क्या आप जानते हैं सेहत के लिए इसके कितने फायदे हैं? जानें शरीर को मिलने वाले सभी जरूरी लाभ

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दही और योगर्ट दिखने में एक जैसे लगते हैं, लेकिन बनने के तरीके, पोषण और पाचन पर असर में बड़ा अंतर है। ग्रीक योगर्ट में प्रोटीन ज्यादा और लैक्टोज कम होता है, जबकि घर का पारंपरिक दही रोजमर्रा की डाइट में ज्यादा सुलभ विकल्प है।

दही और योगर्ट को लेकर लोगों में भ्रम अक्सर बना रहता है। देखने में दोनों एक जैसे लगते हैं, लेकिन पोषण, बनावट और बनाने की प्रक्रिया में साफ फर्क है। हाल के दिनों में स्वास्थ्य से जुड़ी रिपोर्टों और डाइट एक्सपर्ट्स की राय में यह बात फिर सामने आई है कि ग्रीक योगर्ट छानकर तैयार किया जाता है, इसलिए उसमें पानी कम और प्रोटीन ज्यादा होता है, जबकि पारंपरिक दही घरों में जामन से जमाया जाता है और उसका स्वाद हल्का, खट्टापन संतुलित और टेक्सचर नरम रहता है। कई पोषण विशेषज्ञ इसे रोजमर्रा की डाइट के लिए आसान और किफायती विकल्प मानते हैं, जबकि वजन घटाने या प्रोटीन बढ़ाने की कोशिश करने वालों के लिए योगर्ट को बेहतर बताया जा रहा है।


बनाने का तरीका ही दोनों में सबसे बड़ा अंतर

दही और योगर्ट का फर्क सबसे पहले उनकी तैयारी में दिखता है। पारंपरिक दही दूध में जामन डालकर सामान्य तापमान पर जमाया जाता है, जबकि ग्रीक योगर्ट में तैयार दही या दूध को छानकर उसका पानी और मट्ठा अलग किया जाता है। इसी वजह से योगर्ट ज्यादा गाढ़ा, क्रीमी और प्रोटीन-समृद्ध होता है। भारत टीवी हिंदी की एक हालिया रिपोर्ट में भी यही बताया गया कि छानने की प्रक्रिया के चलते योगर्ट में कार्बोहाइड्रेट और लैक्टोज की मात्रा कम हो जाती है। दूसरी तरफ, घर का दही हल्का, नरम और आसानी से हर घर में बन जाने वाला विकल्प है। यही वजह है कि छोटे कस्बों से लेकर बड़े शहरों तक दही भारतीय खाने का स्थायी हिस्सा बना हुआ है, जबकि योगर्ट अब भी पैक्ड हेल्थ फूड की श्रेणी में ज्यादा देखा जाता है।


पोषण और सेहत पर असर में भी साफ फर्क

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय के मुताबिक, दही और योगर्ट दोनों ही पेट के लिए अच्छे माने जाते हैं, लेकिन उनके लाभ एक जैसे नहीं हैं। दही में प्रोबायोटिक्स होते हैं, जो पाचन तंत्र को सहारा देते हैं और आंतों की सेहत पर सकारात्मक असर डालते हैं। न्यूज़24 ऑनलाइन और जंसत्ता जैसी हालिया स्वास्थ्य रिपोर्टों में रोज दही खाने के फायदे गिनाए गए हैं, जिनमें पाचन सुधार, पेट की गर्मी में राहत और भोजन के साथ हल्का संतुलन शामिल है। वहीं ग्रीक योगर्ट में प्रोटीन ज्यादा होने की वजह से यह लंबे समय तक भूख कम कर सकता है और मसल्स रिकवरी में मददगार माना जाता है। एनडीटीवी हेल्थ की एक रिपोर्ट में भी डेयरी प्रोडक्ट्स को प्रोटीन और टिश्यू सपोर्ट के लिहाज से अहम बताया गया है। यही कारण है कि फिटनेस जगत में योगर्ट को वजन प्रबंधन और हाई-प्रोटीन डाइट का बेहतर हिस्सा कहा जा रहा है।


किसे क्या चुनना चाहिए, बाजार में बढ़ रही मांग

बाजार में अब पैक्ड योगर्ट, ग्रीक योगर्ट और लो-शुगर वैरिएंट्स की मांग लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि जिन लोगों को प्रोटीन ज्यादा चाहिए, उन्हें बिना मीठा मिलाए योगर्ट चुनना चाहिए, जबकि सामान्य पाचन और घरेलू भोजन के साथ दही अब भी भरोसेमंद विकल्प बना हुआ है। स्किन और डाइट से जुड़ी कुछ हालिया रिपोर्टों में भी यह संकेत मिला कि हल्के और पारंपरिक फर्मेंटेड डेयरी प्रोडक्ट शरीर पर अलग-अलग असर डालते हैं, इसलिए एक ही नियम सब पर लागू नहीं होता। दुकानों में अब यूनानी और ग्रीक स्टाइल योगर्ट के साथ कई तरह के फ्लेवर्ड विकल्प भी मिल रहे हैं, लेकिन डॉक्टर और न्यूट्रिशनिस्ट लगातार यह सलाह दे रहे हैं कि पैक पर शुगर और फैट की मात्रा जरूर देखी जाए। साधारण भाषा में कहें तो दही रोजमर्रा के खाने का साथी है, जबकि योगर्ट फिटनेस और हाई-प्रोटीन डाइट का खास विकल्प बनता जा रहा है।

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