नंगे पैर जमीन पर चलना क्यों माना जाता है फायदेमंद? तनाव से लेकर ब्लड सर्कुलेशन तक, जानें क्या है असर

top-news
नंगे पैर घास, मिट्टी या रेत पर चलना शरीर और मन को आराम देने वाली आसान गतिविधि हो सकती है। रोज 15 से 30 मिनट प्राकृतिक जमीन पर चलने से तनाव कम महसूस हो सकता है। हालांकि, इससे जुड़े ब्लड सर्कुलेशन और इलेक्ट्रिकल बैलेंस के दावों के प्रमाण सीमित हैं।

नंगे पैर चलना सेहत को बेहतर रखने का एक आसान तरीका माना जाता है। पैदल चलना, टहलना और दौड़ना वैसे भी शरीर के लिए फायदेमंद गतिविधियां हैं, लेकिन प्राकृतिक जमीन पर नंगे पैर चलने को प्रकृति के सीधे संपर्क से भी जोड़ा जाता है। आयुर्वेद में भी नंगे पैर धरती के संपर्क में रहने को स्वास्थ्य से संबंधित माना गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, घास, मिट्टी या रेत जैसी प्राकृतिक सतह पर कुछ समय नंगे पैर चलने से शरीर और मन को आराम महसूस हो सकता है। रोजाना 15 से 30 मिनट इस तरह चलना तनाव कम करने और रिलैक्स महसूस करने में मदद कर सकता है। हालांकि, नंगे पैर चलने से जुड़े कुछ स्वास्थ्य दावों को लेकर वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं, इसलिए इसे किसी बीमारी के इलाज के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।


नंगे पैर जमीन के संपर्क में आने पर क्या होता है?

कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. आलोक चोपड़ा के अनुसार, नंगे पैर जमीन के सीधे संपर्क में आने से शरीर में मौजूद अतिरिक्त इलेक्ट्रिकल चार्ज धरती में जाने की बात कही जाती है। उनके अनुसार, इससे शरीर के प्राकृतिक इलेक्ट्रिकल बैलेंस को बनाए रखने में मदद मिल सकती है। उन्होंने रिपोलराइजेशन की प्रक्रिया का भी उल्लेख किया, जिसमें किसी कोशिका की इलेक्ट्रिकल स्थिति सामान्य अवस्था में लौटती है। उनके बताए अनुसार, लाल रक्त कोशिकाओं की सामान्य इलेक्ट्रिकल स्थिति रक्त प्रवाह से जुड़ी हो सकती है। हालांकि, इन दावों को समझने के लिए वैज्ञानिक शोध और प्रमाणों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।


तनाव कम करने और मन को आराम देने में मदद

नंगे पैर प्राकृतिक जमीन पर चलना केवल शारीरिक गतिविधि तक सीमित नहीं है। सुबह के समय घास या मिट्टी पर धीरे-धीरे चलने से शांत वातावरण का अनुभव होता है, जिससे मन को आराम मिल सकता है। नियमित रूप से कुछ समय प्रकृति के बीच बिताने से तनाव कम करने और मूड बेहतर महसूस करने में मदद मिल सकती है। यह आदत व्यक्ति को कुछ समय के लिए मोबाइल और रोजमर्रा की भागदौड़ से दूर रखकर वर्तमान पल पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर भी देती है।


ब्लड सर्कुलेशन को लेकर क्या कहा जाता है?

नंगे पैर चलने के समर्थकों का मानना है कि प्राकृतिक जमीन के सीधे संपर्क से शरीर में रक्त प्रवाह बेहतर रखने में मदद मिल सकती है। डॉ. आलोक चोपड़ा ने लाल रक्त कोशिकाओं की इलेक्ट्रिकल स्थिति और उनके आपस में चिपकने की प्रवृत्ति के संदर्भ में ब्लड सर्कुलेशन की बात कही है। हालांकि, नंगे पैर चलने से रक्त संचार में सुधार होने के दावे को लेकर उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाणों को सीमित माना जाता है। इसलिए इसे स्वस्थ जीवनशैली की एक सामान्य गतिविधि के रूप में अपनाना बेहतर है।


नींद और मानसिक संतुलन में भी मिल सकता है फायदा

प्रकृति के संपर्क में समय बिताना और नियमित रूप से पैदल चलना मानसिक रूप से आराम देने वाला अनुभव हो सकता है। नंगे पैर घास, मिट्टी या रेत पर चलने से व्यक्ति को शांति और संतुलन का एहसास हो सकता है। तनाव कम होने और शरीर को रिलैक्स महसूस होने की वजह से नींद की गुणवत्ता बेहतर महसूस हो सकती है। हालांकि, अगर किसी व्यक्ति को लगातार नींद या तनाव से जुड़ी परेशानी है तो केवल नंगे पैर चलने पर निर्भर रहने के बजाय विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।


नंगे पैर चलने का सही तरीका क्या है?

अगर आप नंगे पैर चलने को अपनी दिनचर्या में शामिल करना चाहते हैं तो इसके लिए घास, साफ मिट्टी या रेत जैसी सुरक्षित प्राकृतिक सतह चुनी जा सकती है। शुरुआत कुछ मिनट से करें और सुविधानुसार इसे 15 से 30 मिनट तक किया जा सकता है। सुबह का समय इसके लिए सुविधाजनक हो सकता है, क्योंकि वातावरण अपेक्षाकृत शांत रहता है। जमीन पर कांच, कांटे, पत्थर या अन्य नुकीली चीजें न हों, इसका ध्यान रखना जरूरी है। किसी तरह की चोट या पैर से जुड़ी परेशानी होने पर सावधानी बरतें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *