नोएडा के 6 बिल्डरों की बढ़ीं मुश्किलें, EOW ने शुरू की जांच, बायर्स के पैसे के इस्तेमाल और प्रोजेक्ट रिकॉर्ड की होगी पड़ताल

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नोएडा प्राधिकरण की शिकायत पर आर्थिक अपराध शाखा ने छह बड़े बिल्डरों की जांच शुरू कर दी है। जांच में फ्लैट खरीदारों से लिए गए करोड़ों रुपये के इस्तेमाल, बकाया भुगतान और परियोजनाओं की स्थिति की पड़ताल की जाएगी। दोष मिलने पर आगे कार्रवाई होगी।

नोएडा में छह बड़े बिल्डरों की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। नोएडा प्राधिकरण की शिकायत के बाद आर्थिक अपराध शाखा ने इन बिल्डरों के खिलाफ जांच शुरू कर दी है। जांच का मुख्य फोकस यह पता लगाना है कि फ्लैट खरीदारों से वसूले गए करोड़ों रुपये वास्तव में परियोजनाओं के निर्माण में लगाए गए या फिर किसी अन्य जगह इस्तेमाल किए गए। प्राधिकरण को आशंका है कि कुछ मामलों में खरीदारों से लिया गया पैसा संबंधित परियोजना के बजाय दूसरी कंपनियों या अन्य परियोजनाओं में लगाया गया हो सकता है। अब आर्थिक अपराध शाखा जमीन आवंटन से लेकर पैसों के लेनदेन तक पूरे मामले की जांच करेगी।


प्राधिकरण देगा सभी रिकॉर्ड, दस्तावेजों के आधार पर आगे बढ़ेगी जांच

नोएडा प्राधिकरण ने जांच एजेंसी को सभी जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसमें जमीन आवंटन से जुड़े कागजात, लीज डीड, भुगतान का विवरण, बकाया राशि और परियोजनाओं की मौजूदा स्थिति से संबंधित रिकॉर्ड शामिल हैं। जांच एजेंसी इन दस्तावेजों के आधार पर यह पता लगाएगी कि बिल्डरों ने प्राधिकरण की शर्तों का पालन किया या नहीं। जांच के दायरे में वही बिल्डर आए हैं, जिन्होंने अमिताभ कांत समिति की सिफारिशों के आधार पर लागू राहत योजना का लाभ नहीं लिया। इन बिल्डरों ने न तो बकाया राशि जमा की और न ही प्राधिकरण की ओर से बुलाई गई बैठकों में शामिल हुए।


खरीदारों के पैसों का होगा पूरा हिसाब, संदिग्ध लेनदेन की भी जांच

आर्थिक अपराध शाखा अब यह पता लगाएगी कि फ्लैट खरीदारों से लिए गए हजारों करोड़ रुपये कहां खर्च किए गए। अगर जांच में किसी तरह का संदिग्ध लेनदेन सामने आता है तो उसकी भी गहन जांच की जाएगी। प्राधिकरण का उद्देश्य यह पता लगाना है कि खरीदारों के हितों को ध्यान में रखते हुए परियोजनाओं पर सही तरीके से काम हुआ या नहीं। वहीं दूसरी ओर जिन बिल्डरों ने राहत योजना को स्वीकार किया है, वहां खरीदारों को राहत मिलने लगी है। प्राधिकरण के अनुसार अब तक करीब 4300 फ्लैटों की रजिस्ट्री हो चुकी है और बिल्डरों की ओर से करीब 800 करोड़ रुपये जमा किए जा चुके हैं।


इन छह बिल्डरों की जांच के दायरे में आने की बात

एसोटेक लिमिटेड की सेक्टर-78 परियोजना पर करीब 88 करोड़ रुपये बकाया बताए गए हैं। जीएसएस प्रोकॉन प्राइवेट लिमिटेड की सेक्टर-143बी परियोजना पर करीब 90.54 करोड़ रुपये बकाया हैं। ग्रेनाइट गेट प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड की दो परियोजनाओं पर करीब 1,589.27 करोड़ रुपये बकाया हैं। शुभकामना बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड पर करीब 1,425 करोड़ रुपये बकाया बताए गए हैं। वहीं आईवीआर प्राइम डेवलपर प्राइवेट लिमिटेड भी जांच के दायरे में है। प्राधिकरण का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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