यूपी के सभी यूनिवर्सिटी-कॉलेजों में प्लास्टिक पर पूरी रोक, अब कुल्हड़ और जूट के थैलों का इस्तेमाल होगा

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लखनऊ। योगी सरकार ने यूपी के सभी राज्य विश्वविद्यालयों और संबद्ध डिग्री कॉलेजों में सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूरी तरह बैन लगा दिया है। अब कैंटीन और हॉस्टल में कुल्हड़, कागज के बर्तन और जूट के थैले मिलेंगे।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के राज्यपाल और कुलाधिपति के विशेष कार्याधिकारी डॉ. पंकज एल जॉनी ने बुधवार को एक बड़ा आदेश जारी कर प्रदेश के सभी राज्य विश्वविद्यालयों और संबद्ध डिग्री कॉलेजों में सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगा दी है। इस नए नियम के तहत अब विश्वविद्यालय और कॉलेज परिसरों की कैंटीन, हॉस्टल, और सभी प्रकार के कार्यक्रमों में प्लास्टिक की बोतलें, प्लास्टिक के कप, प्लेट, चम्मच और पॉलीथीन बैग का उपयोग करना बिल्कुल गैर-कानूनी होगा। इसके बजाय अब इन संस्थानों में पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से कुल्हड़, कागज के बर्तन और जूट के थैलों का व्यापक इस्तेमाल किया जाएगा। यह आदेश उस वक्त आया है जब प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण और प्लास्टिक मुक्त परिसर बनाने की दिशा में उच्च शिक्षा विभाग और राज्यपाल कार्यालय ने एक साथ मिलकर बड़ा कदम उठाया है। नए शैक्षिक सत्र की शुरुआत में सभी छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को प्लास्टिक मुक्त परिसर की शपथ दिलाई जाएगी, जिससे युवाओं में पर्यावरण बचाने की भावना को बढ़ावा मिलेगा।

प्लास्टिक पर बैन और नए बर्तनों का इस्तेमाल

यूपी के उच्च शिक्षण संस्थानों में अब सिंगल यूज प्लास्टिक, पॉलीथीन बैग, प्लास्टिक की बोतलें और प्लास्टिक के कप-प्लेट-चम्मच के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। डॉ. पंकज एल जॉनी के आदेश के अनुसार अब विश्वविद्यालय और कॉलेज परिसरों की कैंटीन और हॉस्टल में प्लास्टिक की जगह पर कुल्हड़, जूट के थैले और कागज के बर्तनों का प्रयोग किया जाएगा। यह नियम सभी राज्य विश्वविद्यालयों और उनकी संबद्ध डिग्री कॉलेजों पर लागू होगा। गोरखपुर के दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय और उससे जुड़े कॉलेजों में भी अब सिंगल-यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है, जो नए नियमों के तहत पहला संस्थान है। ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय लखनऊ भी पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए विश्वविद्यालय परिसर में सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लागू कर दिया है। जनभवन की ओर से इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं, जिसके बाद सभी संस्थानों में इस नियम का पालन करना अनिवार्य होगा।

प्लास्टिक मुक्त परिसर बनाने की समिति और सफाई अभियान

हर उच्च शिक्षण संस्थान में प्लास्टिक मुक्त परिसर बनाने के लिए समिति का गठन किया जाएगा, जो इस नियम के पालन की जांच करेगी। इसके अलावा हर शुक्रवार और शनिवार को विशेष सफाई अभियान चलाया जाएगा, जिसमें गीले और सूखे कचरे के लिए अलग-अलग कूड़ेदान की व्यवस्था की जाएगी। यह सुविधा छात्रों और शिक्षकों को कचरे के सही वर्गीकरण और रिसाइक्लिंग की शिक्षा देगी। प्लास्टिक कचरे की रिसाइक्लिंग की उचित व्यवस्था भी संस्थानों में अनिवार्य होगी। लखनऊ नगर निगम द्वारा संचालित 'वेस्ट टू वंडर' पहल के अंतर्गत अनुपयोगी कचरे को संसाधन में बदलने के लिए कई पार्क विकसित किए गए हैं, जो नागरिकों को स्वच्छता, नवाचार और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हैं। यह पहल उच्च शिक्षा संस्थानों में भी लागू होगी, जिससे कचरे को संसाधन में बदलने की प्रक्रिया को बढ़ावा मिलेगा।

छात्रों और शिक्षकों पर प्रभाव और आगे की राह

नए नियम का सबसे बड़ा प्रभाव छात्रों और शिक्षकों पर होगा, जो अब कैंटीन और हॉस्टल में प्लास्टिक के बर्तनों का उपयोग नहीं कर पाएंगे। इसके बजाय उन्हें कुल्हड़, कागज के बर्तन और जूट के थैले मिलेंगे, जो पर्यावरण के लिए सुरक्षित हैं। गोरखपुर के युवाओं ने इस नए नियम को अपनाते हुए बड़ा कमाल कर दिखाया है, जो युवाओं में पर्यावरण बचाने की भावना को बढ़ावा देता है। नए शैक्षिक सत्र की शुरुआत में सभी छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को प्लास्टिक मुक्त परिसर की शपथ दिलाई जाएगी, जिससे युवाओं में पर्यावरण बचाने की भावना को बढ़ावा मिलेगा। यह नियम प्रदेश के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों पर लागू होगा, जिससे यूपी में प्लास्टिक मुक्त परिसर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है।

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