महिलाओं में माइग्रेन क्यों होता है ज्यादा? डॉक्टर ने बताए इसके बड़े कारण और बचने के आसान तरीके

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महिलाओं में माइग्रेन की समस्या हार्मोनल बदलाव के कारण अधिक हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार पीरियड्स, प्रीमेनोपॉज और तनाव इसके प्रमुख कारण हैं। सही खानपान, पर्याप्त नींद, योग और समय पर उपचार अपनाकर माइग्रेन के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

सिर के एक हिस्से, पूरे माथे या आंखों के आसपास होने वाला तेज दर्द अक्सर माइग्रेन का संकेत माना जाता है। यह समस्या पुरुषों और महिलाओं दोनों को प्रभावित करती है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार महिलाओं में माइग्रेन के मामले अधिक देखने को मिलते हैं। आमतौर पर लोग सिरदर्द की वजह तनाव, एसिडिटी या नींद की कमी को मानते हैं, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि महिलाओं में हार्मोनल बदलाव भी माइग्रेन का एक प्रमुख कारण हो सकता है। न्यूरोसर्जन प्रोफेसर दलजीत सिंह के अनुसार जिन महिलाओं के हार्मोन में बार-बार उतार-चढ़ाव होता है, उनमें माइग्रेन की शिकायत ज्यादा देखने को मिलती है। समय रहते सही जानकारी और सावधानी अपनाकर इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।


हार्मोनल बदलाव के दौरान बढ़ जाता है माइग्रेन का खतरा

विशेषज्ञों के मुताबिक महिलाओं में पीरियड्स शुरू होने से कुछ दिन पहले या बाद में शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर कम होने लगता है। इसी दौरान कई महिलाओं को तेज सिरदर्द या माइग्रेन की समस्या होती है, जिसे मेंस्ट्रुअल माइग्रेन कहा जाता है। इसके अलावा ओव्यूलेशन के समय भी कुछ महिलाओं को सिरदर्द की शिकायत हो सकती है। प्रीमेनोपॉज के दौर में, जब पीरियड्स अनियमित होने लगते हैं और हार्मोन लगातार बदलते रहते हैं, तब भी माइग्रेन का खतरा बढ़ जाता है। यही वजह है कि 40 वर्ष की उम्र के बाद कई महिलाओं में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है। हालांकि, मेनोपॉज के बाद हार्मोन स्थिर होने पर कई महिलाओं में माइग्रेन की परेशानी कम हो सकती है।


माइग्रेन से बचने के लिए अपनाएं ये आसान उपाय

डॉक्टरों का कहना है कि माइग्रेन के शुरुआती लक्षण महसूस होते ही उपचार शुरू कर देना चाहिए और दर्द बढ़ने का इंतजार नहीं करना चाहिए। चिकित्सक की सलाह से दवा लेने के साथ-साथ जीवनशैली में सुधार भी जरूरी है। भोजन में मैग्नीशियम से भरपूर चीजों को शामिल करें और तेज धूप, गर्मी या तेज हवा जैसे ट्रिगर से बचें। यदि एसिडिटी, गैस या कब्ज की समस्या रहती है तो ऐसे खाद्य पदार्थों से दूरी बनाएं जो परेशानी बढ़ा सकते हैं। प्रतिदिन 7 से 8 घंटे की पर्याप्त नींद, पर्याप्त पानी का सेवन, नियमित योग और मेडिटेशन तनाव को कम करने में मदद करते हैं, जिससे माइग्रेन के दौरे आने की संभावना भी घट सकती है।

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