भरी जवानी में बढ़ रहा है नॉन एल्कोहलिक फैटी लिवर तो ये 9 गलत आदतें हो सकती हैं जिम्मेदार, इन्हें इग्नोर करना सेहत के लिए खतरनाक
- Shiv Kumar
- 11 Mar, 2026
अगर आपका शरीर दुबला-पतला है लेकिन पेट पर चर्बी बढ़ रही है, गर्दन मोटी हो रही है और हर समय थकान महसूस होती है तो इसे नजरअंदाज न करें। विशेषज्ञों के अनुसार ये संकेत नॉन एल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज के हो सकते हैं। आमतौर पर लोग मानते हैं कि फैटी लिवर केवल शराब पीने वालों को होता है, लेकिन यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है। जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक, ज्यादा देर तक बैठकर काम करना और खराब जीवनशैली भी इस बीमारी को बढ़ावा दे सकती है। स्वास्थ्य शोधों के मुताबिक यह बीमारी अब तेजी से बढ़ रही है और युवाओं को भी प्रभावित कर रही है। कई बार लोगों को लंबे समय तक इसका पता भी नहीं चलता। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते जीवनशैली में बदलाव किया जाए तो इस बीमारी को शुरुआती चरण में ही नियंत्रित या ठीक किया जा सकता है।
क्या है नॉन एल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज
विशेषज्ञों के अनुसार नॉन एल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज ऐसी स्थिति है जिसमें बिना शराब सेवन के भी लिवर में जरूरत से ज्यादा फैट जमा हो जाता है। यह समस्या अक्सर मेटाबॉलिक गड़बड़ियों से जुड़ी होती है। इसके प्रमुख कारणों में पेट के आसपास ज्यादा चर्बी, इंसुलिन रेजिस्टेंस, टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हाई कोलेस्ट्रॉल शामिल हैं। यदि इस समस्या को समय पर नियंत्रित न किया जाए तो आगे चलकर लिवर में सूजन, फाइब्रोसिस और सिरोसिस जैसी गंभीर स्थिति का खतरा बढ़ सकता है।
शुरुआत में नहीं दिखते स्पष्ट लक्षण
विशेषज्ञ बताते हैं कि नॉन एल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज को कई बार ‘साइलेंट डिजीज’ भी कहा जाता है, क्योंकि शुरुआती चरण में इसके लक्षण स्पष्ट नहीं दिखाई देते। हालांकि समस्या बढ़ने पर शरीर कुछ संकेत देने लगता है। इन संकेतों में लगातार थकान महसूस होना, पेट के आसपास चर्बी बढ़ना और शरीर में कमजोरी शामिल हो सकते हैं। गंभीर स्थिति में शरीर में पानी जमा होना, इंटरनल ब्लीडिंग, मांसपेशियों की कमजोरी और याददाश्त से जुड़ी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं।
युवाओं में तेजी से बढ़ रहा खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि आज की जीवनशैली इस बीमारी के बढ़ने की सबसे बड़ी वजह है। फास्ट फूड, पैकेज्ड खाने की चीजें और मीठे पेय पदार्थों का अधिक सेवन युवाओं में फैटी लिवर का खतरा बढ़ा रहा है। इसके अलावा शारीरिक गतिविधि की कमी, लंबे समय तक बैठकर काम करना और वजन बढ़ना भी इस बीमारी को बढ़ावा देते हैं। इसलिए विशेषज्ञ नियमित व्यायाम, संतुलित भोजन और वजन नियंत्रित रखने की सलाह देते हैं।
जांच और बचाव कैसे संभव
यह बीमारी कई बार रूटीन ब्लड टेस्ट या इमेजिंग जांच के दौरान पता चलती है। डॉक्टर इसकी पुष्टि के लिए अल्ट्रासाउंड, ब्लड टेस्ट और कुछ मामलों में लिवर बायोप्सी जैसी जांच कर सकते हैं। अच्छी बात यह है कि शुरुआती चरण में इसे पूरी तरह रिवर्स किया जा सकता है। इसके लिए वजन कम करना, संतुलित आहार लेना और नियमित व्यायाम करना बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर लिवर को स्वस्थ रखा जाए तो शरीर की कई बीमारियों से बचाव संभव है।
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