जो रोटी आप रोज खाते हैं, क्या वो सेहतमंद है, कैसे करें पहचान? जानिए क्या कहते हैं गैस्ट्रोएंटोरोलॉजिस्ट

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रोज खाई जाने वाली रोटी का चुनाव अब सेहत के लिए अहम माना जा रहा है। डॉक्टरों के अनुसार गेहूं के साथ ज्वार, बाजरा और मल्टीग्रेन आटा शामिल करने से वजन और ब्लड शुगर कंट्रोल रखने में मदद मिल सकती है।

रोजाना खाई जाने वाली रोटी आपकी सेहत पर कितना असर डालती है, इस पर अब विशेषज्ञ भी ध्यान देने की सलाह दे रहे हैं। खासकर डायबिटीज़, मोटापे या पाचन से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए रोटी का चुनाव बेहद अहम माना जा रहा है। हाल ही में डॉ. शुभम वत्स्या, जो फोर्टिस अस्पताल वसंत कुंज में गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट हैं, ने एक पॉडकास्ट में बताया कि केवल गेहूं के आटे की रोटी रोजाना खाना कई लोगों के लिए ब्लड शुगर बढ़ाने का कारण बन सकता है। उनके अनुसार आज के बदलते लाइफस्टाइल में लोगों को अपने भोजन के अनाज में विविधता लाने की जरूरत है ताकि शरीर को संतुलित पोषण मिल सके।


गेहूं की रोटी क्यों बन सकती है परेशानी का कारण

डॉक्टरों का कहना है कि अधिकतर लोग दिन में दो से तीन बार गेहूं की रोटी खाते हैं, जिससे शरीर में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा लगातार बढ़ती रहती है। खासकर जिन लोगों की जीवनशैली बैठकर काम करने वाली है, उनमें यह तेजी से वजन और ब्लड शुगर बढ़ा सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, कई मामलों में देखा गया है कि मरीज दवाइयां लेने के बावजूद केवल डाइट की वजह से शुगर कंट्रोल नहीं कर पाते। इसलिए अब डॉक्टर सलाह दे रहे हैं कि लोग गेहूं के साथ दूसरे अनाज भी शामिल करें। इससे पाचन बेहतर होता है और शरीर को अलग-अलग पोषक तत्व मिलते हैं, जो लंबे समय में स्वास्थ्य को फायदा पहुंचाते हैं।


किस आटे की रोटी किसके लिए ज्यादा फायदेमंद

डायबिटीज़ से जूझ रहे लोगों के लिए ज्वार की रोटी को बेहतर विकल्प माना जाता है क्योंकि यह ब्लड शुगर को धीरे बढ़ाती है। वहीं, शरीर में प्रोटीन की जरूरत पूरी करने के लिए बाजरा उपयोगी माना जाता है। जिन लोगों में आयरन की कमी रहती है, उनके लिए रागी की रोटी फायदेमंद बताई जाती है। पोषण विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कोई एक अनाज पसंद नहीं आता तो मल्टीग्रेन आटे की रोटी सबसे संतुलित विकल्प हो सकती है। इसमें कई अनाजों का मिश्रण होता है, जिससे शरीर को फाइबर, मिनरल्स और जरूरी पोषक तत्व एक साथ मिलते हैं।


रोटी बदलने से वजन और शुगर कंट्रोल में मदद

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, पूरी तरह गेहूं छोड़ना जरूरी नहीं, बल्कि उसकी मात्रा कम करके अन्य अनाजों को शामिल करना बेहतर उपाय है। खासतौर पर वजन कम करने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए रोटी के आटे में बदलाव आसान लेकिन असरदार कदम साबित हो सकता है। सही अनाज का चुनाव पाचन, ऊर्जा स्तर और ब्लड शुगर संतुलन को बेहतर रखने में मदद करता है। डॉक्टरों का कहना है कि छोटी-छोटी डाइट आदतों में बदलाव लंबे समय में बड़ा फर्क ला सकता है।

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