क्या शराब सिर्फ लिवर को नुकसान पहुंचाती है? डॉक्टर ने बताया शरीर के किन-किन अंगों पर पड़ता है बुरा असर
- Shiv Kumar
- 08 Jul, 2026
शराब का अधिक सेवन केवल लिवर को ही नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि इसका सीधा असर दिमाग की कार्यक्षमता पर भी पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार शराब पीने से याददाश्त कमजोर हो सकती है, निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होती है और मानसिक स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर पड़ सकता है। ऐसे में शराब के दुष्प्रभावों को समझना और समय रहते सतर्क होना बेहद जरूरी है।
याददाश्त और सीखने की क्षमता पर पड़ता है असर
वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. नेहा पंडिता के अनुसार शराब सबसे पहले मस्तिष्क के हिप्पोकैम्पस हिस्से को प्रभावित करती है, जो याददाश्त और नई चीजें सीखने में अहम भूमिका निभाता है। लगातार शराब पीने से मस्तिष्क की कोशिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है, जिससे हाल की घटनाएं याद रखने में परेशानी होने लगती है। कई मामलों में व्यक्ति जागृत रहने के बावजूद कुछ समय की घटनाएं पूरी तरह भूल जाता है, जिसे ब्लैकआउट की स्थिति भी कहा जाता है।
निर्णय लेने और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता होती है कमजोर
शराब का असर मस्तिष्क के फ्रंटल लोब पर भी पड़ता है, जो निर्णय लेने, योजना बनाने, एकाग्रता और व्यवहार को नियंत्रित करता है। इसके कारण व्यक्ति को बातचीत समझने, नाम याद रखने, समस्याओं का समाधान करने और सही निर्णय लेने में कठिनाई हो सकती है। लंबे समय तक शराब का सेवन करने वालों में यह समस्या धीरे-धीरे बढ़ सकती है और इसका असर नौकरी, पढ़ाई और रोजमर्रा की जिंदगी पर भी दिखाई देने लगता है।
नींद की गुणवत्ता और पोषण पर भी पड़ता है असर
अक्सर लोगों को लगता है कि शराब पीने से अच्छी नींद आती है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह गहरी और गुणवत्ता वाली नींद को बाधित करती है। इससे अगले दिन थकान, ध्यान की कमी और नई जानकारी सीखने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा अधिक शराब पीने से शरीर में विटामिन B1 (थायमिन) की कमी हो सकती है, जिससे गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।
दिमाग को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बार-बार भूलने की समस्या, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई या सोचने-समझने की क्षमता में बदलाव महसूस हो रहा है, तो इसे केवल उम्र या व्यस्त जीवनशैली का असर मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। शराब का सेवन कम करना या छोड़ना, संतुलित आहार लेना, पर्याप्त नींद लेना और नियमित व्यायाम करना दिमाग को स्वस्थ रखने में मददगार हो सकता है। यदि ऐसी समस्याएं लगातार बनी रहें तो न्यूरोलॉजिस्ट से सलाह लेना उचित रहेगा।
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