से कम एक बार कूलर और पानी के बर्तनों को खाली करके साफ करें। छत या बालकनी में पानी जमा न होने दें। यदि आसपास कहीं गंदगी या जलभराव हो तो संबंधित विभाग को इसकी सूचना दें। डेंगू से बचाव में व्यक्तिगत सावधानी और सामुदायिक सहयोग दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
घर और आसपास सफाई कैसे रखें
घर के अंदर और बाहर साफ-सफाई बनाए रखना डेंगू की रोकथाम का सबसे आसान तरीका है। कूलर का पानी नियमित रूप से बदलें, गमलों की प्लेटें खाली करें और बेकार पड़े टायर, डिब्बे या अन्य बर्तनों में पानी जमा न होने दें। पानी की टंकियों को हमेशा ढककर रखें। यदि किसी जगह लंबे समय तक पानी जमा हो रहा है तो उसे तुरंत हटाने का प्रयास करें। नियमित सफाई और जलनिकासी व्यवस्था बेहतर रखने से मच्छरों की संख्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
मच्छरदानी और रिपेलेंट का इस्तेमाल
हालांकि एडीज मच्छर दिन में अधिक सक्रिय रहता है, फिर भी घर में मच्छरदानी का उपयोग और बच्चों के लिए सुरक्षित रिपेलेंट लगाना फायदेमंद होता है। छोटे बच्चों और बुजुर्गों को विशेष रूप से मच्छरों से बचाकर रखना चाहिए। घर में दरवाजे और खिड़कियां बंद रखने या जाली लगाने से भी मच्छरों का प्रवेश कम होता है। यदि आसपास मच्छरों की संख्या अधिक हो तो स्वास्थ्य विभाग की सलाह के अनुसार अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।
QDENGA वैक्सीन क्या है और कैसे काम करती है
QDENGA एक डेंगू वैक्सीन है, जिसे कुछ देशों में डेंगू संक्रमण के जोखिम को कम करने के लिए मंजूरी दी गई है। हालांकि भारत में इसका व्यापक सार्वजनिक टीकाकरण कार्यक्रम अभी लागू नहीं है। किसी भी वैक्सीन को लगवाने से पहले डॉक्टर की सलाह और संबंधित सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन करना जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैक्सीन उपलब्ध होने पर भी मच्छरों से बचाव और साफ-सफाई जैसे उपाय सबसे महत्वपूर्ण बने रहते हैं, क्योंकि केवल वैक्सीन के भरोसे डेंगू की रोकथाम संभव नहीं है।
डेंगू होने पर क्या करें, कब जाएं डॉक्टर के पास
यदि तेज बुखार दो दिन से अधिक रहे, शरीर में तेज दर्द हो या प्लेटलेट्स कम होने की आशंका हो तो तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। बिना डॉक्टर की सलाह के दर्द निवारक दवाएं लेने से बचें। मरीज को पर्याप्त पानी, ओआरएस और आराम देना जरूरी है। यदि खून आना, सांस लेने में दिक्कत, लगातार उल्टी या अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत अस्पताल जाएं। समय पर इलाज मिलने से अधिकांश मरीज पूरी तरह ठीक हो जाते हैं।
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