SSC परीक्षा में हाईटेक नकल गिरोह का मास्टरमाइंड गिरफ्तार, घर से मिली हाईटेक लैब और 92 मॉडिफाइड स्क्रीन

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एसटीएफ ने SSC ऑनलाइन परीक्षा में हाईटेक नकल कराने वाले गिरोह के मास्टरमाइंड को अलवर से गिरफ्तार किया है। उसके घर से 92 मॉडिफाइड TFT स्क्रीन और बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद हुए हैं। एजेंसी अब पूरे नेटवर्क और अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी है।

कर्मचारी चयन आयोग (SSC) की ऑनलाइन भर्ती परीक्षा में हाईटेक तरीके से नकल कराने वाले गिरोह के फरार मास्टरमाइंड को स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने राजस्थान के अलवर से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पिछले दो महीने से फरार था। जांच में सामने आया है कि वह मॉडिफाइड TFT स्क्रीन तैयार करता था, जिनकी मदद से परीक्षा केंद्र के बाहर बैठा सॉल्वर अभ्यर्थी की जगह प्रश्नपत्र हल करता था। अब एसटीएफ पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।


ग्रेटर नोएडा से हुआ था बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा

इस मामले का खुलासा 22 मई 2026 को ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क स्थित बालाजी डिजिटल जोन परीक्षा केंद्र पर हुआ था। एसटीएफ ने कार्रवाई करते हुए सेंटर संचालक, हैकर समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था। मौके से करीब 50 लाख रुपये नकद, प्रॉक्सी सर्वर और कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी बरामद किए गए थे। बाद में गिरोह के एक अन्य सदस्य को भी गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।


घर में बना रखी थी हाईटेक लैब

पुलिस रिमांड के दौरान गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में अलवर निवासी लोकेश का नाम सामने आया। एसटीएफ ने उसके घर पर छापा मारकर 92 मॉडिफाइड TFT स्क्रीन, 14 रास्पबेरी-पाई डिवाइस, 45 VGA कार्ड, 20 VGA टू HDMI कन्वर्टर, वाई-फाई डोंगल, लैपटॉप, मेमोरी कार्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए। जांच एजेंसियों के अनुसार, इसी लैब से नकल में इस्तेमाल होने वाले उपकरण तैयार कर विभिन्न राज्यों में भेजे जाते थे।


ऐसे चलता था हाईटेक नकल का खेल

एसटीएफ के मुताबिक, बाहर से सामान्य दिखने वाली TFT स्क्रीन के भीतर विशेष हार्डवेयर लगाया जाता था। परीक्षा शुरू होने के बाद स्क्रीन का लाइव डिस्प्ले वाई-फाई डोंगल के जरिए परीक्षा केंद्र के बाहर बैठे सॉल्वर तक पहुंच जाता था। सॉल्वर वहीं से प्रश्नों के उत्तर तैयार करता और उनका आउटपुट सीधे अभ्यर्थी की स्क्रीन पर दिखाई देता था। इससे बिना किसी संदेह के पूरी परीक्षा हल कराई जाती थी।


40 हजार में तैयार होती थी एक स्क्रीन

पूछताछ में आरोपी ने बताया कि एक मॉडिफाइड TFT स्क्रीन तैयार करने में करीब 40 हजार रुपये खर्च होते थे। इसके अलावा वह प्रत्येक स्क्रीन बनाने के लिए पांच हजार रुपये अलग से मेहनताना लेता था। भुगतान अलग-अलग बैंक खातों के माध्यम से कराया जाता था ताकि लेन-देन का पता न चल सके।


कई राज्यों तक फैला हो सकता है नेटवर्क

एसटीएफ अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह ने किन-किन परीक्षा केंद्रों तक मॉडिफाइड स्क्रीन पहुंचाई और इसमें कितने सेंटर संचालक, तकनीकी विशेषज्ञ तथा अन्य लोग शामिल थे। जांच एजेंसियों को आशंका है कि यह नेटवर्क उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों की प्रतियोगी परीक्षाओं में सक्रिय रहा है।

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