सरसों तेल और नमक से करें दांतों की सफाई, दांत होंगे मजबूत, अभी जानें ओरल हेल्थ के लिए टिप्स

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सरसों के तेल और नमक का देसी नुस्खा दांतों की सफाई, मुंह की बदबू कम करने और मसूड़ों को मजबूत बनाने में मददगार माना जाता है। जानिए इसका सही इस्तेमाल, फायदे और किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

दांतों की सफाई और मुंह की बदबू दूर करने के लिए लोग आजकल कई तरह के महंगे प्रोडक्ट इस्तेमाल करते हैं, लेकिन पुराने समय से चला आ रहा सरसों के तेल और नमक का घरेलू नुस्खा आज भी काफी असरदार माना जाता है। आयुर्वेद और घरेलू उपचारों में इस उपाय का इस्तेमाल लंबे समय से किया जाता रहा है। माना जाता है कि नमक में मौजूद एंटीबैक्टीरियल गुण और सरसों के तेल की क्लीनिंग प्रॉपर्टीज मुंह में जमा गंदगी और बैक्टीरिया को कम करने में मदद करती हैं। यही वजह है कि गांवों से लेकर शहरों तक कई लोग आज भी इस देसी उपाय को अपनाते हैं। हालांकि विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि इसका इस्तेमाल सीमित मात्रा में और सही तरीके से ही करना चाहिए।


ऐसे करें सरसों तेल और नमक का इस्तेमाल

इस घरेलू उपाय को अपनाने के लिए सबसे पहले एक छोटी कटोरी में आधा चम्मच नमक लें। इसके बाद उसमें कुछ बूंदें सरसों का तेल मिलाकर अच्छी तरह मिक्स कर लें। अब उंगली या ब्रश की मदद से इस मिश्रण को दांतों और मसूड़ों पर हल्के हाथों से लगाएं। करीब एक से दो मिनट तक धीरे-धीरे मसाज करें और फिर गुनगुने पानी से कुल्ला कर लें। माना जाता है कि इससे दांतों की सतह पर जमा गंदगी साफ होने में मदद मिलती है और मुंह फ्रेश महसूस होता है। कई लोग सुबह ब्रश करने से पहले इसका इस्तेमाल करते हैं, लेकिन जरूरत से ज्यादा प्रयोग करने से बचना चाहिए।


मुंह की बदबू और मसूड़ों की समस्या में राहत

विशेषज्ञों के मुताबिक नमक और सरसों का तेल मुंह में मौजूद बैक्टीरिया को कम करने में मदद कर सकते हैं। इससे सांसों की बदबू कम होने की संभावना रहती है। इसके अलावा हल्की मसाज करने से मसूड़ों में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर हो सकता है, जिससे मसूड़े मजबूत बनने में मदद मिलती है। यह उपाय दांतों के पीलापन और प्लाक को कम करने में भी सहायक माना जाता है। हालांकि दांतों की गंभीर समस्या, मसूड़ों से खून आना या तेज दर्द होने पर घरेलू नुस्खों के भरोसे नहीं रहना चाहिए और तुरंत डेंटिस्ट से सलाह लेनी चाहिए।


इन बातों का रखें खास ध्यान

डॉक्टरों का कहना है कि जरूरत से ज्यादा नमक का इस्तेमाल दांतों की ऊपरी परत यानी इनैमल को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए हफ्ते में दो से तीन बार से ज्यादा इसका प्रयोग नहीं करना चाहिए। जिन लोगों के दांत पहले से संवेदनशील हैं, उन्हें सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। साथ ही रोजाना ब्रश करना, फ्लॉसिंग और समय-समय पर डेंटल चेकअप कराना भी जरूरी है। घरेलू उपाय केवल सामान्य देखभाल में मदद कर सकते हैं, लेकिन ये पेशेवर इलाज का विकल्प नहीं हैं।

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