'लोकसभा की 850 सीटें, परिसीमन और नया संविधान संशोधन... मानसून सत्र से पहले क्यों मचा सियासी घमासान? '

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131th Constitution Amendment Bill: 850 लोकसभा सीटों और परिसीमन को लेकर चिदंबरम का बड़ा दावा, मानसून सत्र में बढ़ेगा सियासी संग्राम

संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले 131वें संविधान संशोधन विधेयक को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने दावा किया है कि केंद्र सरकार इसी विधेयक को दोबारा संसद में लाने की तैयारी कर रही है, जो अप्रैल 2026 के पिछले सत्र में पारित नहीं हो सका था। उनके अनुसार, सरकार इस विधेयक के जरिए केवल महिला आरक्षण लागू करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने और परिसीमन (Delimitation) की प्रक्रिया शुरू करने का रास्ता भी तैयार किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि प्रस्तावित बदलावों के तहत लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 तक की जा सकती है। ऐसे में यह विधेयक केवल संसदीय प्रक्रिया का हिस्सा नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों की राजनीति की दिशा तय करने वाला मुद्दा बनता दिखाई दे रहा है।

दो-तिहाई बहुमत की चुनौती, विपक्षी दलों के समर्थन पर टिकी नजर

संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत आवश्यक होता है। इसी वजह से राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि भाजपा विपक्ष के कुछ दलों का समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पार्टी ने कुछ क्षेत्रीय दलों से भी संवाद शुरू किया है। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पी. चिदंबरम ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि राज्यों के अधिकारों को प्रभावित करने वाले किसी भी प्रस्ताव का विपक्ष मजबूती से विरोध करेगा। उनका कहना है कि परिसीमन की प्रक्रिया यदि नए तरीके से लागू होती है तो कई राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सीटों के संतुलन पर बड़ा असर पड़ सकता है। यही कारण है कि यह विधेयक संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह राजनीतिक बहस का बड़ा विषय बन गया है।

महिला आरक्षण पहले से कानून में, फिर नए संशोधन की जरूरत क्यों?

चर्चा का सबसे बड़ा विषय यह भी है कि 106वें संविधान संशोधन के जरिए महिला आरक्षण का कानून पहले ही पारित किया जा चुका है। ऐसे में विपक्ष सवाल उठा रहा है कि यदि महिला आरक्षण का संवैधानिक प्रावधान पहले से मौजूद है, तो फिर 131वें संविधान संशोधन की आवश्यकता क्यों पड़ रही है। चिदंबरम का आरोप है कि महिला आरक्षण को आधार बनाकर परिसीमन और निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि परिसीमन की प्रक्रिया शुरू होती है, तो कई राज्यों की लोकसभा सीटों की संख्या में बदलाव संभव है, जिससे राष्ट्रीय राजनीति का समीकरण भी बदल सकता है।

मानसून सत्र में होगी बड़ी परीक्षा, पूरे देश की नजर संसद पर

20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र में यह विधेयक सबसे चर्चित विषयों में शामिल हो सकता है। यदि सरकार इसे पेश करती है तो संसद में तीखी बहस और विपक्ष के कड़े विरोध की संभावना जताई जा रही है। वहीं, सरकार समर्थक दल इसे लोकतांत्रिक सुधार और भविष्य की जरूरत बता सकते हैं। दूसरी ओर, विपक्ष इसे राज्यों के अधिकारों और राजनीतिक संतुलन से जुड़ा बड़ा मुद्दा मान रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या सरकार आवश्यक बहुमत जुटा पाएगी या यह विधेयक भी पिछली बार की तरह अधर में लटक जाएगा। मानसून सत्र के दौरान होने वाली बहस आने वाले चुनावी माहौल और देश की संवैधानिक राजनीति पर भी दूरगामी असर डाल सकती है।

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