सोने का तकिया भी बन सकता है बीमारी की वजह, डॉक्टर ने समय रहते बदलने की दी सलाह
- Shiv Kumar
- 02 Jul, 2026
अच्छी नींद के लिए तकिया लगभग हर व्यक्ति की जरूरत होता है, लेकिन अगर उसकी साफ-सफाई का ध्यान न रखा जाए तो यही तकिया सेहत के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक एक ही तकिया और गंदे पिलो कवर का इस्तेमाल करने से बैक्टीरिया, धूल और एलर्जी पैदा करने वाले कण उसमें जमा हो जाते हैं। ऐसे में रोजाना कई घंटे तक उसी तकिए पर सोने से शरीर पर इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है। खासकर इम्यून सिस्टम कमजोर होने, एलर्जी और सांस से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए केवल अच्छी नींद ही नहीं, बल्कि तकिए की साफ-सफाई और समय-समय पर उसे बदलना भी उतना ही जरूरी माना जाता है।
गंदा तकिया बढ़ा सकता है कई स्वास्थ्य समस्याएं
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, पिलो कवर रोजाना धूल और गंदगी को अपनी ओर खींचता है, जिससे उसमें बैक्टीरिया तेजी से पनपने लगते हैं। जब कोई व्यक्ति लगातार छह से आठ घंटे उसी तकिए पर सोता है, तो सांस के जरिए धूल और सूक्ष्म कण शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। शुरुआत में शरीर की प्रतिरोधक क्षमता इनसे लड़ती है, लेकिन लंबे समय तक लापरवाही बरतने पर इम्यून सिस्टम प्रभावित हो सकता है। इसके कारण एलर्जी, बार-बार सर्दी-जुकाम, खांसी, सांस लेने में परेशानी और त्वचा पर मुंहासों जैसी दिक्कतें बढ़ सकती हैं। इसलिए तकिए की स्वच्छता को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
तकिया कब बदलें और किन बातों का रखें ध्यान
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि एक ही तकिए का वर्षों तक इस्तेमाल करने के बजाय उसे लगभग हर छह महीने में बदल देना चाहिए। यदि संभव हो तो तकिए को नियमित रूप से वैक्यूम करें ताकि धूल कम जमा हो। पिलो कवर को सप्ताह में कम से कम दो बार धोना बेहतर माना जाता है, खासकर जब बेडशीट बदली जा रही हो। इसके अलावा सप्ताह में एक बार तकिए को धूप में रखने से उसमें मौजूद कई प्रकार के बैक्टीरिया और नमी कम हो सकती है। छोटी-छोटी ये आदतें न केवल तकिए को साफ रखती हैं, बल्कि बेहतर नींद और अच्छी सेहत बनाए रखने में भी मददगार साबित हो सकती हैं।
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