किडनी की सेहत जांचने के लिए जरूरी है KFT, जानें इसमें कौन-कौन से टेस्ट होते हैं और कब करानी चाहिए जांच
- Shiv Kumar
- 06 Sep, 2026
किडनी शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। यह लगातार खून को फिल्टर करने के साथ शरीर से बेकार पदार्थ बाहर निकालने का काम करती है। इसके अलावा शरीर में पानी, इलेक्ट्रोलाइट्स और कई जरूरी रासायनिक तत्वों का संतुलन बनाए रखने में भी किडनी की अहम भूमिका होती है। ऐसे में किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होने पर इसका असर पूरे शरीर की सेहत पर पड़ सकता है। किडनी से जुड़ी बीमारियों को लेकर चिंता इसलिए भी रहती है क्योंकि शुरुआती चरण में अक्सर इनके स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। कई लोगों को लंबे समय तक यह पता नहीं चल पाता कि उनकी किडनी ठीक से काम कर रही है या नहीं। ऐसे में जोखिम वाले लोगों के लिए समय-समय पर जांच कराना महत्वपूर्ण हो सकता है। किडनी फंक्शन टेस्ट यानी KFT ऐसी जांचों का समूह है, जिसकी मदद से किडनी की कार्यक्षमता का आकलन किया जाता है।
किडनी की सेहत जांचने के लिए कौन से टेस्ट होते हैं?
किडनी फंक्शन टेस्ट में आमतौर पर खून की जांच की जाती है और जरूरत पड़ने पर पेशाब की जांच भी कराई जाती है। इसमें सीरम क्रिएटिनिन, ब्लड यूरिया नाइट्रोजन और ईजीएफआर जैसे महत्वपूर्ण मानकों को देखा जाता है। क्रिएटिनिन शरीर की मांसपेशियों से बनने वाला अपशिष्ट पदार्थ है, जिसे सामान्य स्थिति में किडनी खून से फिल्टर करके बाहर निकालती है। किडनी की कार्यक्षमता कम होने पर खून में क्रिएटिनिन का स्तर बढ़ सकता है। क्रिएटिनिन के आधार पर ईजीएफआर यानी अनुमानित ग्लोमेरुलर फिल्ट्रेशन रेट का आकलन किया जाता है। इससे किडनी की फिल्टर करने की क्षमता का अनुमान लगाने में मदद मिलती है। इसके अलावा यूएसीआर यानी यूरिन एल्ब्यूमिन-क्रिएटिनिन रेशियो भी महत्वपूर्ण जांच है। इससे पेशाब में एल्ब्यूमिन यानी एक तरह के प्रोटीन की मौजूदगी का पता लगाने में मदद मिलती है।
किन लोगों के लिए KFT ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है?
हर स्वस्थ व्यक्ति को बार-बार KFT कराने की जरूरत नहीं होती। हालांकि डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोग जैसी स्थितियों में किडनी प्रभावित होने का जोखिम बढ़ सकता है। परिवार में किडनी फेलियर का इतिहास होने पर भी डॉक्टर किडनी की नियमित जांच की सलाह दे सकते हैं। डायबिटीज वाले लोगों के लिए किडनी की निगरानी विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। ऐसे मरीजों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित रूप से किडनी की जांच करानी चाहिए। जांच कितनी बार करानी है, यह व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और दूसरी बीमारियों के आधार पर अलग-अलग हो सकता है। इसलिए जांच की अवधि डॉक्टर से सलाह लेकर तय करना बेहतर रहता है।
ईजीएफआर और यूएसीआर से क्या पता चलता है?
किडनी की कार्यक्षमता का आकलन करने में ईजीएफआर एक महत्वपूर्ण मानक है। ईजीएफआर कम होना किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होने का संकेत हो सकता है। हालांकि किसी एक रिपोर्ट में ईजीएफआर कम आने से ही किडनी की बीमारी की पुष्टि नहीं की जाती। डॉक्टर व्यक्ति की पूरी स्वास्थ्य स्थिति और जरूरत के अनुसार अन्य जांचों को भी देखते हैं।
यूएसीआर भी किडनी की सेहत के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देता है। स्वस्थ किडनी आमतौर पर एल्ब्यूमिन जैसे प्रोटीन को पेशाब में जाने से रोकती है। पेशाब में एल्ब्यूमिन की मात्रा बढ़ना किडनी को नुकसान का संकेत हो सकता है। यूएसीआर 30 मिलीग्राम/ग्राम से अधिक होने पर किडनी से जुड़ी समस्या की संभावना की जांच की जाती है। स्थिति को समझने के लिए डॉक्टर जरूरत के अनुसार दोबारा जांच या अन्य परीक्षण करा सकते हैं।
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