यश डबास ने मारी बाजी, DUSU President का रिजल्ट OUT!

top-news
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में एबीवीपी ने बड़ी बढ़त लेते हुए तीन अहम पद अपने नाम कर लिए। अध्यक्ष पद पर यश डबास और उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय दीपांशु शौकीन की जीत ने इस बार के नतीजों को और दिलचस्प बना दिया।

नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव 2026 के नतीजों ने कैंपस की सियासत में एक बार फिर एबीवीपी की मजबूत पकड़ दिखा दी है। संगठन ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव के पद पर जीत दर्ज की, जबकि उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने बाजी मार ली। अध्यक्ष पद पर यश डबास ने एनएसयूआई के विजय शंकर मीना को हराया। कई दौर तक कड़ी टक्कर चलती रही, लेकिन अंतिम गिनती में एबीवीपी का पलड़ा भारी पड़ गया। उपाध्यक्ष पद पर दीपांशु शौकीन की जीत ने भी सबको चौंकाया, क्योंकि वे पूर्व में एनएसयूआई से जुड़े रहे हैं और इस बार अलग राह पर चुनाव लड़े थे।


अंतिम दौर में पलटी तस्वीर

जानकारी के मुताबिक, मतगणना के शुरुआती दौर में मुकाबला बेहद करीबी था और कई चरणों तक एनएसयूआई और एबीवीपी के बीच अंतर कुछ ही वोटों का रहा। 17वें राउंड तक अध्यक्ष पद पर यश डबास और विजय शंकर मीना के बीच अंतर कम बना हुआ था, लेकिन 20 राउंड की गिनती पूरी होने तक नतीजा एबीवीपी के पक्ष में चला गया। यश डबास को 24,576 वोट मिले, जबकि विजय शंकर मीना 22,523 वोट हासिल कर दूसरे नंबर पर रहे। दूसरी तरफ उपाध्यक्ष पद पर दीपांशु शौकीन ने 30,615 वोट लेकर साफ बढ़त बनाई और एबीवीपी के इशू मौर्य तथा एनएसयूआई के वीर चत्रथ को पीछे छोड़ दिया।


कैंपस की राजनीति में नया समीकरण

इस बार के चुनाव में एबीवीपी ने न सिर्फ अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की, बल्कि सचिव और संयुक्त सचिव के पद भी अपने नाम किए। सचिव पद पर रिया छावड़ी और संयुक्त सचिव पद पर लक्ष्म्य राज सिंह की जीत ने संगठन की स्थिति और मजबूत कर दी। दूसरी ओर, उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार का जीतना इस चुनाव का सबसे बड़ा राजनीतिक संकेत माना जा रहा है। छात्र राजनीति पर नजर रखने वाले लोग इसे एनएसयूआई के लिए झटका और कैंपस में अलग-अलग धड़ों के उभरते असर के रूप में देख रहे हैं। मतगणना के दौरान सुरक्षा कड़ी रखी गई थी और पूरे दिन दिल्ली विश्वविद्यालय परिसर में हलचल बनी रही।


अब आगे क्या होगा

नतीजों के बाद छात्र संगठनों ने अपने-अपने तरीके से इसे जनादेश बताया है। एबीवीपी खेमे में जश्न का माहौल है, जबकि एनएसयूआई खेमे को अध्यक्ष पद पर करीबी हार के बाद आत्ममंथन करना पड़ेगा। विश्वविद्यालय की राजनीति में यह नतीजा आने वाले महीनों के लिए माहौल तय कर सकता है, क्योंकि डूसू के पद सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं होते, बल्कि कैंपस मुद्दों, छात्र सुविधाओं और प्रशासनिक दबाव की दिशा भी इन्हीं से बनती है। अब सबकी नजर इस पर रहेगी कि नई टीम किस तरह छात्र मुद्दों को उठाती है और क्या उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय जीत आने वाले समय में नई किस्म की छात्र राजनीति को जन्म देती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *