जेपी विशटाउन प्रोजेक्ट को लेकर शासन सख्त, OSD की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित, सात बिंदुओं पर देनी होगी रिपोर्ट
- Shiv Kumar
- 15 Sep, 2026
सेक्टर-128 स्थित जेपी विशटाउन की ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं में निर्माण में देरी और स्वीकृत योजना से अलग निर्माण की शिकायतों को शासन ने गंभीरता से लिया है। इन शिकायतों की जांच के लिए नोएडा प्राधिकरण के ओएसडी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति गठित की गई है। समिति को एक महीने के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट शासन को सौंपनी होगी। जेपी विशटाउन में सेक्टर-128 के अलावा सेक्टर-131, 133 और 134 में भी कई ग्रुप हाउसिंग परियोजनाएं शामिल हैं। शासन के औद्योगिक विकास विभाग की ओर से समिति के गठन के आदेश जारी किए गए हैं।
जेपी विशटाउन की परियोजनाओं का निर्माण पहले जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड की ओर से कराया जा रहा था। परियोजनाओं में देरी और दूसरी समस्याओं के चलते मामला राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण यानी एनसीएलटी तक पहुंचा। इसके बाद एनसीएलटी से स्वीकृत समाधान योजना के तहत परियोजना को पूरा कराने की जिम्मेदारी सुरक्षा रियल्टी को दी गई। अब सुरक्षा रियल्टी की ओर से भी निर्माण में लापरवाही बरतने के आरोप लगाए गए हैं। जेपी विशटाउन निवासी आशीष ने 10 अगस्त 2026 को शासन में शिकायत देकर जांच की मांग की थी।
शिकायत में स्वीकृत योजना से अलग निर्माण का आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया कि परियोजनाओं का निर्माण निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा नहीं किया गया। इसके अलावा स्वीकृत विस्तृत परियोजना रिपोर्ट और मानचित्र के अनुसार काम नहीं होने की बात भी कही गई। शिकायतकर्ता ने स्वीकृत योजना से अलग अतिरिक्त निर्माण किए जाने का भी आरोप लगाया है। शासन ने इन बिंदुओं को गंभीरता से लेते हुए विस्तृत जांच कराने का फैसला लिया है। समिति अब यह देखेगी कि परियोजना में जो निर्माण कराया जा रहा है, वह स्वीकृत दस्तावेजों और एनसीएलटी की समाधान योजना के अनुरूप है या नहीं। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
ओएसडी संतोष कुमार की अध्यक्षता में बनी पांच सदस्यीय समिति
शासन ने नोएडा प्राधिकरण के ओएसडी संतोष कुमार को जांच समिति का अध्यक्ष बनाया है। समिति में नोएडा नियोजन विभाग के वरिष्ठ प्रबंधक वैभव गुप्ता, नोएडा के वरिष्ठ एवं वित्त लेखाधिकारी विजय स्वरूप, यमुना प्राधिकरण के वित्त विभाग के वरिष्ठ प्रबंधक सलीम अहमद और नियोजन विभाग के वरिष्ठ प्रबंधक मनीष लाल को सदस्य बनाया गया है। समिति को शिकायत से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट शासन को देनी होगी।
सात बिंदुओं पर जांच, खरीदारों के अधिकार भी होंगे शामिल
समिति सबसे पहले एनसीएलटी से स्वीकृत समाधान योजना की शर्तों के पालन की जांच करेगी। इसके साथ ही स्वीकृत विस्तृत परियोजना रिपोर्ट और मानचित्र के मुताबिक निर्माण हो रहा है या नहीं, यह भी देखा जाएगा। समिति यह भी पता लगाएगी कि स्वीकृत योजना से अलग कोई अतिरिक्त टावर, फ्लोर, यूनिट या निर्मित क्षेत्र तो नहीं बढ़ाया गया है। यदि ऐसा निर्माण मिला तो उसकी अनुमति की भी जांच होगी।
इसके अलावा अतिरिक्त निर्माण का असर खरीदारों के खाली क्षेत्र, हरियाली, सामुदायिक सुविधाओं, पार्किंग, सड़क और अग्नि सुरक्षा जैसी व्यवस्थाओं पर पड़ा है या नहीं, इसकी समीक्षा की जाएगी। स्वीकृत एफएआर या जमीन पर अनुमत निर्माण क्षेत्र में किसी तरह की अनधिकृत बढ़ोतरी की भी जांच होगी। समिति खरीदारों के अधिकारों पर पड़े असर, परियोजना की वास्तविक प्रगति और खरीदारों से प्राप्त धनराशि के इस्तेमाल की भी समीक्षा करेगी।
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