'नोएडा स्टेडियम खिलाड़ियों का है, कंपनी का नहीं', निजीकरण के खिलाफ खिलाड़ियों का जोरदार प्रदर्शन, कोर्ट जाने की चेतावनी

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नोएडा स्टेडियम के निजीकरण के विरोध में खिलाड़ियों, कोचों और खेल संघों ने बड़ा प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने फीस बढ़ने, खेल गतिविधियों पर असर और 100 से अधिक प्रशिक्षकों के रोजगार पर संकट की आशंका जताते हुए फैसला वापस लेने की मांग की।

नोएडा के सेक्टर-21 स्थित नोएडा स्टेडियम के संचालन को निजी कंपनी को सौंपने की प्रक्रिया के विरोध में मंगलवार शाम खिलाड़ियों, कोच, अभिभावकों और विभिन्न खेल संघों ने बड़ा प्रदर्शन किया। स्टेडियम के गेट नंबर-4 पर सैकड़ों लोग एकत्र हुए और निजीकरण के फैसले का विरोध करते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि स्टेडियम का संचालन किसी निजी एजेंसी को सौंपा गया तो इसका सबसे बड़ा नुकसान खिलाड़ियों और खेल गतिविधियों को होगा।


खिलाड़ियों और कोचों ने लगाए निजीकरण विरोधी नारे

प्रदर्शन में बैडमिंटन, टेबल टेनिस, फुटबॉल, क्रिकेट, आर्चरी और लॉन टेनिस से जुड़े खिलाड़ी, प्रशिक्षक और खेल संघों के प्रतिनिधि शामिल हुए। नन्हे खिलाड़ियों ने हाथों में तख्तियां लेकर "खेलों का व्यवसायीकरण बंद करो", "खेल का निजीकरण बंद करो" और "नोएडा स्टेडियम खिलाड़ियों का है, किसी कंपनी का नहीं" जैसे नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि खेल सुविधाओं का उद्देश्य खिलाड़ियों को बेहतर अवसर देना है, न कि उनका व्यावसायिक उपयोग बढ़ाना।


जनप्रतिनिधियों से हस्तक्षेप की मांग

प्रशिक्षकों और खेल संघों ने स्थानीय सांसद डॉ. महेश शर्मा, विधायक पंकज सिंह और राज्यसभा सांसद सुरेंद्र नागर से मुलाकात कर इस प्रक्रिया की समीक्षा कराने की मांग की है। प्रदर्शनकारियों के अनुसार राज्यसभा सांसद सुरेंद्र नागर ने इस संबंध में नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों को पत्र लिखकर मामले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध भी किया है। उनका कहना है कि खिलाड़ियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।


फीस बढ़ने और कोचों के रोजगार पर जताई चिंता

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पूरे स्टेडियम का संचालन एक निजी एजेंसी को देने से खेल सुविधाओं का व्यावसायीकरण बढ़ेगा। इससे प्रशिक्षण शुल्क में भारी बढ़ोतरी हो सकती है, जिसका सीधा असर आर्थिक रूप से कमजोर और उभरते खिलाड़ियों पर पड़ेगा। साथ ही वर्षों से प्रशिक्षण दे रहे 100 से अधिक कोच और प्रशिक्षकों के रोजगार पर भी संकट खड़ा हो सकता है। खेल संघों का कहना है कि इससे स्थानीय और राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं का आयोजन भी प्रभावित होगा।


अदालत जाने की चेतावनी

खेल संघों के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट कहा है कि यदि नोएडा प्राधिकरण निजीकरण की प्रक्रिया को वापस नहीं लेता, तो वे इस फैसले को अदालत में चुनौती देंगे। उनका कहना है कि स्टेडियम सार्वजनिक खेल सुविधाओं के विकास के लिए बनाया गया है और इसे व्यावसायिक मॉडल पर चलाना खिलाड़ियों के हित में नहीं होगा।

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