ऑफिस हो या वर्क फ्रॉम होम, घंटों कुर्सी पर बैठे रहना पड़ सकता है भारी, जानें लंबे समय तक बैठने से दिल पर क्या पड़ता है असर

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लंबे समय तक कुर्सी पर बैठे रहना अब सिर्फ कमर दर्द की वजह नहीं माना जा रहा, यह दिल की सेहत के लिए भी खतरा बनता जा रहा है। नई रिपोर्टों और विशेषज्ञों की राय के मुताबिक, लगातार बैठे रहने से ब्लड सर्कुलेशन, शुगर और कोलेस्ट्रॉल पर असर पड़ता है।

दफ्तर की कुर्सी, कार की सीट और घर में घंटों टीवी के सामने बैठे रहना अब दिल की सेहत पर भारी पड़ सकता है। हाल के दिनों में सामने आई रिपोर्टों और विशेषज्ञों की राय ने एक बार फिर यह सवाल तेज कर दिया है कि क्या लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहना सिर्फ सुस्ती नहीं, बल्कि हार्ट के लिए सीधा खतरा है। जानकारी के मुताबिक, लगातार बैठने से शरीर की मांसपेशियां कम सक्रिय रहती हैं, खून का बहाव धीमा पड़ता है और शुगर-फैट के इस्तेमाल की क्षमता भी कमजोर पड़ती है। यही वजह है कि हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड और मोटापे का जोखिम साथ-साथ बढ़ता है।


लंबी कुर्सी, धीमा सर्कुलेशन

रिपोर्टों में यह बात भी उभरी है कि सिर्फ वर्कआउट कर लेना काफी नहीं, अगर दिन का बड़ा हिस्सा बैठे-बैठे निकल रहा हो। वेस्टी, भास्कर हिंदी और अन्य अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य कवरेज में इस जोखिम को लेकर WHO की पुरानी चेतावनी का जिक्र किया गया है, जिसमें बैठने का समय कम करने और दिन में ज्यादा मूवमेंट रखने की सलाह दी गई है। 2024 में प्रकाशित एक बड़े विश्लेषण का हवाला देते हुए बताया गया कि करीब 4.8 लाख लोगों के डेटा में ज्यादा बैठकर काम करने वालों में दिल से जुड़ी मौत का जोखिम अधिक मिला। यानी पूरा फोकस सिर्फ जिम पर नहीं, पूरे दिन की एक्टिविटी पर होना चाहिए।


क्या कहता है स्वास्थ्य विज्ञान

दिल की सेहत पर बैठे रहने का असर कई रास्तों से आता है। जब मांसपेशियां कम काम करती हैं, तो शरीर ब्लड शुगर और फैट को उतनी तेजी से नहीं जला पाता। नतीजा यह कि इंसुलिन रेजिस्टेंस, बढ़ी हुई शुगर, खराब कोलेस्ट्रॉल प्रोफाइल और वेट गेन की जमीन तैयार होती है। कुछ रिपोर्टों में 4 घंटे से ज्यादा लगातार बैठे रहने को भी नुकसानदेह बताया गया है, जबकि कई डॉक्टरों ने 8 से 10 घंटे की डेस्क जॉब को खतरे की घंटी माना है। सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसियों की सामान्य सलाह यही है कि हर आधे घंटे से एक घंटे में कुछ देर खड़ा हुआ जाए, टहल लिया जाए या शरीर को हल्का-सा हिला दिया जाए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, दिन में 10 से 20 मिनट की तेज चाल भी बैठे रहने के असर को कुछ हद तक कम कर सकती है। वहीं हफ्ते में कम से कम 150 मिनट की मध्यम शारीरिक गतिविधि को बुनियादी जरूरत माना जाता है। यानी ऑफिस की नौकरी करने वाले लोगों के लिए सीढ़ियां चढ़ना, छोटे-छोटे ब्रेक लेना, फोन पर खड़े होकर बात करना और हर बैठक के बाद थोड़ी चाल जरूरी हो गई है। दिल की बीमारी का खतरा एक दिन में नहीं बनता, लेकिन रोज की छोटी लापरवाहियां उसे मजबूत करती जाती हैं।


ऑफिस कल्चर पर भी सवाल

इस मुद्दे ने कॉर्पोरेट दफ्तरों से लेकर घरेलू कामकाज तक, हर जगह की दिनचर्या पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब कम उम्र के लोगों में भी हाई बीपी, बढ़े हुए लिपिड प्रोफाइल और लगातार थकान की शिकायतें सामने आने लगी हैं। डॉक्टरों का कहना है कि जो लोग बैठकर काम करते हैं, उन्हें खुद को एक्टिव रखने की जिम्मेदारी और ज्यादा लेनी होगी, वरना एक फिट दिखने वाली लाइफस्टाइल के भीतर भी चुपचाप जोखिम पनपता रहता है। कई विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि लंबे समय तक बैठने की आदत आधुनिक जीवन की सबसे खतरनाक लेकिन सबसे अनदेखी समस्या बन चुकी है। मरीजों और आम लोगों के लिए संदेश साफ है। कुर्सी पर बिताए गए घंटों की भरपाई सिर्फ शाम की कसरत से नहीं होगी, दिनभर शरीर को हरकत में रखना होगा। खून का बहाव सही रहे, तो दिल पर बोझ कम रहेगा। और यही वजह है कि डॉक्टर अब सिर्फ एक्सरसाइज नहीं, बल्कि बैठने की आदत तोड़ने को भी इलाज का हिस्सा मान रहे हैं।

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