अगर बार बार होती है सांसें तेज तो हो जाएं सावधान, हो सकती एंग्जाइटी के लक्षण, अभी जान लें बचने के उपाय
- Shiv Kumar
- 16 May, 2026
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में एंग्जाइटी यानी चिंता की समस्या तेजी से बढ़ रही है। कई लोग इसे सामान्य तनाव समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन लगातार बढ़ती चिंता शरीर और मानसिक स्वास्थ्य दोनों को प्रभावित कर सकती है। अचानक सांस तेज चलना, दिल की धड़कन बढ़ जाना, सीने में जकड़न महसूस होना या सिरदर्द होना एंग्जाइटी के आम संकेत हो सकते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, चिंता केवल मन की स्थिति नहीं बल्कि शरीर की प्रतिक्रिया भी है। जब व्यक्ति खुद को किसी खतरे, दबाव या असुरक्षा में महसूस करता है, तब शरीर अलर्ट मोड में चला जाता है। इसी दौरान तनाव से जुड़े हार्मोन जैसे एड्रेनालाईन और कोर्टिसोल तेजी से बढ़ते हैं, जिससे कई शारीरिक बदलाव महसूस होने लगते हैं।
दिल की धड़कन और सांसों में बदलाव सबसे आम संकेत
विशेषज्ञों का कहना है कि एंग्जाइटी का असर सबसे पहले दिल और सांसों पर दिखाई देता है। चिंता बढ़ने पर दिल की धड़कन तेज हो जाती है और कई बार सीने में जकड़न महसूस होने लगती है। कुछ लोगों को ऐसा लगता है जैसे उन्हें हार्ट अटैक आ रहा हो। इसके अलावा सांस लेने में परेशानी, घुटन या बार-बार गहरी सांस लेने की जरूरत महसूस होना भी चिंता के सामान्य लक्षण माने जाते हैं। कई बार व्यक्ति को चक्कर आना, कमजोरी और अचानक थकान महसूस होने लगती है। डॉक्टरों के मुताबिक लंबे समय तक तनाव में रहने से शरीर लगातार सतर्क अवस्था में रहता है, जिससे मानसिक और शारीरिक दोनों तरह की थकावट बढ़ सकती है।
पाचन तंत्र पर भी पड़ता है असर
एंग्जाइटी का असर केवल दिमाग तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव पेट और पाचन तंत्र पर भी पड़ता है। तनाव की स्थिति में शरीर की ऊर्जा मांसपेशियों की तरफ ज्यादा जाने लगती है, जिससे आंतों की कार्यप्रणाली धीमी पड़ सकती है। ऐसे में पेट फूलना, मतली, भूख कम लगना और बार-बार शौचालय जाने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अगर किसी व्यक्ति को लंबे समय तक ऐसे लक्षण महसूस हों तो उसे डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह जरूर लेनी चाहिए। समय पर पहचान और सही देखभाल से एंग्जाइटी को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
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