सरसों, मूंगफली या रिफाइंड ऑयल, खाने के लिए क्या है बेस्ट? AIIMS के डॉक्टर ने बताया, आप भी जान लें अपने फायदे की बात!
- Shiv Kumar
- 23 Jan, 2026
हम सभी की रोज़मर्रा की डाइट में तेल की अहम भूमिका होती है। खाना पकाने से लेकर स्वाद बढ़ाने तक, तेल शरीर को जरूरी ऊर्जा देता है। भारतीय रसोई में आमतौर पर सरसों का तेल और रिफाइंड ऑयल ज्यादा इस्तेमाल होता है, जबकि कुछ घरों में मूंगफली और ऑलिव ऑयल भी चलन में हैं। लेकिन अक्सर लोगों के मन में सवाल रहता है कि इन तेलों में से कौन सा तेल सेहत को कम नुकसान पहुंचाता है और कौन सा ज्यादा हानिकारक हो सकता है। विशेषज्ञों की मानें तो तेल का चुनाव सीधे दिल, कोलेस्ट्रॉल और पाचन से जुड़ा होता है।
सरसों का तेल क्यों माना जाता है सबसे बेहतर
आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा, दोनों ही सरसों के तेल को सेहत के लिए फायदेमंद मानते हैं। इसमें ओमेगा-3 और ओमेगा-6 फैटी एसिड का संतुलन पाया जाता है, जो दिल को स्वस्थ रखने में मदद करता है। सरसों का तेल खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने और नसों में जमे फैट को घटाने में सहायक माना जाता है। इसके अलावा इसमें मौजूद ग्लूकोसाइनोलेट तत्व शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाने और संक्रमण से बचाने में मदद करता है। इसका स्मोक पॉइंट भी ज्यादा होता है, जिससे यह डीप फ्राइंग और हाई टेंपरेचर कुकिंग के लिए सुरक्षित माना जाता है।
मूंगफली का तेल भी है एक अच्छा विकल्प
जिन लोगों को सरसों के तेल की तीखी खुशबू पसंद नहीं आती, उनके लिए मूंगफली का तेल एक अच्छा विकल्प हो सकता है। यह विटामिन E और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है, जो त्वचा और दिल की सेहत के लिए फायदेमंद हैं। मूंगफली के तेल में “गुड फैट” की मात्रा अधिक होती है, जो शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है। यह तेल खाने के स्वाद को ज्यादा नहीं बदलता और तलने के दौरान भी अपेक्षाकृत स्थिर रहता है।
रिफाइंड तेल क्यों हो सकता है नुकसानदायक
विशेषज्ञों के मुताबिक रिफाइंड तेल इन तीनों में सबसे कम सुरक्षित माना जाता है। इसे तैयार करने में अधिक तापमान और केमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे इसके प्राकृतिक पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। रिफाइंड तेल शरीर में सूजन बढ़ा सकता है, जो आगे चलकर जोड़ों के दर्द, मोटापा और दिल की बीमारियों का कारण बन सकता है। बार-बार गर्म करने पर इसमें ट्रांस फैट बनने की आशंका भी बढ़ जाती है, जो सेहत के लिए खतरनाक है।
AIIMS डॉक्टर की सलाह
AIIMS के डॉक्टर डॉ. अमरिंदर सिंह मल्ही के अनुसार, सेहत के लिए सरसों का तेल सबसे कम नुकसानदायक है, बशर्ते वह “कच्ची घानी” यानी कोल्ड प्रेस्ड हो। उन्होंने यह भी सलाह दी कि एक ही तेल लंबे समय तक इस्तेमाल करने के बजाय तेल को बदल-बदल कर प्रयोग करना चाहिए, जैसे एक महीने सरसों और अगले महीने मूंगफली या तिल का तेल। इससे शरीर को सभी जरूरी फैटी एसिड मिलते रहते हैं। साथ ही, रिफाइंड ऑयल का इस्तेमाल जितना हो सके, उतना कम करना चाहिए।
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