ईंटों से कुचलकर हत्या के 10 साल पुराने मामले में फैसला, दो दोषियों को उम्रकैद, दोनों पर 50-50 हजार का जुर्माना

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ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर क्षेत्र में करीब दस साल पुराने हत्याकांड में अदालत ने मोहित और अनूप को उम्रकैद की सजा सुनाई है। दोनों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। मामले में अभियोजन ने 11 गवाह और 28 दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए थे।

ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर थाना क्षेत्र में करीब दस साल पहले हुए हत्याकांड में अदालत ने शनिवार को अपना फैसला सुनाया। अपर सत्र न्यायाधीश-प्रथम सुनील कुमार-1 की अदालत ने गांव श्यौराजपुर निवासी मोहित और अनूप को हत्या का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। दोनों दोषियों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना जमा नहीं करने पर दोनों को एक-एक साल की अतिरिक्त साधारण कैद काटनी होगी। यह मामला दिसंबर 2015 में सामने आया था, जब खेतों की ओर टहलने गए एक व्यक्ति ने रास्ते के पास अज्ञात युवक का शव पड़ा देखा था। जांच के बाद मृतक की पहचान रोबिन के रूप में हुई और पुलिस ने मोहित और अनूप को आरोपी बनाया था।


रास्ते के पास मिला था युवक का शव

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, 27 दिसंबर 2015 को वादी ब्रह्म सिंह उर्फ लीलू रोज की तरह सुबह अपने खेतों की ओर टहलने गए थे। इसी दौरान उन्होंने एक आवासीय कॉलोनी के प्लॉटों के बीच मुख्य रास्ते पर सड़क से करीब 100 मीटर दूर एक व्यक्ति का शव पड़ा देखा। शव की हालत ऐसी थी कि मृतक की पहचान करना मुश्किल था। उसका सिर ईंटों से कुचला गया था। ब्रह्म सिंह ने पुलिस को सूचना दी और आशंका जताई कि युवक की हत्या किसी दूसरी जगह करने के बाद शव को यहां लाकर फेंका गया है। सूचना के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।


जांच में सामने आई मोहित और अनूप की भूमिका

एडीजीसी अपराध धर्मेंद्र जयंत के मुताबिक, पुलिस ने मामले की जांच के दौरान कई साक्ष्य जुटाए। जांच के दौरान मृतक की पहचान रोबिन के रूप में हुई। इसके बाद पुलिस को मोहित और अनूप की कथित संलिप्तता के बारे में जानकारी मिली। पर्याप्त साक्ष्य जुटाने के बाद दोनों के खिलाफ अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया गया। मामला करीब एक दशक तक अदालत में चला। इस दौरान अभियोजन पक्ष ने आरोपों को साबित करने के लिए गवाहों के बयान और विभिन्न दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए। अदालत में हुई सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों पर विस्तार से विचार किया गया।


11 गवाह और 28 दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए गए

अभियोजन पक्ष ने दोनों आरोपियों को दोषी साबित करने के लिए मुकदमे के दौरान कुल 11 गवाहों के मौखिक बयान दर्ज कराए। इसके अलावा अदालत में 28 दस्तावेजी साक्ष्य भी पेश किए गए। इनमें घटना से संबंधित तहरीर, पंचायतनामा, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट प्रमुख थीं। अभियोजन ने इन साक्ष्यों के आधार पर अदालत के सामने अपना पक्ष रखा। अदालत ने गवाहों के बयानों और दस्तावेजी साक्ष्यों का विस्तार से परीक्षण किया। सभी उपलब्ध साक्ष्यों का विश्लेषण करने के बाद अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची कि मोहित और अनूप हत्या के मामले में दोषी हैं।


दोनों दोषियों को उम्रकैद, 50-50 हजार रुपये जुर्माना

अदालत ने शनिवार को सुनवाई पूरी करते हुए मोहित और अनूप को हत्या का दोषी ठहराया और दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही दोनों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जुर्माने की रकम जमा नहीं करने पर दोनों दोषियों को एक-एक साल की अतिरिक्त साधारण कैद भुगतनी होगी। करीब दस साल पुराने इस मामले में अदालत के फैसले के बाद अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर दोनों को दोषी ठहराया गया है।

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