पराली जलाई तो खेत होगा RED! सरकार का नया प्लान

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केंद्र सरकार ने पराली जलाने पर नए और सख्त नियमों का मसौदा जारी किया है। दोषी खेत के राजस्व रिकॉर्ड में 15 महीने तक ‘रेड एंट्री’ रहेगी, जबकि जुर्माने की मौजूदा दरें भी लागू रहेंगी।

केंद्र सरकार ने पराली जलाने पर नए और सख्त नियमों का मसौदा जारी किया है। दोषी खेत के राजस्व रिकॉर्ड में 15 महीने तक ‘रेड एंट्री’ रहेगी, जबकि जुर्माने की मौजूदा दरें भी लागू रहेंगी।


पराली जलाई तो खेत होगा रेड कैटेगरी में

पराली जलाने की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने नए ड्राफ्ट नियम प्रस्तावित किए हैं। इनका दायरा दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान व उत्तर प्रदेश के NCR क्षेत्रों तक होगा। प्रस्ताव के मुताबिक जिस खेत में पराली जलाने की घटना सामने आएगी, उसके भूमि रिकॉर्ड में रेड एंट्री दर्ज की जाएगी और यह स्थिति घटना की तारीख से 15 महीने तक बनी रहेगी। अगर इस दौरान उसी जमीन पर दोबारा पराली जलाने की घटना सामने आती है या लगाया गया पर्यावरण जुर्माना समय पर जमा नहीं किया जाता, तो रेड एंट्री अगले 15 महीने के लिए भी बढ़ सकती है। हालांकि इस रेड कैटेगरी के हर संभावित असर को ड्राफ्ट में पूरी तरह स्पष्ट नहीं किया गया है। सरकार ने इन प्रस्तावित नियमों पर संबंधित लोगों और हितधारकों से 60 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं, यानी फिलहाल यह प्रस्तावित व्यवस्था है, अंतिम नियम नहीं।


जमीन के हिसाब से लगेगा 5 से 30 हजार तक जुर्माना

नए ड्राफ्ट में पराली जलाने पर पर्यावरणीय मुआवजे की राशि जमीन के आकार के हिसाब से तय रखी गई है। दो एकड़ से कम जमीन पर पराली जलाने पर 5 हजार रुपये, दो से पांच एकड़ तक की जमीन पर 10 हजार रुपये और पांच एकड़ से ज्यादा जमीन पर 30 हजार रुपये का जुर्माना प्रस्तावित है। ये दरें 2024 में संशोधित की गई पर्यावरणीय मुआवजा दरों के अनुरूप हैं। अगर किसान को जारी चालान की रकम 30 दिनों के भीतर जमा नहीं की जाती है तो प्रस्ताव के तहत इसे भूमि राजस्व के बकाये की तरह वसूल किया जा सकता है। इसके साथ ही संबंधित जमीन के रिकॉर्ड में रेड एंट्री दर्ज करने का प्रावधान भी है। यानी सरकार ने प्रस्तावित व्यवस्था में सिर्फ आर्थिक जुर्माने के बजाय जमीन के रिकॉर्ड से जुड़ी कार्रवाई को भी शामिल किया है।


जुर्माने के पैसे से पराली का समाधान खोजने का प्लान

सरकार के प्रस्ताव में सिर्फ जुर्माना वसूलने की बात नहीं है, बल्कि उससे मिलने वाली रकम के इस्तेमाल का तरीका भी बताया गया है। पर्यावरण मुआवजे से मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल फसल अवशेष प्रबंधन की मशीनरी और तकनीकों को बढ़ावा देने, फसल विविधीकरण कार्यक्रमों को प्रोत्साहित करने, बायोमास के इस्तेमाल और उसके स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर को विकसित करने में किया जा सकता है। इसके अलावा पराली प्रबंधन को लेकर रिसर्च और डेवलपमेंट तथा किसानों को पर्यावरण के अनुकूल खेती के तरीकों की जानकारी और प्रशिक्षण देने पर भी पैसा खर्च करने का प्रस्ताव है। यानी सरकार की योजना में एक तरफ पराली जलाने पर आर्थिक कार्रवाई है, तो दूसरी तरफ किसानों को पराली के दूसरे इस्तेमाल और प्रबंधन की व्यवस्था उपलब्ध कराने का प्रावधान भी रखा गया है।


अब 60 दिन में मांगे गए सुझाव

यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब हर साल सर्दियों के दौरान दिल्ली-NCR और आसपास के इलाकों में वायु प्रदूषण को लेकर पराली जलाने की घटनाएं चर्चा में रहती हैं। हालांकि प्रदूषण में पराली की हिस्सेदारी मौसम और दूसरे कारकों के अनुसार बदलती रहती है। नए ड्राफ्ट नियमों के तहत सरकार ने जुर्माने और रेड एंट्री की व्यवस्था को एक साथ जोड़ने का प्रस्ताव रखा है, लेकिन इसके अंतिम रूप में आने से पहले 60 दिनों तक सुझाव और आपत्तियां मांगी गई हैं। इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि प्रस्ताव में किए गए सभी प्रावधान इसी रूप में लागू होंगे। आने वाले समय में सरकार की ओर से मिले सुझावों पर विचार करने के बाद अंतिम नियमों की तस्वीर साफ होगी।

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