देश में बीमारी से जुड़ी आई चौंका देने वाली रिपोर्ट, हर 8 व्यक्ति में एक बीमार, 7 साल में तीन गुना बढ़े दिल के मरीज, 15 से 29 साल के युवा भी पीड़ित
- Shiv Kumar
- 30 Apr, 2026
देश में बीमारियों के पैटर्न को लेकर आई ताजा रिपोर्ट ने स्वास्थ्य व्यवस्था और लोगों की जीवनशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक संक्रामक बीमारियों में कमी जरूर आई है, लेकिन दिल की बीमारी, उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसे गैर-संक्रामक रोग तेजी से बढ़ रहे हैं। सबसे चिंता की बात यह है कि अब 15 से 29 साल के युवा भी दिल की बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। पिछले सात वर्षों में हृदय रोग के मामलों में करीब तीन गुना तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो आने वाले समय के लिए एक बड़ा संकेत माना जा रहा है।
दिल की बीमारी बनी सबसे बड़ी चुनौती
रिपोर्ट के अनुसार प्रति एक लाख आबादी पर दिल से जुड़ी बीमारियों के मामले बढ़कर 3,891 तक पहुंच गए हैं, जबकि कुछ साल पहले यह संख्या काफी कम थी। कुल बीमारियों में इसका हिस्सा 25.6 प्रतिशत है, जो सभी श्रेणियों में सबसे ज्यादा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि बदलती जीवनशैली, खानपान में गड़बड़ी, तनाव और शारीरिक गतिविधियों की कमी इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं। उम्र बढ़ने के साथ इसका खतरा और तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन अब युवाओं में भी इसके मामले सामने आना चिंता का विषय बन गया है।
शहरों और महिलाओं में ज्यादा बीमारी के मामले
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि शहरी इलाकों में बीमारी की दर ग्रामीण क्षेत्रों से ज्यादा है। शहरों में करीब 14.9 प्रतिशत लोग बीमार पाए गए, जबकि गांवों में यह आंकड़ा 12.2 प्रतिशत रहा। वहीं महिलाओं में बीमारी की दर पुरुषों से अधिक दर्ज की गई है। प्रति एक लाख आबादी पर महिलाओं में 17,006 मामले सामने आए, जबकि पुरुषों में यह संख्या 13,504 रही। यह अंतर बताता है कि महिलाओं के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
बच्चों में संक्रमण, बुजुर्गों में ज्यादा खतरा
रिपोर्ट के मुताबिक छोटे बच्चों और किशोरों में संक्रमण और सांस से जुड़ी बीमारियां ज्यादा देखने को मिल रही हैं, जैसे बुखार, खांसी और गले के संक्रमण। वहीं 60 साल से अधिक उम्र के लोगों में बीमारी का खतरा सबसे ज्यादा है, जहां करीब 42 से 45 प्रतिशत लोगों ने खुद को बीमार बताया। 45 से 59 साल के आयु वर्ग में भी 20 से 25 प्रतिशत लोग बीमार पाए गए। हालांकि संक्रमण संबंधी बीमारियों में कुछ कमी दर्ज की गई है, लेकिन गैर-संक्रामक रोगों का बढ़ता खतरा अब बड़ी चुनौती बन चुका है।
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