नोएडा श्रमिक प्रदर्शन: सत्यम वर्मा की जमानत पर हाईकोर्ट ने राज्य से मांगी आपत्ति, 23 सितंबर को सुनवाई
- Shiv Kumar
- 16 Sep, 2026
अप्रैल 2026 में नोएडा में हुए श्रमिक प्रदर्शन से जुड़े 11 आपराधिक मामलों में पत्रकार सत्यम वर्मा की जमानत अर्जी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में मंगलवार को सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति कृष्ण पहल की पीठ ने मामले में सह-आरोपी शिव कुमार उर्फ शिवा को पहले मिल चुकी जमानत के आधार पर सत्यम वर्मा को राहत देने का संकेत दिया था, लेकिन राज्य सरकार की ओर से आपत्ति दाखिल करने के लिए समय मांगे जाने के बाद सुनवाई 23 सितंबर तक टाल दी गई। यानी फिलहाल इस मामले में सत्यम वर्मा की जमानत पर अंतिम आदेश नहीं हुआ है। वहीं, उन्हें अन्य आपराधिक मामलों में हिरासत और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत अलग से निरुद्ध किए जाने के कारण इस मामले में जमानत मिलने पर भी तत्काल जेल से बाहर आने की संभावना नहीं है।
केस क्राइम नंबर 164/2026 में मिली राहत का संकेत
सत्यम वर्मा की जमानत अर्जी गौतम बुद्ध नगर के फेज-2 थाने में दर्ज केस क्राइम नंबर 164/2026 से जुड़ी है। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता, आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से संबंधित कानून की धाराओं में मुकदमा दर्ज है। वर्मा की ओर से इसी मामले में सह-आरोपी शिव कुमार उर्फ शिवा को 23 जून को मिली जमानत के आधार पर समानता का तर्क दिया गया। हाईकोर्ट ने शिव कुमार की जमानत के समय यह भी ध्यान दिया था कि उनका नाम प्राथमिकी में नहीं था और मुकदमा भीड़ के खिलाफ दर्ज किया गया था। शिव कुमार 14 अप्रैल से जेल में थे।
सत्यम वर्मा मजदूर बिगुल दस्ते के संपादक
सत्यम वर्मा 'मजदूर बिगुल दस्ते' के संपादक हैं। उन्हें 17 अप्रैल को लखनऊ में गिरफ्तार किया गया था। उनकी गिरफ्तारी नोएडा श्रमिक प्रदर्शन से जुड़े मामलों के सिलसिले में हुई थी। इसके बाद 13 मई को उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत भी कार्रवाई की गई। वर्मा की जमानत पर सुनवाई के दौरान अदालत ने प्राथमिकी, उपलब्ध दस्तावेज और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार किया। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि जमानत से जुड़े आदेश में मामले के गुण-दोष पर अंतिम राय व्यक्त नहीं की गई है।
आकृति चौधरी की एनएसए हिरासत हाईकोर्ट कर चुका है रद्द
इसी श्रमिक प्रदर्शन से जुड़े मामले में छात्र कार्यकर्ता आकृति चौधरी के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत की गई हिरासत को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2 सितंबर को रद्द कर दिया था। अदालत ने हिरासत आदेश पारित करने के तरीके पर सवाल उठाते हुए गौतम बुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर टिप्पणी की थी। अदालत ने आकृति चौधरी को पांच लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश भी दिया था। बाद में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि इस फैसले को चुनौती दी जाएगी।
पुलिस ने प्रदर्शन में हिंसा भड़काने का लगाया आरोप
उत्तर प्रदेश पुलिस का आरोप है कि अप्रैल में हुए श्रमिक प्रदर्शन के दौरान हिंसा, आगजनी और अव्यवस्था फैलाने में सत्यम वर्मा की भूमिका रही। पुलिस के मुताबिक, उन्होंने अलग-अलग इलाकों में लोगों को कथित रूप से उकसाकर सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित करने का प्रयास किया। श्रमिक प्रदर्शन वेतन बढ़ाने और काम की बेहतर परिस्थितियों की मांग को लेकर किया गया था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 13 अप्रैल को कुछ स्थानों पर वाहनों में आग लगाने, जबरन परिसर में प्रवेश करने और पथराव की घटनाएं हुई थीं। इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया और बड़ी संख्या में श्रमिकों के साथ कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया था। इन आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत की न्यायिक प्रक्रिया में होना है।
23 सितंबर को राज्य की आपत्तियों पर होगी सुनवाई
फिलहाल सत्यम वर्मा के मामले में अगली सुनवाई 23 सितंबर को होगी। राज्य सरकार को जमानत के विरोध में अपनी आपत्तियां रखने का अवसर दिया गया है। अदालत की अगली कार्यवाही के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस मामले में जमानत का अंतिम आदेश क्या होता है। हालांकि, अन्य लंबित आपराधिक मामलों और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत निरुद्धि के चलते इस एक मामले में जमानत मिलने से उनकी तत्काल रिहाई नहीं होगी।
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