Influencers सावधान! FSSAI का बड़ा एक्शन, Food Product पर गलत दावा किया तो होगी कार्रवाई
- Babli Ansari
- 14 Aug, 2026
नई दिल्ली। खाद्य उत्पादों के नाम पर किए जा रहे भ्रामक दावों पर अब FSSAI ने सीधे सेलिब्रिटी और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर को निशाने पर लिया है। खाद्य सुरक्षा नियामक ने साफ कहा है कि अगर कोई सार्वजनिक चेहरा किसी उत्पाद का प्रचार करते हुए उसके स्वास्थ्य, पोषण या गुणवत्ता संबंधी दावों को बिना जांचे-परखे आगे बढ़ाता है, तो उसे भी जवाबदेह माना जाएगा। जानकारी के मुताबिक यह चेतावनी ऐसे वक्त आई है जब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर हेल्थ ड्रिंक्स, प्रोटीन प्रोडक्ट्स, स्नैक्स और पैकेज्ड फूड के विज्ञापन तेजी से बढ़े हैं। FSSAI का संकेत साफ है कि अब सिर्फ ब्रांड नहीं, उन्हें प्रमोट करने वाले चेहरे भी जांच के दायरे में रहेंगे।
भ्रामक दावे अब भारी पड़ सकते हैं
नियामक ने कहा है कि एंडोर्समेंट करने वाले लोगों को ब्रांड की बात को जस का तस दोहराने से पहले यह देखना होगा कि उत्पाद सुरक्षित है या नहीं, उसके दावे कानून के मुताबिक हैं या नहीं और क्या उनके पास वैज्ञानिक आधार है। सूत्रों के अनुसार FSSAI की आपत्ति खास तौर पर उन दावों पर है जिनमें “इम्युनिटी बढ़ाने”, “न्यूट्रिएंट्स से भरपूर” या इसी तरह के आकर्षक लेकिन कमजोर आधार वाले शब्द इस्तेमाल किए जाते हैं। रेस्टोरेंट और फूड इंडस्ट्री से जुड़ी रिपोर्टों में भी यही कहा गया है कि डिजिटल मार्केटिंग में ऐसे दावे तेज़ी से बढ़े हैं और लोग कई बार सेलिब्रिटी की बात पर ब्रांड से ज्यादा भरोसा कर लेते हैं। इसी कारण अब जिम्मेदारी का दायरा और कड़ा किया जा रहा है।
कानून और जांच का दायरा बढ़ा
FSSAI ने संकेत दिया है कि ऐसे मामलों में खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 तथा फूड एडवरटाइजिंग एंड क्लेम्स रेगुलेशंस, 2018 के तहत कार्रवाई हो सकती है। हाल के दिनों में यह भी देखा गया है कि नियामक झूठे या भ्रामक दावों पर केवल चेतावनी तक सीमित नहीं है, बल्कि सख्त कदम उठा रहा है। 13 अगस्त को ही FSSAI ने तीन फूड बिजनेस ऑपरेटरों के लाइसेंस निलंबित किए थे, जहां गलत दावों और स्वच्छता खामियों की बात सामने आई थी। इससे साफ है कि संस्था अब ब्रांडिंग, लेबलिंग और प्रमोशनल कंटेंट—तीनों पर एक साथ निगरानी बढ़ा रही है।
उपभोक्ता भी निगरानी में शामिल
नए सख्त रुख का असर सीधे आम खरीदारों पर पड़ेगा, क्योंकि FSSAI ने उपभोक्ताओं से भी भ्रामक विज्ञापन रिपोर्ट करने की अपील की है। जानकारी के मुताबिक Food Safety Connect प्लेटफॉर्म के जरिए शिकायत दर्ज कराने पर जोर दिया जा रहा है। नियामक के इस कदम को उस व्यापक सख्ती से भी जोड़कर देखा जा रहा है जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने पैकेज्ड फूड पर नमक, चीनी और सैचुरेटेड फैट की स्पष्ट चेतावनी देने को लेकर FSSAI और केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ाया है। साफ संदेश यही है कि खाने-पीने की चीज़ों के बारे में अधूरी या चकाचौंध भरी बात अब पुरानी छूट नहीं रहेगी।
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