भारतीय टीम को बड़ा झटका लगा है। ऑलराउंडर श्रेयंका पाटिल टखने की चोट के कारण महिला टी20 विश्व कप से बाहर हो गई हैं और ICC ने प्रेमा रावत के नाम पर मुहर लगा दी है।

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भारतीय टीम को बड़ा झटका लगा है। ऑलराउंडर श्रेयंका पाटिल टखने की चोट के कारण महिला टी20 विश्व कप से बाहर हो गई हैं और ICC ने प्रेमा रावत के नाम पर मुहर लगा दी है।

नई दिल्ली। भारतीय महिला टीम को महिला टी20 विश्व कप 2026 से ठीक पहले बड़ा झटका लगा है। ऑलराउंडर श्रेयंका पाटिल टखने की चोट के कारण लगभग बाहर हो गई हैं और उनकी जगह उत्तराखंड की ऑफ स्पिनर प्रेमा रावत को शामिल किए जाने की मंजूरी मिल गई है। आईसीसी की तकनीकी समिति ने विकल्प को हरी झंडी दे दी है। यह बदलाव टीम के संतुलन के लिहाज से अहम माना जा रहा है, क्योंकि श्रेयंका गेंद और बल्ले दोनों से उपयोगी खिलाड़ी हैं। अब भारतीय खेमे को टूर्नामेंट के बीच अपने स्पिन विभाग की नई सूरत के साथ आगे बढ़ना होगा।

टखने की चोट ने बदला टीम कॉम्बिनेशन

जानकारी के मुताबिक श्रेयंका को यह चोट नीदरलैंड्स के खिलाफ मुकाबले के दौरान लगी थी, जब वह फील्डिंग कर रही थीं। शुरुआती रिपोर्टों में ही उनके आगे खेलने पर सवाल खड़े हो गए थे और अब तस्वीर लगभग साफ हो गई है कि वह टूर्नामेंट के बाकी हिस्से में नहीं दिखेंगी। कई रिपोर्टों में यह भी सामने आया कि चोट लिगामेंट से जुड़ी है, जिसकी वजह से मेडिकल टीम ने जोखिम लेने की सलाह नहीं दी। भारत के लिए यह नुकसान सिर्फ एक खिलाड़ी का नहीं है, बल्कि उस ऑलराउंड विकल्प का है जो मिडिल ओवरों में विकेट भी निकालती थीं और जरूरत पड़ने पर नीचे क्रम में रन भी दे सकती थीं।

बीसीसीआई और टीम मैनेजमेंट ने हालात को देखते हुए त्वरित कदम उठाया है। सूत्रों के अनुसार चयन समिति ने विकल्पों पर विचार के बाद प्रेमा रावत के नाम को आगे बढ़ाया, जिसे अब आईसीसी की मंजूरी भी मिल चुकी है। प्रेमा घरेलू क्रिकेट में अपनी सटीक ऑफ स्पिन और अनुशासित गेंदबाजी के लिए पहचानी जाती हैं। टीम के लिए यह बदलाव तकनीकी तौर पर जरूरी था, क्योंकि नियमों के तहत किसी चोटिल खिलाड़ी की जगह केवल अनुमोदित रिप्लेसमेंट ही लिया जा सकता है। यही वजह है कि मामला कागजी औपचारिकता से ज्यादा, मैदान पर संतुलन बहाल करने का बन गया है।

प्रेमा रावत पर अब बड़ी जिम्मेदारी

प्रेमा रावत के लिए यह मौका किसी सपने से कम नहीं है। महिला विश्व कप जैसे बड़े मंच पर बिना शोर-शराबे के सीधे टीम में आना आसान नहीं होता, लेकिन भारतीय प्रबंधन ने उन्हें भरोसेमंद विकल्प माना है। घरेलू सर्किट में उन्हें एक कसी हुई स्पिनर के रूप में देखा गया है, जो पिच से मदद मिलने पर रनों पर लगाम भी कस सकती हैं। ऐसे टूर्नामेंट में किसी खिलाड़ी की एंट्री सिर्फ नाम भर नहीं होती, बल्कि उसके साथ टीम की भूमिका, ओवरों का बंटवारा और मैदान पर रणनीति भी बदलती है। भारत की निगाह अब इस पर होगी कि प्रेमा दबाव वाले माहौल में खुद को कैसे ढालती हैं।

दूसरी तरफ, श्रेयंका की गैरमौजूदगी टीम के लिए चिंता का विषय बनी रहेगी। वह हाल के महीनों में भारत की सीमित ओवरों की योजनाओं का हिस्सा रही हैं और चयनकर्ताओं ने उन्हें भविष्य के बड़े खिलाड़ी के तौर पर लगातार तराशा है। टूर्नामेंट के बीच इस तरह की चोट टीम की लय तोड़ सकती है, खासकर तब जब मुकाबले एक-एक सत्र में दिशा बदल रहे हों। अब पूरा फोकस इस पर है कि भारतीय टीम स्पिन डिपार्टमेंट को कैसे संभालती है और क्या नई शामिल खिलाड़ी तुरंत उसी लय में ढल पाती हैं, जिसकी जरूरत विश्व कप जैसे मंच पर सबसे ज्यादा होती है।

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